प्रत्येक वर्ष 3 दिसंबर को पूरी दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस (International Day of Persons with Disabilities) मनाया जाता है। भारत में भी यह दिवस विशेष रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों, समाज में उनकी भागीदारी और समान अवसरों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है। इस साल, देशभर में सरकारी संस्थान, गैर-सरकारी संगठन और सामुदायिक समूहों ने विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया, जिनका मुख्य फोकस समावेशी समाज और अधिकारों की जागरूकता पर था।

दिल्ली में केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित मुख्य समारोह में मुख्य अतिथि ने कहा कि दिव्यांगजन केवल समाज के भिन्न सदस्य नहीं हैं, बल्कि वे हमारी सामाजिक और आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता हैं। समारोह में सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, नाट्य मंचन और प्रेरणादायक भाषणों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि समाज में उनके समुचित योगदान और सहभागिता को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर भारत सरकार ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (Rights of Persons with Disabilities Act, 2016) के तहत विभिन्न योजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं का पुनरीक्षण किया। इसमें शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और सार्वजनिक परिवहन में सुविधाओं का विस्तार शामिल है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि दिव्यांग व्यक्तियों को तकनीकी सहायता, रोजगार प्रशिक्षण और समावेशी शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाने के लिए कई नई पहल की जा रही हैं।

देशभर के विभिन्न राज्यों में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। महाराष्ट्र में ‘सक्षम भारत’ अभियान के तहत दिव्यांग बच्चों और युवाओं के लिए खेल प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं, जबकि उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में स्थानीय स्तर पर जागरूकता रैली और कार्यशालाओं का आयोजन हुआ। कई शहरों में दिव्यांग व्यक्तियों की कला और शिल्प प्रदर्शनी लगाई गई, जिससे उनकी प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिला।

विशेष रूप से ध्यान देने योग्य पहल यह रही कि इस वर्ष डिजिटल माध्यमों पर भी व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन वेबिनार के जरिए लोगों को दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों, उनके योगदान और समाज में समावेश के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस न केवल एक प्रतीकात्मक दिन है, बल्कि यह समाज के लिए यह याद दिलाने का अवसर है कि समान अवसर, सम्मान और अधिकार हर नागरिक का मूलभूत अधिकार हैं।


भारत में इस दिन की महत्ता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि यह न केवल कानून और नीतियों की समीक्षा का समय है, बल्कि दिव्यांग व्यक्तियों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए नई दिशा तय करने का अवसर भी प्रदान करता है। अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस भारत में एक संकल्प और प्रतिबद्धता का प्रतीक बन गया है, जो समाज के हर सदस्य को यह संदेश देता है कि समान अवसर और समावेशी दृष्टिकोण ही राष्ट्रीय प्रगति की असली कुंजी हैं।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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