indore bhagirathpura contaminated drinking water deaths : नए साल की शुरुआत इंदौर के भागीरथपुरा इलाके के लिए मातम में बदल गई, जब दूषित पेयजल के सेवन से बीमार पड़े कई लोगों की इलाज के दौरान मौत हो गई। डायरिया, उल्टी और तेज पेट दर्द की शिकायतों के बाद बड़ी संख्या में लोगों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया था, जहां कुछ मरीजों ने दम तोड़ दिया। घटना ने पूरे शहर में हड़कंप मचा दिया है और जल आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गहरा शोक व्यक्त किया और मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अस्पतालों में भर्ती सभी मरीजों के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। मुख्यमंत्री ने स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि पीड़ितों को तत्काल और सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए तथा घटना के कारणों की गहन जांच सुनिश्चित की जाए।

जानकारी के अनुसार, भागीरथपुरा क्षेत्र में करीब 15 हजार लोग निवास करते हैं। दूषित पानी की सप्लाई के चलते दिनभर नए मरीज सामने आते रहे, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। हालात को काबू में करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने इलाके में मेडिकल कैंप लगाए और नगर निगम ने सफाई अभियान तेज करते हुए लोगों को क्लोरीन की गोलियां वितरित कीं। प्रशासन ने स्पष्ट तौर पर लोगों को केवल उबला हुआ पानी पीने की सलाह दी है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने बताया कि अधिकांश मरीजों में दूषित पानी पीने के बाद उल्टी और दस्त के गंभीर लक्षण पाए गए हैं। पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं, जिनकी रिपोर्ट 48 घंटे में आने की उम्मीद है।

नगर निगम की प्रारंभिक जांच में पानी के दूषित होने की पुष्टि हुई है। निगम की टीम ने इलाके की पाइपलाइन का नक्शा तैयार कर जांच की, जिसमें मुख्य सप्लाई लाइन के पास गंदगी मिलने के संकेत मिले। नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव के अनुसार, पुलिस चेक पोस्ट के पास बने एक नए शौचालय का गंदा पानी सेप्टिक टैंक के बजाय एक गड्ढे में जा रहा था। यह गड्ढा जल आपूर्ति पाइपलाइन के ठीक ऊपर स्थित था और पाइपलाइन में मौजूद जॉइंट के जरिए गंदगी पानी में मिल गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अगले दो दिनों तक पाइपलाइन को फ्लश करने का निर्णय लिया गया है और लोगों को नल का पानी उपयोग न करने की सख्त सलाह दी गई है।

चिकित्सकों के अनुसार, दूषित पानी में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी सीधे आंतों पर हमला करते हैं, जिससे गंभीर दस्त, उल्टी और शरीर में पानी व नमक की भारी कमी हो जाती है। एम्स गोरखपुर के डॉक्टर रजनीश कुमार बताते हैं कि बच्चों और बुजुर्गों में यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है। यह घटना न केवल एक स्थानीय त्रासदी है, बल्कि शहरी जल प्रबंधन और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा की गंभीर चुनौती को भी उजागर करती है, जिस पर त्वरित और ठोस कार्रवाई अब अनिवार्य हो गई है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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