कर्नाटक में विभागों के आवंटन से नाराज होकर वरिष्ठ कांग्रेस नेता रामलिंगा रेड्डी ने मंत्री पद छोड़ा, बेंगलुरु विकास मंत्रालय न मिलने को बताई वजह।

Ramalinga Reddy Resignation : कर्नाटक में डी.के. शिवकुमार के मुख्यमंत्री पद की कमान संभालते ही कांग्रेस सरकार के भीतर सुलग रहा असंतोष अब खुलकर धरातल पर आ गया है। मंत्रिमंडल में विभागों के बंटवारे के महज चौबीस घंटे के भीतर सरकार को उस वक्त तगड़ा झटका लगा, जब कांग्रेस के बेहद सीनियर नेता और आठ बार के विधायक रामलिंगा रेड्डी ने मंत्री पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी। वादाखिलाफी से आहत रेड्डी के इस आत्मघाती कदम ने सिद्धरामैया और शिवकुमार के नेतृत्व वाली सरकार के भीतर विभागों को लेकर मचे घमासान को सार्वजनिक कर दिया है, जिससे राज्य की सियासत में जबरदस्त उबाल आ गया है।

शुक्रवार को आयोजित एक बेहद तल्ख प्रेस कॉन्फ्रेंस में रामलिंगा रेड्डी ने अपने इस कड़े फैसले की वजहों को सिलसिलेवार ढंग से उजागर किया। भावुक और आक्रोशित नजर आ रहे 72 वर्षीय दिग्गज नेता ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि उनके आत्मसम्मान की है। उन्होंने सीधे तौर पर आलाकमान और मुख्यमंत्री पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें जिस महत्वपूर्ण विभाग का भरोसा दिया गया था, ऐन वक्त पर उससे उन्हें वंचित कर दिया गया। रेड्डी ने बताया कि उन्होंने अपना आधिकारिक इस्तीफा मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के प्रधान सचिव को अपने एक सहयोगी के माध्यम से भिजवा दिया है, जिसने सरकार के भीतर हड़कंप मचा दिया है।

इस्तीफे की अंदरूनी कहानी को बयां करते हुए रामलिंगा रेड्डी ने अतीत के उन वादों का हवाला दिया, जो बंद कमरों में किए गए थे। रेड्डी का दावा है कि जब पूर्व में सिद्धरामैया मुख्यमंत्री बने थे, तब उन्हें बेंगलुरु अर्बन डेवलपमेंट (जीबीए) विभाग सौंपने का लिखित-मौखिक आश्वासन मिला था। उस वक्त उन्होंने स्वेच्छा से मंत्री पद लेने से इनकार कर दिया था। इसके बाद खुद डी.के. शिवकुमार ने उनके आवास पर जाकर यह वादा दोहराया था कि जब भी वह (शिवकुमार) राज्य के मुख्यमंत्री बनेंगे, बेंगलुरु विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी रामलिंगा रेड्डी को ही सौंपी जाएगी। हालांकि, गुरुवार को जब विभागों की अंतिम सूची जारी हुई, तो रेड्डी को जल संसाधन मंत्रालय की जिम्मेदारी थमा दी गई, जबकि उनका पसंदीदा और वादा किया गया बेंगलुरु अर्बन डेवलपमेंट विभाग कृष्णा बायरे गौड़ा की झोली में डाल दिया गया। इसी उपेक्षा को रेड्डी बर्दाश्त नहीं कर पाए।

कर्नाटक की राजनीति में रामलिंगा रेड्डी कोई साधारण नाम नहीं हैं, बल्कि वे कांग्रेस के संकटमोचक और बेंगलुरु संभाग के सबसे मजबूत स्तंभ माने जाते हैं। लगातार आठ बार विधानसभा चुनाव जीतने वाले रेड्डी इससे पहले सिद्धरामैया कैबिनेट में गृह मंत्री, परिवहन मंत्री और हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती मंत्री जैसे बेहद संवेदनशील और वजनदार मंत्रालयों को संभाल चुके हैं। वर्तमान में वह बेंगलुरु की हाई-प्रोफाइल बीटीएम लेआउट (BTM Layout) सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने इस सीट पर 68,557 मत (कुल वोटों का 50.70 प्रतिशत) हासिल कर भाजपा के कड़े प्रतिद्वंद्वी के.आर. श्रीधरा को शिकस्त दी थी, जिन्हें 43.88 प्रतिशत वोट मिले थे। ऐसे कद्दावर नेता की अनदेखी ने सरकार के संकट को गहरा कर दिया है।

हालांकि, इस पूरे सियासी घटनाक्रम के बीच रामलिंगा रेड्डी ने यह साफ करके कांग्रेस नेतृत्व को थोड़ी राहत जरूर दी है कि उनका यह कदम पार्टी विरोधी नहीं है और न ही वे पार्टी छोड़ रहे हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि वे कांग्रेस के एक वफादार सिपाही के रूप में बने रहेंगे और विधानसभा में केवल एक विधायक की हैसियत से अपनी जनता की आवाज उठाते रहेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रेड्डी का यह इस्तीफा महज एक शुरुआत है। बेंगलुरु के विकास और उसके बजट पर नियंत्रण रखने वाले मलाईदार विभाग को लेकर शुरू हुई यह जंग आने वाले दिनों में कर्नाटक कांग्रेस के भीतर एक बड़े गृहयुद्ध का रूप ले सकती है, जिससे पार पाना मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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