संयुक्त लोकशाही आघाडी सरकार ने छात्राओं को प्रति माह अधिकतम तीन दिन की छुट्टी देने और पचास से अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में डे-केअर केंद्र खोलने का प्रस्ताव रखा है।

Kerala government menstrual leave for school girls : देश में महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता की दिशा में केरल ने एक बार फिर एक ऐसा क्रांतिकारी कदम उठाया है, जो पूरे देश के लिए एक नई मिसाल बन सकता है। केरल की कांग्रेस प्रणीत संयुक्त लोकशाही आघाडी (UDF) सरकार ने राज्य की महिलाओं और छात्राओं के लिए कई बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी कल्याणकारी योजनाओं की आधिकारिक घोषणा की है। सरकार द्वारा पेश किए गए इस नए प्रस्ताव के तहत अब स्कूल जाने वाली लड़कियों को हर महीने मासिक धर्म के दौरान अधिकतम तीन दिनों की विशेष छुट्टी दी जाएगी। इस फैसले ने न केवल रूढ़िवादी धारणाओं को तोड़ा है, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य और गरिमा को सीधे तौर पर मुख्यधारा के नीतिगत फैसलों से जोड़ दिया है। सरकार के इस बड़े ऐलान के बाद से ही पूरे राज्य सहित देश भर के सामाजिक और राजनैतिक हल्कों में इसके प्रभाव को लेकर गंभीर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

इस व्यापक महिला कल्याणकारी नीति के तहत राज्य सरकार ने कामकाजी महिलाओं को भी एक बड़ी सौगात दी है। नए नीतिगत प्रावधानों के अनुसार, राज्य के भीतर संचालित होने वाले ऐसे सभी सरकारी और निजी संस्थान जहां कर्मचारियों की संख्या 50 से अधिक है, वहां अनिवार्य रूप से सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाले डे-केअर केंद्र (पाळणाघरे) तथा शिशुगृह शुरू करने की योजना बनाई गई है। सरकार का मानना है कि इस कदम से कामकाजी माताओं को अपने बच्चों की सुरक्षा की चिंता से मुक्ति मिलेगी और वे कार्यस्थलों पर पूरी क्षमता के साथ अपना योगदान दे सकेंगी। यह योजना सीधे तौर पर महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता और पेशेवर विकास को बढ़ावा देने वाली साबित होगी।

इस पूरे महाअभियान का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण हिस्सा 'प्रोजेक्ट मेन्स्ट्रुअल डिग्निटी' (मासिक धर्म गरिमा परियोजना) है, जिस पर राज्य सरकार इस वक्त सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रही है। इस विशेष प्रोजेक्ट के अंतर्गत सभी शैक्षणिक संस्थानों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों को महिलाओं व छात्राओं के लिए अधिक अनुकूल और सुलभ बनाया जाएगा। इस योजना के तहत न केवल सैनिटरी नैपकिन, बल्कि महिलाओं और छात्राओं के लिए फुटवियर (बूट-चप्पल) तथा अन्य अत्यंत आवश्यक व्यक्तिगत स्वच्छता सामग्री भी मुफ्त या बेहद रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जाएगी। इस ऐतिहासिक कदम के जरिए राज्य सरकार का मुख्य संकल्प केरल को पूरे देश के भीतर महिलाओं के दृष्टिकोण से सबसे सुरक्षित, अनुकूल और आदर्श राज्य के रूप में स्थापित करना है।

सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर कानूनी और आधिकारिक रूप से सुदृढ़ कदम उठाते हुए केरल सरकार ने इसके साथ ही 'निराश्रित आणि अनाथ-मुक्त केरल' (Destitute and Orphan-Free Kerala) उपक्रम की भी शुरुआत की है। इस बेहद संवेदनशील और मानवीय पहल के तहत पूरे राज्य में एक व्यापक और सुरक्षित कानूनी दत्तक ग्रहण (Adoption) मुहिम चलाई जाएगी। इस कानूनी ढांचे के अंतर्गत पूरी तरह से प्रशिक्षित और सरकार द्वारा निर्धारित उचित मानधन पाने वाले 'पालक परिवारों' (Foster Families) का एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया जाएगा। यह कानूनी ढांचा यह सुनिश्चित करेगा कि राज्य का कोई भी बच्चा अनाथ या निराश्रित न रहे और हर बेसहारा बच्चे को एक कानूनी और सुरक्षित पारिवारिक माहौल मिल सके।

केरल सरकार द्वारा उठाए गए ये नीतिगत कदम सिर्फ तात्कालिक घोषणाएं नहीं हैं, बल्कि यह समाज के सबसे संवेदनशील और बुनियादी मुद्दों पर किया गया एक बड़ा प्रहार है। स्कूल स्तर पर मासिक धर्म की छुट्टी देने और कार्यस्थलों पर शिशुगृहों को अनिवार्य करने का यह प्रशासनिक फैसला आने वाले समय में देश के अन्य राज्यों को भी अपनी नीतियों में बदलाव करने के लिए विवश करेगा। यह ऐतिहासिक बदलाव न केवल महिलाओं की सामाजिक और शैक्षणिक भागीदारी को सुरक्षित करेगा, बल्कि भविष्य की पीढ़ी के लिए एक अधिक संवेदनशील और समान समाज की नींव रखने का काम करेगा, जिसका असर आने वाले दशकों में साफ दिखाई देगा।

Updated On 30 May 2026 6:19 PM IST
Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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