12 जून 2025 की वह सुबह भारतीय विमानन इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज हो चुकी है। अहमदाबाद से उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद एयर इंडिया की फ्लाइट AI 171 अचानक आसमान से मौत बनकर गिरी और 260 जिंदगियां हमेशा के लिए थम गईं। अब, इस भीषण त्रासदी को लेकर इटली के प्रमुख अख़बार कोरिएरे देल्ला सेरा की एक रिपोर्ट ने नए और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जांचकर्ता अपनी अंतिम रिपोर्ट में यह संकेत दे सकते हैं कि विमान के इंजनों की शक्ति खत्म होना किसी तकनीकी खराबी का परिणाम नहीं, बल्कि कॉकपिट में की गई एक ‘जानबूझकर कार्रवाई’ का नतीजा था।

रिपोर्ट के अनुसार, प्रारंभिक विश्लेषण से यह सामने आया है कि विमान के फ्यूल कंट्रोल स्विच “RUN” से “CUTOFF” स्थिति में ले जाए गए थे। यह बदलाव इंजन को ईंधन की आपूर्ति रोक देता है, जिससे तत्काल थ्रस्ट समाप्त हो जाता है। कहा जा रहा है कि कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर के विश्लेषण से यह संकेत मिले हैं कि यह कार्रवाई स्वचालित प्रणाली की विफलता के बजाय मानवीय हस्तक्षेप का परिणाम हो सकती है।



AI 171, एक बोइंग 787 ड्रीमलाइनर, अहमदाबाद से उड़ान भरते ही अचानक शक्ति खो बैठा और पास स्थित एक छात्रावास भवन पर जा गिरा। विमान में सवार यात्रियों और चालक दल के अलावा जमीन पर मौजूद लोग भी इस दुर्घटना की चपेट में आ गए। कुल 260 लोगों की मृत्यु ने पूरे देश को झकझोर दिया था। हादसे के तुरंत बाद तकनीकी खराबी, इंजन फेल्योर और रखरखाव मानकों को लेकर कई आशंकाएं जताई गई थीं, लेकिन अब इटली की इस रिपोर्ट ने जांच की दिशा को एक नए कोण से देखने पर मजबूर कर दिया है।

मीडिया रिपोर्टों में पायलट-इन-कमांड कैप्टन सुमीत सभरवाल का नाम प्रमुखता से सामने आया है। हालांकि, अब तक किसी भी आधिकारिक एजेंसी ने सार्वजनिक रूप से किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय नहीं की है। भारत की एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) द्वारा तैयार की जा रही अंतिम जांच रिपोर्ट अभी जारी नहीं हुई है। नागरिक उड्डयन प्राधिकरणों की ओर से भी इटली की रिपोर्ट में किए गए दावों की पुष्टि नहीं की गई है।



इस बीच, पीड़ित परिवारों ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष जांच में तेजी और पारदर्शिता की मांग की है। अदालत ने भी स्पष्ट किया है कि बिना आधिकारिक निष्कर्ष के किसी पर दोषारोपण करना उचित नहीं होगा। पायलट संगठनों और सभरवाल के परिजनों ने भी मीडिया ट्रायल पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने यह भी आग्रह किया है कि विमानन प्रक्रियाओं, एयरलाइन प्रबंधन और तकनीकी प्रणालियों की समान रूप से गहन जांच होनी चाहिए।

यह पूरा प्रकरण न केवल एक विमान दुर्घटना की जांच है, बल्कि भारतीय विमानन सुरक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और पारदर्शिता की कसौटी भी बन चुका है। यदि अंतिम रिपोर्ट में मानवीय हस्तक्षेप की पुष्टि होती है, तो यह मामला केवल एक हादसा नहीं, बल्कि विश्वास और जिम्मेदारी के गंभीर प्रश्नों को जन्म देगा। फिलहाल, देश और दुनिया की नजरें AAIB की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस त्रासदी के पीछे की सच्चाई को निर्णायक रूप से सामने लाएगी।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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