राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक अनोखे लेकिन विवादित फोटोशूट ने देशभर में बहस छेड़ दी है। एक हाथी को चमकीले गुलाबी रंग में रंगकर किए गए इस फोटोशूट की तस्वीरें जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, वैसे ही पशु कल्याण को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे और प्रशासन हरकत में आ गया।

यह फोटोशूट रूसी फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेवा द्वारा किया गया था, जिसमें एक मॉडल को रंगे हुए हाथी के साथ पोज देते और उस पर बैठे हुए दिखाया गया। बताया गया कि इस कॉन्सेप्ट की प्रेरणा जयपुर की ‘पिंक सिटी’ पहचान से ली गई थी, ताकि एक आकर्षक और कलात्मक दृश्य तैयार किया जा सके। हालांकि, यह रचनात्मक प्रयोग जल्द ही विवाद का कारण बन गया।



जैसे-जैसे तस्वीरें वायरल हुईं, सोशल मीडिया पर लोगों और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। आलोचकों का कहना है कि सौंदर्य और सोशल मीडिया कंटेंट के लिए किसी जीवित प्राणी का इस तरह इस्तेमाल करना शोषण की श्रेणी में आता है। हाथियों की संवेदनशील त्वचा को लेकर भी चिंता जताई गई और यह सवाल उठाया गया कि क्या इस प्रक्रिया से जानवर को शारीरिक या मानसिक तनाव पहुंचा।

विवाद के बीच फोटोग्राफर ने सफाई देते हुए कहा कि इस्तेमाल किया गया रंग जैविक था और आमतौर पर त्योहारों में भी प्रयोग होता है। वहीं, हाथी के मालिक ने दावा किया कि रंग को बहुत कम समय के लिए लगाया गया और शूट के लगभग 30 मिनट के भीतर ही हाथी को पूरी तरह साफ कर दिया गया, ताकि उसे किसी प्रकार की असुविधा न हो।



इसके बावजूद, आमेर के हाथी गांव से जुड़े कुछ लोगों के बयान सामने आए, जिनमें कहा गया कि हाथी की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया था। लेकिन सोशल मीडिया पर उठे सवाल थमने का नाम नहीं ले रहे। कई यूजर्स ने इस घटना को “रचनात्मकता के नाम पर क्रूरता” करार दिया और पूछा कि आखिर एक जीवित प्राणी को ‘प्रॉप’ बनाने की जरूरत क्यों पड़ी। कुछ प्रतिक्रियाओं में यह भी कहा गया कि “जानवर कैनवास नहीं हैं, वे संवेदनशील जीव हैं जो दर्द और असुविधा महसूस करते हैं।” वहीं, कुछ लोगों ने पशु अधिकार संगठन PETA की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान वन विभाग ने जांच शुरू कर दी है। जांच के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • क्या फोटोशूट के लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी
  • क्या वन्यजीव और पशु कल्याण से जुड़े कानूनों का उल्लंघन हुआ है

यह घटना एक बार फिर देश में पर्यटन और रचनात्मक उद्योगों में जानवरों के उपयोग को लेकर व्यापक बहस को सामने ले आई है। कला और नैतिकता के बीच की सीमाओं, तथा पशु संरक्षण कानूनों के सख्त अनुपालन की आवश्यकता पर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है। जयपुर का यह ‘पिंक एलीफेंट’ फोटोशूट केवल एक वायरल घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह उस संवेदनशील प्रश्न को उजागर करता है कि क्या आधुनिक रचनात्मकता के नाम पर किसी जीवित प्राणी की गरिमा और सुरक्षा से समझौता किया जा सकता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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