कौन थे जिद्दू कृष्णमूर्ति ? 131वीं जयंती पर जानिए उनकी 5 सबसे चर्चित प्रेरणादायक किताबें
11 मई 2026 को जिद्दू कृष्णमूर्ति की 131वीं जयंती मनाई जा रही है। थियोसोफिकल सोसाइटी से अलग होकर “सत्य एक पथहीन भूमि है” का संदेश देने वाले इस भारतीय दार्शनिक ने आत्मचेतना, स्वतंत्र विचार और मानसिक मुक्ति पर दुनिया को नई दिशा दी। जानिए उनकी जिंदगी, दर्शन और 5 सबसे प्रभावशाली किताबों के बारे में।

भारतीय दार्शनिक और लेखक जिद्दू कृष्णमूर्ति
11 मई 2026 को भारतीय दार्शनिक, आध्यात्मिक चिंतक, वक्ता और लेखक जिद्दू कृष्णमूर्ति की 131वीं जयंती मनाई जा रही है। लगभग एक सदी पहले दुनिया के सामने विचारों की ऐसी धारा रखने वाले कृष्णमूर्ति आज भी आधुनिक समाज, शिक्षा, धर्म, मनोविज्ञान और आत्मचेतना पर होने वाली चर्चाओं के केंद्र में बने हुए हैं। “सत्य एक पथहीन भूमि है” जैसी उनकी ऐतिहासिक घोषणा ने न केवल स्थापित धार्मिक ढांचों को चुनौती दी, बल्कि आत्म-अवलोकन और स्वतंत्र चिंतन की नई दिशा भी दी।
11 मई 1895 को जन्मे जिद्दू कृष्णमूर्ति को बचपन में थियोसोफिकल सोसाइटी के सदस्यों ने अपनाया था। उस समय उन्हें भविष्य के “वर्ल्ड टीचर” के रूप में तैयार किया जा रहा था, जिनसे मानवता के आध्यात्मिक विकास का नेतृत्व करने की उम्मीद की गई थी। लेकिन वर्ष 1929 में कृष्णमूर्ति ने थियोसोफी आंदोलन से स्वयं को अलग कर लिया और अपने लिए बनाई गई संस्था ‘ऑर्डर ऑफ द स्टार इन द ईस्ट’ को भंग कर दिया। इस फैसले ने पूरी दुनिया को चौंका दिया था।
भारतीय चिंतक जिद्दू कृष्णमूर्ति का पार्श्व चित्र
कृष्णमूर्ति ने अपने जीवनभर किसी भी गुरु, संस्था, विचारधारा या धार्मिक अनुशासन का अंधानुकरण करने का विरोध किया। उनका मानना था कि मनुष्य केवल “चॉइसलेस अवेयरनेस” यानी बिना किसी मानसिक पूर्वाग्रह के जागरूक होकर ही वास्तविक स्वतंत्रता और सत्य को समझ सकता है। उन्होंने पारंपरिक ध्यान पद्धतियों से अलग “सच्चे ध्यान” की अवधारणा प्रस्तुत की, जिसमें व्यक्ति स्वयं को बिना किसी निर्णय के देखता है।
1922 में उनके जीवन में रहस्यमयी और पीड़ादायक आध्यात्मिक अनुभवों की शुरुआत हुई थी, जिसने उनकी चेतना और वास्तविकता की समझ को स्थायी रूप से बदल दिया। बाद के वर्षों में उन्होंने दुनिया भर में हजारों लोगों को संबोधित किया और मानव मन, भय, अकेलेपन, इच्छा, संघर्ष और चेतना पर अपने विचार साझा किए। 1950 के दशक में लेखक और दार्शनिक Aldous Huxley द्वारा मुख्यधारा के प्रकाशकों से परिचय करवाए जाने के बाद उनकी पहचान और अधिक व्यापक हुई। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक The First and Last Freedom ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें नई पहचान दिलाई।
अपने अंतिम दिनों तक कृष्णमूर्ति ने किसी भी प्रकार के आध्यात्मिक उत्तराधिकार को स्वीकार नहीं किया। मृत्यु से कुछ दिन पहले उन्होंने कहा था कि उनके शरीर से होकर गुजरने वाली चेतना या बुद्धिमत्ता को वास्तव में कोई समझ नहीं पाया और आने वाले “सैकड़ों वर्षों” तक वैसी चेतना किसी अन्य शरीर में दिखाई नहीं देगी। 17 फरवरी 1986 को उनके निधन के बाद भारत, ब्रिटेन और अमेरिका में स्थापित गैर-लाभकारी संस्थाएं आज भी उनके विचारों, व्याख्यानों और शैक्षणिक दर्शन को आगे बढ़ा रही हैं।
कृष्णमूर्ति की शिक्षाओं को समझने के लिए उनकी कुछ किताबों को आज भी सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। पाठकों, शोधकर्ताओं और उनके लंबे समय से अनुयायियों के बीच ये पुस्तकें विशेष रूप से लोकप्रिय हैं।
१. Freedom from the Known
यह किताब कृष्णमूर्ति के विचारों को समझने की सबसे बेहतरीन शुरुआत मानी जाती है। इसमें भय, मानसिक बंधन, अकेलापन, सुख और स्वतंत्रता जैसे विषयों को बेहद सरल लेकिन गहरे तरीके से समझाया गया है।
२. The First and Last Freedom
यह उनकी सबसे प्रभावशाली दार्शनिक पुस्तकों में गिनी जाती है। आत्म-अवलोकन, इच्छा, भय और मानसिक संघर्ष जैसे विषयों पर आधारित यह पुस्तक आज भी गंभीर पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है।
३. Think on These Things
युवाओं, विद्यार्थियों और समाज, शिक्षा तथा सफलता को नए नजरिए से समझने वालों के लिए यह पुस्तक बेहद प्रासंगिक मानी जाती है। इसकी भाषा संवादात्मक और आधुनिक महसूस होती है।
४. The Awakening of Intelligence
चेतना, विचार, ध्यान और मानव संघर्ष पर आधारित यह विस्तृत पुस्तक उनके गहन दार्शनिक दृष्टिकोण को सामने लाती है। लंबे समय से उनके विचारों का अध्ययन करने वाले पाठकों के बीच इसे अत्यंत परिवर्तनकारी माना जाता है।
५. The Book of Life
यह दैनिक चिंतन और ध्यान संबंधी विचारों का संग्रह है। छोटे-छोटे अध्यायों में प्रस्तुत यह पुस्तक उन पाठकों के लिए उपयुक्त मानी जाती है जो धीरे-धीरे उनके विचारों को आत्मसात करना चाहते हैं।
जिद्दू कृष्णमूर्ति केवल एक आध्यात्मिक विचारक के रूप में नहीं, बल्कि ऐसे चिंतक के रूप में याद किए जा रहे हैं जिन्होंने मानव चेतना, स्वतंत्रता और आत्मबोध पर दुनिया की सोच को गहराई से प्रभावित किया। तकनीक, तनाव और वैचारिक विभाजन से जूझ रही आधुनिक दुनिया में उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक माने जाते हैं जितने एक सदी पहले थे।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
