Parliament Budget Session 2026 : लोकसभा के भीतर आज बजट सत्र की कार्यवाही उस समय भारी शोर-शराबे और तीखी नोकझोंक की भेंट चढ़ गई, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा प्रहार करते हुए इस सौदे को देश के हितों का 'आत्मसमर्पण' करार दिया। विपक्ष के इन गंभीर आरोपों ने सदन के भीतर राजनीतिक पारे को चरम पर पहुँचा दिया, जिसके जवाब में सरकार ने अब राहुल गांधी के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई का मन बना लिया है।

घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब राहुल गांधी ने सदन को संबोधित करते हुए दावा किया कि भारत और अमेरिका के बीच हुई हालिया ट्रेड डील केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री द्वारा देश को 'बेचने' के समान है। उन्होंने बेहद कड़े शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि यह समझौता 1.5 अरब भारतीयों के भविष्य का 'पूरी तरह से आत्मसमर्पण' है और सरकार ने यह कदम केवल सत्ताधारी दल के वित्तीय ढांचे को सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया है।

सरकार की तीखी प्रतिक्रिया : 'प्रमाण दें या परिणाम भुगतें'

राहुल गांधी के इन आरोपों पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने तत्काल मोर्चा संभाला। रिजिजू ने सदन की गरिमा का हवाला देते हुए राहुल गांधी के भाषण में हस्तक्षेप किया और उन्हें उनके पद की जिम्मेदारी याद दिलाई। रिजिजू ने दो टूक शब्दों में कहा कि एक नेता प्रतिपक्ष का बयान देश और दुनिया में गंभीर परिणाम रखता है, इसलिए वे बिना किसी पुख्ता साक्ष्य के इतने संवेदनशील मुद्दे पर देश को गुमराह नहीं कर सकते।

सदन के बाहर समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से बात करते हुए किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि सरकार राहुल गांधी के खिलाफ 'विशेषाधिकार हनन' (Privilege Motion) का नोटिस दाखिल करने जा रही है। रिजिजू के अनुसार, राहुल गांधी ने न केवल प्रधानमंत्री बल्कि केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर भी बिना किसी पूर्व सूचना या साक्ष्यों के गंभीर लांछन लगाए हैं।

संसदीय नियम और वैधानिक पक्ष :

संसदीय प्रक्रिया के नियमों का हवाला देते हुए सरकार ने कुछ प्रमुख बिंदुओं को रेखांकित किया है:

  • नियमों का उल्लंघन : लोकसभा की कार्यसंचालन नियमावली के तहत, यदि कोई सदस्य किसी अन्य सदस्य या मंत्री पर व्यक्तिगत आरोप लगाता है, तो उसे पहले से नोटिस देना अनिवार्य है।
  • प्रमाणीकरण की अनिवार्यता : नियमों के अनुसार, सदन पटल पर लगाए गए हर आरोप को सदस्य द्वारा प्रमाणित (Authenticate) करना होता है, जिसमें राहुल गांधी विफल रहे हैं।
  • सदन की अवमानना : बिना साक्ष्य के 'देश बेचने' जैसे शब्दों का प्रयोग करना सदन को गुमराह करने और उसकी गरिमा को ठेस पहुँचाने की श्रेणी में आता है।
Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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