कर्नाटक में बड़ा सियासी उलटफेर! सिद्धरामैया देंगे इस्तीफा, प्रियंका गांधी के कड़े स्टैंड के बाद डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता हुआ साफ।

Karnataka New CM : कर्नाटक की सियासत में लंबे समय से सुलग रही मुख्यमंत्री पद की कलह का आखिरकार वो अंत हो गया जिसकी पटकथा काफी पहले से लिखी जा रही थी। सत्ता के गलियारों से आई इस सबसे बड़ी खबर ने पूरे देश के राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया है, जहां मुख्यमंत्री सिद्धरामैया ने हार मानकर अपने पद से हटने का ऐलान कर दिया है। गुरुवार को कैबिनेट मंत्रियों के साथ हुई एक बेहद संवेदनशील और भावुक बैठक में सिद्धरामैया ने साफ कर दिया कि कांग्रेस आलाकमान के फैसले के आगे वे नतमस्तक हैं और राहुल गांधी जो भी कहेंगे, वे वही करेंगे। इसके साथ ही कर्नाटक की सत्ता का नया 'बॉस' कौन होगा, इस पर लगा सस्पेंस पूरी तरह खत्म हो गया है और प्रदेश के सबसे कद्दावर नेता डीके शिवकुमार की ताजपोशी का रास्ता साफ हो चुका है।

इस पूरे सत्ता परिवर्तन के पीछे की जो 'इनसाइड स्टोरी' निकलकर सामने आई है, उसमें कांग्रेस महासचिव और वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा सबसे बड़ी 'किंगमेकर' बनकर उभरी हैं। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने प्रियंका गांधी ने बेहद आक्रामक और स्पष्ट रुख अपनाया था। उन्होंने आलाकमान को दो टूक शब्दों में सलाह दी थी कि केंद्रीय एजेंसियों के भीषण दबाव, मुकदमों और तमाम मुश्किलों के बाद भी जो नेता चट्टान की तरह कांग्रेस के साथ खड़े रहे, संकट के इस दौर में पार्टी को भी उनके साथ खड़ा होना चाहिए। प्रियंका गांधी का यह सीधा इशारा डीके शिवकुमार की तरफ था, जिन्होंने मुश्किल से मुश्किल दौर में भी कर्नाटक में कांग्रेस का झंडा थामे रखा। प्रियंका गांधी के इस मजबूत स्टैंड को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी का भी पूरा समर्थन मिला, जिसके बाद नेतृत्व परिवर्तन की इस स्क्रिप्ट पर अंतिम मुहर लग गई।

गुरुवार को हुई इस ऐतिहासिक बैठक में मुख्यमंत्री सिद्धरामैया काफी भावुक नजर आए। उन्होंने अपने कैबिनेट सहयोगियों का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें किसी नए चेहरे के लिए जगह बनाने को कहा गया है और एक सच्चे सिपाही की तरह वे हाईकमान के इस आदेश का पालन कर रहे हैं। गौरतलब है कि कर्नाटक चुनाव के बाद से ही दोनों नेताओं के बीच 'ढाई-ढाई साल' के रोटेशन समझौते की चर्चाएं जोरों पर थीं। जब अंतिम फैसले के मंथन के दौरान यह सवाल उठा कि क्या डीके शिवकुमार के अलावा किसी और चेहरे पर भी विचार किया जाना चाहिए, तब प्रियंका गांधी ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि इस कुर्सी पर सिर्फ और सिर्फ डीके शिवकुमार का हक है और किसी दूसरे नाम पर विचार तक नहीं होना चाहिए। राहुल गांधी ने भी दोनों दिग्गजों के साथ कई दौर की गुप्त और संयुक्त बैठकें कर पार्टी की एकजुटता बनाए रखने की पूरी कोशिश की।

इस पूरे घटनाक्रम का कानूनी और आधिकारिक पहलू भी बेहद महत्वपूर्ण है। सिद्धरामैया द्वारा राज्यपाल को अपना औपचारिक इस्तीफा सौंपे जाने के बाद कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें डीके शिवकुमार को आधिकारिक तौर पर नया नेता चुना जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दक्षिण भारत के इस सबसे महत्वपूर्ण राज्य में हुआ यह बदलाव आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिहाज से कांग्रेस के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। प्रियंका गांधी के इस फैसले ने न केवल डीके शिवकुमार को कर्नाटक का नया सुल्तान बना दिया है, बल्कि देश भर के कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को यह कड़ा संदेश भी दिया है कि वफादारी और संघर्ष करने वाले नेताओं का मूल्यांकन पार्टी में सबसे ऊपर होगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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