ईरान-इजरायल युद्ध: भारत के लिए क्यों है यह 'रेड अलर्ट'? जयशंकर ने किया खुलासा।
संसद के बजट सत्र में पश्चिम एशिया संकट पर घमासान। विदेश मंत्री का बयान, ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव और ऊर्जा सुरक्षा पर बढ़ती चिंता की विस्तृत रिपोर्ट।

लोकतंत्र के मंदिर, भारतीय संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण आज एक अभूतपूर्व राजनीतिक गहमागहमी और ऐतिहासिक टकराव के बीच शुरू हुआ। एक ओर जहाँ समूचा विपक्ष पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में सुलगती जंग और उसके भारत पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभावों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है, वहीं दूसरी ओर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के विपक्षी प्रस्ताव ने सदन के भीतर संवैधानिक और राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ती यह खाई आज विधायी कार्यों पर भारी पड़ती दिखाई दी।
पश्चिम एशिया संकट : विपक्ष की व्यापक बहस की मांग
सत्र की शुरुआत होते ही कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने पश्चिम एशिया की अस्थिर स्थिति पर सरकार से स्पष्टीकरण और विस्तृत चर्चा की मांग की। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश और सांसद मणिकम टैगोर ने जोर देकर कहा कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता तनाव महज एक कूटनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा और वहां रहने वाले करीब एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील विषय है।
विदेश मंत्री का बयान और सरकार का रुख :
भारी हंगामे के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा में सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने सदन को सूचित किया कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व की क्षति और जारी संघर्ष पर सरकार की पैनी नजर है। उन्होंने बताया कि:
- 1 मार्च को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक में स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई।
- सभी संबंधित मंत्रालयों को क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक प्रभावों से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
- भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है ताकि वहां रह रहे भारतीय समुदायों और छात्रों को सुरक्षित रखा जा सके।
अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव : संवैधानिक पेच और राजनीतिक गणित
सत्र के पहले ही दिन का सबसे विवादित अध्याय लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव रहा। कांग्रेस सांसदों—मोहम्मद जावेद, के. सुरेश और मल्लू रवि—ने अध्यक्ष पर 'पक्षपातपूर्ण' व्यवहार का आरोप लगाते हुए उन्हें हटाने का नोटिस दिया है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए इसे संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने वाला बताया।
संवैधानिक प्रक्रिया के मुख्य बिंदु :
- समर्थन की आवश्यकता: प्रस्ताव को सदन के विचारार्थ स्वीकार करने के लिए कम से कम 50 सांसदों का सदन में खड़ा होकर समर्थन करना अनिवार्य है।
- अध्यक्ष की भूमिका: चर्चा के दौरान ओम बिरला सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते, हालांकि वे सदन में उपस्थित रहकर अपना पक्ष रख सकते हैं और मतदान में हिस्सा ले सकते हैं।
- व्हिप जारी: भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने सदस्यों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए 'व्हिप' जारी किया है। हालांकि, संख्या बल सरकार के पक्ष में होने के कारण इस प्रस्ताव के गिरने की पूरी संभावना है।
बजट सत्र का आगामी एजेंडा :
सदन की कार्यवाही में केवल विवाद ही नहीं, बल्कि कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य भी कतार में हैं। बजट सत्र के इस दूसरे भाग में मुख्य ध्यान वित्त विधेयक, 2026 और वर्ष 2026-27 के लिए विभिन्न मंत्रालयों के अनुदान की मांगों को पारित करने पर रहेगा। इसके अतिरिक्त, पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से 60 लाख नाम हटाए जाने का मुद्दा और अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते पर भी तीखी बहस होने के आसार हैं।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
