कसौली के जंगलों में प्रकृति का तांडव; : सुलगती पहाड़ियों को बचाने उतरी भारतीय वायुसेना
हिमाचल प्रदेश के सोलन में भड़की वन क्षेत्र की आग पर काबू पाने के लिए भारतीय वायुसेना ने एमआई-17 हेलीकॉप्टरों से की पानी की बौछार।

हिमाचल प्रदेश के कसौली में जंगलों में लगी आग को बुझाने के लिए आसमान से पानी का छिड़काव करते भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर।
Kasauli forest fire air force rescue operation : हिमाचल प्रदेश का सुप्रसिद्ध और खूबसूरत पर्वतीय क्षेत्र कसौली पिछले कुछ दिनों से प्रकृति के भीषण प्रकोप का सामना कर रहा है, जहाँ के जंगलों में भड़की विनाशकारी आग ने विकराल रूप धारण कर लिया है। चीड़ के सूखे पत्तों और तेज हवाओं के चलते सोलन जिले के कसौली बीट क्षेत्र में लगी यह आग देखते ही देखते लगभग 10 हेक्टेयर वन क्षेत्र में फैल गई। इस भयावह दावानल ने न केवल बहुमूल्य वन संपदा को खाक किया, बल्कि आस-पास के आवासीय इलाकों, महत्वपूर्ण नागरिक ढांचों और सामरिक रूप से संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठानों के अस्तित्व पर भी सीधा खतरा पैदा कर दिया। पहाड़ों से उठती आग की गगनचुंबी लपटों और धुएं के गुबार ने स्थानीय निवासियों की सांसें अटका दी थीं, जिसके बाद स्थिति की गंभीरता को देखते हुए देश की रक्षा करने वाली भारतीय वायुसेना को आपदा प्रबंधन के इस महाअभियान में उतरना पड़ा।
आग की भयावहता की पहली आधिकारिक सूचना 26 मई को प्राप्त हुई थी, जिसके तुरंत बाद प्रशासन हरकत में आया। वायुसेना ने स्थिति की जमीनी हकीकत और संवेदनशीलता को भांपने के लिए सबसे पहले एक चीता हेलीकॉप्टर को रेकी के लिए भेजा। हालात को बेकाबू होता देख नागरिक प्रशासन की आपातकालीन सहायता के लिए वायुसेना ने अपने सबसे भरोसेमंद और शक्तिशाली एमआई-17 वी5 मीडियम लिफ्ट हेलीकॉप्टरों को तत्काल प्रभाव से युद्धक्षेत्र में झोंक दिया। इसके बाद पहाड़ों की ढलानों पर शुरू हुआ एक ऐसा अनवरत ऑपरेशन, जिसने आधुनिक सैन्य इतिहास में साहस की एक नई इबारत लिख दी।
इस पूरे हवाई अग्निशमन अभियान को बेहद योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया। वायुसेना के जांबाज पायलटों ने राज्य प्रशासन, वन विभाग, भारतीय सेना और स्थानीय आपदा प्रबंधन प्राधिकारियों के साथ एक मजबूत जमीनी और हवाई समन्वय स्थापित किया। हेलीकॉप्टरों की मदद से चलाए गए इस 'बम्बी बकेट अभियान' का मुख्य केंद्र चंडीगढ़ की सुखना झील को बनाया गया। वायुसेना के हेलीकॉप्टर लगातार सुखना झील से पानी भरते और उड़ान भरकर प्रभावित पहाड़ी ढलानों पर जाकर उस पानी को गिराते रहे। जांबाज विमान चालक दल ने प्रत्येक उड़ान में लगभग 2,000 से 2,500 लीटर पानी ले जाकर जलती हुई पहाड़ियों पर बरसाया। इस पूरे ऑपरेशन के दौरान वायुसेना ने आसमान से प्रभावित क्षेत्रों में 93,000 लीटर से अधिक पानी का भारी-भरकम छिड़काव किया, जिससे आग की रफ्तार पर लगाम कसी जा सकी।
इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन का सबसे अभूतपूर्व और ऐतिहासिक पहलू वह था, जब भारतीय वायुसेना के इतिहास में पहली बार नाइट विजन गॉगल्स (एनवीजी) तकनीक की सहायता से रात्रिकालीन बम्बी बकेट अग्निशमन अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। रात के घने अंधेरे में, ऊंचे और संकीर्ण पहाड़ी इलाकों के बीच, सीमित दृश्यता और खतरनाक भूभाग की चुनौतियों का सामना करते हुए इस तरह के ऑपरेशन को चलाना मौत से खेलने जैसा था। जोखिम के उच्चतम स्तर पर होने के बावजूद, वायुसेना के विमान चालक दल ने अदम्य साहस, अद्वितीय परिचालन दक्षता और उच्च स्तर की सटीकता का परिचय दिया। इस हवाई पराक्रम के पीछे वायुसेना के तकनीकी और स्थलीय कर्मियों (ग्राउंड स्टाफ) की भी रीढ़ की हड्डी जैसी भूमिका रही, जिन्होंने खराब मौसम की परवाह न करते हुए बिना थके चौबीसों घंटे हेलीकॉप्टरों की त्वरित सर्विसिंग, तकनीकी मरम्मत और ईंधन की पुनः तैनाती सुनिश्चित की ताकि ऑपरेशन में एक पल का भी ठहराव न आए।
तमाम सुरक्षा एजेंसियों, वन विभाग और भारतीय सेना के इस अभूतपूर्व समन्वित प्रयास के परिणामस्वरूप आखिरकार कसौली के सुलगते जंगलों पर प्रभावी नियंत्रण पा लिया गया है। इस समय स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और एक बेहद भयावह तथा व्यापक संभावित नुकसान को पूरी तरह टाल दिया गया है। वायुसेना के इस सफल और जांबाज मिशन ने न केवल कसौली की हसीन वादियों और जिंदगियों को खाक होने से बचाया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि युद्ध के मैदान से लेकर प्राकृतिक आपदाओं के दौर तक, देशवासियों की सुरक्षा के लिए भारतीय वायुसेना हमेशा तत्पर और सर्वोपरि है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
