क्या है सूचना और प्रसारण मंत्रालय? यह क्या काम करता है और क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
सरदार पटेल द्वारा स्थापित यह मंत्रालय प्रसार भारती, पीआईबी और सीबीएफसी के माध्यम से देश में सूचना प्रवाह, फिल्म प्रमाणन और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स का नियमन करता है।

आज के डिजिटल युग में सूचनाओं का प्रवाह और मीडिया की विश्वसनीयता किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र की रीढ़ होती है। भारत सरकार का सूचना और प्रसारण मंत्रालय इसी उत्तरदायित्व का केंद्र है, जो देश में सूचना, प्रसारण, प्रेस और सिनेमा से संबंधित नियमों, विनियमों और कानूनों के निर्माण और प्रशासन के लिए जिम्मेदार है। यह मंत्रालय न केवल सरकार की नीतियों को जनता तक पहुँचाने का सेतु है, बल्कि प्रसार भारती जैसे सार्वजनिक प्रसारकों और भारतीय प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) के माध्यम से राष्ट्र के विमर्श को आकार देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वर्तमान में अश्विनी वैष्णव के नेतृत्व में यह मंत्रालय आधुनिक संचार माध्यमों और डिजिटल मीडिया के बदलते स्वरूप के बीच एक नियामक और उत्प्रेरक दोनों की भूमिका निभा रहा है।
इस मंत्रालय की जड़ें भारत की स्वतंत्रता के साथ जुड़ी हुई हैं, जब देश के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने इसके प्रथम मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था। तब से लेकर आज तक, इस विभाग ने देश के सामाजिक-सांस्कृतिक विकास में निरंतर योगदान दिया है। मंत्रालय की संरचना मुख्य रूप से तीन विंग्स में विभाजित है— सूचना, प्रसारण और फिल्म। सूचना विंग जहाँ केंद्र सरकार की नीतियों का प्रचार-प्रसार और प्रेस कौंसिल ऑफ इंडिया जैसे संस्थानों की देखरेख करती है, वहीं फिल्म विंग भारतीय सिनेमा के विकास, फिल्म समारोहों के आयोजन और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के माध्यम से चलचित्रों के विनियमन का कार्य संभालती है।
प्रसारण के क्षेत्र में यह मंत्रालय आकाशवाणी और दूरदर्शन जैसी सेवाओं के विकास और विस्तार का मार्ग प्रशस्त करता है। साथ ही, यह निजी टीवी चैनलों के अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग, डीटीएच सेवाओं और कम्युनिटी रेडियो स्टेशनों के लिए नीतिगत ढांचा तैयार करता है। ऐतिहासिक रूप से देखें तो इंदिरा गांधी, लालकृष्ण आडवाणी और अरुण जेटली जैसी दिग्गज हस्तियों ने इस मंत्रालय का नेतृत्व कर इसकी कार्यप्रणाली को सशक्त बनाया है। मंत्रालय का एक महत्वपूर्ण अंग भारतीय सूचना सेवा (IIS) है, जिसके अधिकारी यूपीएससी के माध्यम से चयनित होकर सरकार और जनता के बीच संचार की अटूट कड़ी के रूप में कार्य करते हैं।
बदलते समय के साथ मंत्रालय ने अपनी भूमिका का विस्तार किया है। अब डिजिटल मीडिया डिवीजन के माध्यम से यह सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के भाग 3 के तहत इंटरनेट पर समाचार प्रकाशकों और ओटीटी प्लेटफार्मों की निगरानी और विनियमन भी करता है। इसके अतिरिक्त, मंत्रालय प्रकाशन विभाग और अनुसंधान, संदर्भ एवं प्रशिक्षण प्रभाग के माध्यम से राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर प्रामाणिक जानकारी साझा करता है। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) और एफटीआईआई जैसे संस्थान भी इसी मंत्रालय के अंतर्गत आते हैं, जो देश को कुशल मीडिया पेशेवर प्रदान कर रहे हैं।
आज यह मंत्रालय केवल एक नियामक संस्था नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूचना और जनसंचार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का एक प्रमुख मंच भी है। यह पारंपरिक लोक कलाओं और पारस्परिक संचार के माध्यम से जनहित के मुद्दों पर जागरूकता फैलाने का कार्य निरंतर करता रहता है। देश की आंतरिक सुरक्षा और बाहरी छवि के निर्माण में इसकी भूमिका इसे भारत सरकार के सबसे प्रभावशाली मंत्रालयों में से एक बनाती है। सिनेमा के क्षेत्र में निर्यात-आयात से लेकर फिल्म सिटी और तकनीकी प्रशिक्षण के विकास तक, यह विभाग भारत की सॉफ्ट पावर को वैश्विक पटल पर मजबूती से स्थापित करने के लिए कृतसंकल्प है।

