2025 के ISSF World Cup Final में भारत के लिए जीत की गौरवशाली कहानी लिखी गई, जब सिमरनप्रीत कौर ब्रार ने महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता, जबकि ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर ने पुरुषों की 50 मीटर राइफल (3‑पोजिशन) में रजत पदक हासिल कर भारतीय निशानेबाज़ी को नई उड़ान दी।

शुरुआती शॉट से ही सिमरनप्रीतने अपनी प्रतिष्ठित क़ीमत साबित कर दी। फाइनल राउंड में उन्होंने न केवल बेहतरीन निशानेबाज़ी दिखाई, बल्कि ऐसा प्रदर्शन किया कि माना जा रहा है उन्होंने जूनियर वर्ल्ड रिकॉर्ड के बराबर स्कोर कर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया। इस कामयाबी ने भारत को पिस्टल वर्ग में एक विश्व‑स्तरीय मुकाम दिलाया है, जो आने वाले बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए एक मजबूत संकेत है।

दूसरी ओर, तोमर की राइफल स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन ने भारत की राइफल टीम की मजबूती भी उजागर की। 50 मीटर राइफल 3‑पोजिशन फॉर्मेट में उन्होंने फोकस, संतुलन और स्थिरता का ऐसा परिचय दिया कि निर्णायक शूट‑ऑफ में सिल्वर सुनिश्चित कर ली। तोमर की यह उपलब्धि इस बात का प्रतीक है कि भारतीय राइफलधारी युवा और अनुभवी दोनों ही स्तरों पर विश्व‑क्लास प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हैं।

इस टूर्नामेंट में भारतीय दल का प्रदर्शन न केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित रहा, बल्कि उसने यह संदेश दिया कि देश में निशानेबाज़ी की नींव अब बेहद मजबूत हो चुकी है। पिस्टल और राइफल दोनों ही प्रमुख वर्गों में पदक प्राप्ति यह दर्शाती है कि भारतीय शूटिंग में विविधता, क्षमता और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मौजूद है।

विशेष रूप से, सिमरनप्रीत और तोमर जैसी युवा प्रतिभाओं की सफलता यह संकेत देती है कि भारत लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा में बना रहेगा। प्रशिक्षण संस्थानों, प्रशिक्षकों और खेल प्रबंधन को भी उन पर भरोसा रखने का अवसर मिला है, जिससे आगामी विश्व चैंपियनशिप, ओलिंपिक और अन्य प्रमुख टूर्नामेंटों में भारत की उम्मीदें और मजबूत हो गई हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है लेकिन इस सफलता ने दिखाया है कि भारत अब केवल भागीदारी के लिए नहीं, बल्कि पदक और शीर्ष स्थानों के लिए तैयार है। यह दौहा का फाइनल भारत के लिए एक नए युग की शुरुआत हो सकती है, जहाँ युवा शूटर्स ख्वाबों को हकीकत में बदल सकते हैं।

फाइनल राउंड में स्वतंत्र रूप से प्रतिस्पर्धा कर, रिकॉर्ड‑तोड़ स्कोर के साथ स्वर्ण या रजत जीतना, इससे स्पष्ट होता है कि भारत के निशानेबाज़ विश्व‑कक्षा के मानकों पर खरे उतर रहे हैं। आने वाले समय में इस जोरदार प्रदर्शन को दोहराने के लिए अगर सुनियोजित प्रशिक्षण और संरक्षित समर्थन मिलता रहा, तो भारतीय शूटिंग को अंतरराष्ट्रीय मेदोनों पर नई ऊँचाइयाँ मिल सकती हैं।

समापन: दोहा में ISSF वर्ल्ड कप फाइनल में सिमरनप्रीत कौर ब्रार का स्वर्ण और ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर का रजत सिर्फ एक टूर्नामेंट की जीत नहीं यह भारतीय निशानेबाज़ी के उज्जवल भविष्य की दहलीज है। इन उपलब्धियों ने एक बार फिर साबित किया कि जब तैयारी, हुनर और आत्मविश्वास साथ हों, तो भारत दुनिया के किसी भी मुकाबले में अपना परचम लहरा सकता है।

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Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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