किश्तवाड़ में सुरक्षाबलों का आमना-सामना: पुलिस स्टेशन पर हमले के आरोप में सेना के कमांडिंग ऑफिसर और 40 जवानों पर FIR
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में सेना और पुलिस के बीच हुआ टकराव। पुलिस स्टेशन में घुसकर मारपीट और तोड़फोड़ करने के आरोप में कमांडिंग ऑफिसर सहित 40 जवानों के खिलाफ दर्ज हुई FIR। आखिर क्यों बिगड़े हालात? पढ़ें इस सनसनीखेज घटना का पूरा ब्यौरा।

किश्तवाड़ के अथोली पुलिस स्टेशन में सेना और पुलिस के बीच झड़प के बाद तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है, मामले में FIR दर्ज कर जांच की जा रही है।
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने प्रशासन और सुरक्षा तंत्र के बीच संबंधों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के सुदूर पाडर इलाके स्थित अथोली पुलिस स्टेशन पर सेना के जवानों द्वारा कथित रूप से धावा बोलने और पुलिस अधिकारियों के साथ मारपीट करने का मामला प्रकाश में आया है। इस घटना के बाद स्थानीय पुलिस ने सेना के एक कमांडिंग ऑफिसर समेत करीब 40 जवानों के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है, जिससे इलाके में भारी तनाव की स्थिति बनी हुई है।
घटना का सूत्रपात बुधवार को तब हुआ जब पुलिस ने यातायात नियमों के उल्लंघन के आरोप में सेना के एक अधिकारी के निजी वाहन को जब्त कर लिया था। इस कार्रवाई के बाद स्थिति ने हिंसक मोड़ ले लिया। पुलिस द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार, 17 राष्ट्रीय राइफल्स (किजई कैंप) के 30 से 40 सशस्त्र जवान मेजर विकास शर्मा और नायब सूबेदार शंकर गुरखे के नेतृत्व में पाडर स्थित अथोली पुलिस स्टेशन पहुंचे। आरोप है कि इन जवानों ने मुख्य द्वार और चारदीवारी फांदकर पुलिस स्टेशन में जबरन प्रवेश किया। लाठी, लोहे की छड़ों और हथियारों से लैस इन जवानों ने स्टेशन पर मौजूद पुलिस कर्मियों पर कथित रूप से सुनियोजित हमला कर दिया।
इस हिंसक झड़प में थाने के प्रभारी निरीक्षक (SHO) अमृत कोटाच ने आरोप लगाया है कि उन्हें शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया और उनकी वर्दी भी फाड़ दी गई। हमले की तीव्रता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उप-विभागीय पुलिस अधिकारी (SDPO) विजय कुमार भगत के साथ भी मारपीट की गई। वहीं, स्पेशल पुलिस ऑफिसर सुरेश कुमार के गले पर सर्विस राइफल की बट से वार किया गया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। इतना ही नहीं, घटना के दौरान थाने में मौजूद सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (ARTO) और उनके सुरक्षाकर्मियों को भी निशाना बनाया गया। प्रदर्शनकारियों ने न केवल पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की, बल्कि एआरटीओ, एसडीपीओ और एसएचओ के आधिकारिक वाहनों को भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया।
कानूनी कार्रवाई के तहत, पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें गैरकानूनी तरीके से एकत्र होने, दंगा करने, आपराधिक अतिचार, लोक सेवकों पर हमला, हत्या के प्रयास, आपराधिक धमकी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। प्राथमिकी में 17 राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल एन अरुण गांधी, मेजर विकास शर्मा, नायब सूबेदार शंकर गुरखे और सिपाही राज कुमार, राहुल कुमार, अनूप सिंह तथा ओंकार इंगले को नामजद किया गया है।
इस पूरे प्रकरण पर भारतीय सेना ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि मामले की जांच स्थापित संस्थागत तंत्र के माध्यम से की जा रही है। सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल सुनील बर्तवाल ने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना कानूनी प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग करेगी। उन्होंने कहा कि संयुक्त जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी और इस समय किसी भी प्रकार की टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी। यह घटना न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बनी है, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा रही है, जिस पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं।

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