बंगाल में नया कूटनीतिक खेल; चीफ व्हिप पद से हटते ही सांसद को मिली केंद्रीय सुरक्षा
तृणमूल कांग्रेस सांसद काकोली घोष दस्तीदार को लोकसभा में मुख्य सचेतक के पद से मुक्त किए जाने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सीआईएसएफ की सुरक्षा दी है।

संसद के भीतर लोकसभा की कार्यवाही में दस्तावेज हाथ में लेकर अपनी बात रखतीं तृणमूल कांग्रेस की वरिष्ठ सांसद डॉक्टर काकोली घोष दस्तीदार।
Kakoli Ghosh Dastidar Y Category Security : पश्चिम बंगाल की सरजमीं और देश के राजनीतिक गलियारों में इस वक्त एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है, जिसने तृणमूल कांग्रेस के भीतर मचे आंतरिक घमासान और केंद्र-राज्य के बीच जारी शह-मात के खेल को एक बार फिर चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की बेहद वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद डॉक्टर काकोली घोष दस्तीदार को पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी द्वारा संसदीय दल के बेहद महत्वपूर्ण 'चीफ व्हिप' (मुख्य सचेतक) के पद से हटाए जाने के तुरंत बाद, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उन्हें देश की प्रतिष्ठित 'Y' श्रेणी की सशस्त्र सुरक्षा कवच से नवाज दिया है। एक तरफ जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का यह कदम टीएमसी के भीतर बड़े संगठनात्मक और संसदीय फेरबदल का स्पष्ट संकेत दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार का यह त्वरित फैसला बंगाल की कूटनीति में नए समीकरणों की आहट पैदा कर रहा है।
इस पूरे सियासी घटनाक्रम की प्रशासनिक और रणनीतिक शुरुआत मंगलवार, 19 मई को हुई जब गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से एक आधिकारिक आदेश जारी किया गया। इस फैसले के तहत काकोली घोष दस्तीदार को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के कमांडो की सुरक्षा घेरे वाली ‘वाई’ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान करने की घोषणा की गई। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, खुफिया इनपुट और खतरे के आकलन के आधार पर इस कड़े सुरक्षा कवर को तत्काल प्रभाव से धरातल पर लागू कर दिया गया है। देश की राजधानी और पश्चिम बंगाल में एक साथ हुए इस फैसले को कूटनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि यह ठीक उसी समय हुआ है जब तृणमूल कांग्रेस के भीतर शीर्ष स्तर पर आंतरिक असंतोष और संगठनात्मक खींचतान की खबरें लगातार बाहर आ रही थीं।
संसदीय स्तर पर घटे इस बड़े घटनाक्रम के समानांतर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दिल्ली में तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा सांसदों की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आपातकालीन बैठक बुलाई थी। इसी बैठक के दौरान ममता बनर्जी ने कड़ा फैसला लेते हुए वरिष्ठ और आक्रामक छवि के नेता कल्याण बनर्जी को लोकसभा में टीएमसी का नया चीफ व्हिप नियुक्त करने का ऐलान कर दिया। कल्याण बनर्जी ने इस बेहद रसूखदार पद पर काकोली घोष दस्तीदार का स्थान लिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद के भीतर अपनी कूटनीतिक और विधायी रणनीति को और अधिक आक्रामक व अनुशासित बनाने के उद्देश्य से ही पार्टी आलाकमान ने यह चौंकाने वाला कदम उठाया है। कल्याण बनर्जी की इस पद पर दोबारा वापसी को टीएमसी नेतृत्व के अटूट भरोसे के रूप में देखा जा रहा है, जो पहले भी इस जिम्मेदारी को संभाल चुके थे।
अगर काकोली घोष दस्तीदार के राजनीतिक रसूख की बात करें, तो 66 वर्षीय डॉक्टर काकोली टीएमसी संगठन के भीतर महिला सशक्तिकरण का सबसे बड़ा चेहरा मानी जाती हैं। वर्तमान में ऑल इंडिया तृणमूल महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसी बेहद अहम जिम्मेदारी संभाल रहीं काकोली अब तक लगातार तीन बार लोकसभा की सांसद चुनी जा चुकी हैं। उन्होंने 15वीं लोकसभा के आम चुनाव में पहली बार बड़ी जीत दर्ज कर संसद में कदम रखा था, जिसके बाद 2014 और 2019 के आम चुनावों में भी वे अपनी सीट को अभेद्य बनाए रखने में पूरी तरह सफल रहीं। पेशे से डॉक्टर रहीं काकोली घोष दस्तीदार को संसद के भीतर और बाहर टीएमसी की मुखर आवाज माना जाता रहा है, और यही वजह है कि अचानक उन्हें इस प्रतिष्ठित पद से मुक्त किया जाना कई तरह के आंतरिक मतभेदों की ओर इशारा कर रहा है।
भले ही तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने इस बड़े फेरबदल और काकोली को पदमुक्त किए जाने की कोई आधिकारिक या ठोस वजह उजागर नहीं की है, लेकिन इसे आगामी चुनाव और पश्चिम बंगाल की प्रशासनिक चुनौतियों को देखते हुए पार्टी की एक गहरी और सोची-समझी रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है। हालांकि, पद छिनने के तुरंत बाद गृह मंत्रालय द्वारा उन्हें केंद्रीय सुरक्षा घेरा सौंप दिया जाना इस बात को हवा दे रहा है कि क्या टीएमसी के इस वरिष्ठ चेहरे और दिल्ली के बीच कोई नया कूटनीतिक संवाद स्थापित हो रहा है। इस संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को एक ऐसे मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां आने वाले दिनों में संगठन के भीतर नए गुटीय समीकरण और केंद्र-राज्य के बीच एक नया सियासी संग्राम देखने को मिल सकता है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
