सिया-केतन केस के बाद संसद में नेशनल कमीशन फॉर मेन बिल पेश, सांसद बोले- पुरुष भी हो सकते हैं पीड़ित
राज्यसभा सांसद अशोक कुमार मित्तल ने पुणे के सिया-केतन मामले के बाद संसद में नेशनल कमीशन फॉर मेन बिल, 2025 पेश किया। केतन अग्रवाल की मौत, हत्या की जांच, पुलिस कार्रवाई, अदालत के आदेश और पुरुष पीड़ितों को लेकर उठी मांग ने मामले को नई चर्चा में ला दिया है।

राज्यसभा में सांसद अशोक कुमार मित्तल सदन को संबोधित करते हुए।
नई दिल्ली: पुणे के केतन अग्रवाल मामले के बाद राज्यसभा सांसद अशोक कुमार मित्तल ने संसद में नेशनल कमीशन फॉर मेन बिल, 2025 पेश किया है। उन्होंने कहा कि हालिया पुणे केतन अग्रवाल मामले ने पुरुष पीड़ितों के लिए संस्थागत समर्थन और कानूनी संरक्षण की आवश्यकता को उजागर किया है।
Pune Ketan Agarwal case is deeply disturbing. Ketan and his family deserve a fair, thorough, and impartial investigation, and above all, justice.
— Ashok Kumar Mittal (@DrAshokKMittal) July 3, 2026
I introduced the National Commission for Men Bill in Parliament. Every victim deserves justice, support, and equal protection under… pic.twitter.com/M6ENpG1T7F
पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) सांसद अशोक कुमार मित्तल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए पुणे केतन अग्रवाल मामले को “बेहद चिंताजनक” बताया और निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की मांग की। उन्होंने कहा, “पुणे केतन अग्रवाल मामला बेहद चिंताजनक है। केतन और उनके परिवार को निष्पक्ष, गहन और पक्षपात रहित जांच तथा सबसे बढ़कर न्याय मिलना चाहिए। मैंने संसद में नेशनल कमीशन फॉर मेन बिल पेश किया है। हर पीड़ित न्याय, समर्थन और कानून के तहत समान सुरक्षा का हकदार है।”
उन्होंने आगे कहा, “केतन मामला इस बात की याद दिलाता है कि पुरुष भी पीड़ित हो सकते हैं। उन्हें संस्थागत समर्थन, कानूनी संरक्षण और ऐसा मंच मिलना चाहिए जहां उनकी आवाज सुनी जाए। न्याय सभी के लिए समान होना चाहिए, चाहे उनका लिंग कोई भी हो।”
सिया-केतन मामला 25 वर्षीय रियल्टर केतन अग्रवाल की मौत से जुड़ा है। 18 जून को पुणे के पास लोहागढ़ किले पर एक चट्टान से गिरने के बाद उनकी मौत हो गई थी। शुरुआत में इस मामले को दुर्घटनावश हुई मौत माना गया था, लेकिन बाद में इसे हत्या की जांच में बदल दिया गया।
पुलिस ने सिया गोयल और चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया। पुलिस का आरोप है कि दोनों ने कथित रूप से साजिश रचकर केतन अग्रवाल को चट्टान से धक्का दिया था। जांचकर्ताओं के अनुसार, मोबाइल फोन से डिलीट किए गए डेटा की बरामदगी और कथित सांकेतिक बातचीत इस मामले में प्रमुख साक्ष्य हैं।
शुक्रवार को अदालत ने दोनों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि आरोपियों द्वारा पॉलीग्राफ परीक्षण कराने से इनकार किए जाने के बाद ऐसे परीक्षण उनकी सहमति के बिना नहीं कराए जा सकते।
यह मामला अब हत्या की जांच, डिजिटल साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के साथ-साथ पुरुषों के लिए संस्थागत सहायता और कानूनी संरक्षण की मांग को लेकर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

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