डॉलर के मुकाबले रुपये में जोरदार उछाल ; 77 पैसे चढ़कर 95.08 पर बंद
विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये ने डॉलर के मुकाबले 77 पैसे की तेज छलांग लगाते हुए 95.08 पर बंद किया। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, डॉलर की कमजोरी, वैश्विक जोखिम भावना में सुधार और एफपीआई निवेश प्रवाह से रुपये को मजबूती मिली। दिनभर उतार-चढ़ाव के बाद मुद्रा एक सप्ताह के उच्च स्तर तक पहुंची।

भारतीय 50 रुपये
विदेशी मुद्रा बाजार में शुक्रवार का दिन भारतीय रुपये के लिए तेज उतार-चढ़ाव और मजबूत वापसी का गवाह बना, जब घरेलू मुद्रा ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 77 पैसे की शानदार छलांग लगाते हुए 95.08 के स्तर पर सत्र का समापन किया। लगातार दबाव झेलने के बाद रुपये में आई यह तेजी वैश्विक आर्थिक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट के चलते दर्ज की गई।
कारोबार की शुरुआत में रुपया 95.32 प्रति डॉलर पर मजबूत खुला, लेकिन दिन के दौरान इसमें भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला और यह कुछ समय के लिए 95.52 के निचले स्तर तक भी फिसल गया। हालांकि बाद में इसमें तेज सुधार देखने को मिला और अंततः यह मजबूती के साथ बंद हुआ। इस दौरान रुपया दिन के भीतर एक सप्ताह के उच्चतम स्तर 94.9550 तक भी पहुंचा, जबकि अंतिम बंद 95.11 के आसपास रहा, जो करीब 0.7 प्रतिशत की दैनिक मजबूती को दर्शाता है। इसके बावजूद साप्ताहिक आधार पर यह मुद्रा लगातार तीन सप्ताह की तेजी के बाद पहली बार गिरावट दर्ज करने में भी रही।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार रुपये में यह उछाल मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट और डॉलर में कमजोरी के कारण देखने को मिला। अमेरिकी डॉलर पर दबाव तब बढ़ा जब वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीदें मजबूत हुईं, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड फिसलकर 85.80 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो पिछले तीन महीनों का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। यह गिरावट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद तेज हुई, जिसमें उन्होंने जल्द ही शांति समझौते की संभावना जताई थी।
भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में कमी डॉलर की मांग को सीधे तौर पर घटाती है, जिससे रुपये को मजबूती मिलती है। इसके साथ ही वैश्विक बाजारों में जोखिम भावनाओं में सुधार देखा गया, जिससे निवेशकों ने उभरते बाजारों की ओर रुख किया और भारतीय मुद्रा को समर्थन मिला।
विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की कमजोरी भी रुपये की मजबूती का एक अहम कारण रही। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में गिरावट के चलते अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर कमजोर हुआ, जिससे निवेशकों ने अपनी स्थिति में बदलाव करते हुए डॉलर की लंबी पोजीशन को कम किया। निर्यातकों द्वारा डॉलर की बढ़ी हुई बिक्री और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) के जरिए भारतीय बाजारों में आई पूंजी प्रवाह ने भी रुपये को अतिरिक्त समर्थन प्रदान किया। बाजार में तरलता बढ़ने से रुपये को मजबूती हासिल हुई।
हालांकि, कारोबारियों का मानना है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने भी अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए अप्रत्यक्ष रूप से बाजार में मौजूदगी बनाए रखी, हालांकि किसी बड़े हस्तक्षेप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस बीच बाजार विश्लेषकों का कहना है कि रुपये पर पहले दबाव की मुख्य वजहें उच्च कच्चे तेल की कीमतें, मजबूत डॉलर और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता थीं। वर्तमान उछाल को मुख्य रूप से एक तकनीकी सुधार और सुधारती बाजार धारणा का परिणाम माना जा रहा है।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के विदेशी मुद्रा शोध विश्लेषक दिलीप परमार के अनुसार, वैश्विक कच्चे तेल में गिरावट और डॉलर में नरमी के चलते रुपये को मजबूती मिली है। वहीं कोटक महिंद्रा बैंक का अनुमान है कि यदि पूंजी प्रवाह में सुधार जारी रहता है तो आने वाले महीनों में रुपया 93.0 से 93.5 के स्तर तक पहुंच सकता है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि आने वाले समय में रुपये की दिशा अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेश प्रवाह और व्यापार घाटे के आंकड़ों पर निर्भर करेगी। फिलहाल वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच रुपये में आई यह तेजी एक महत्वपूर्ण राहत के रूप में देखी जा रही है, लेकिन दीर्घकालिक स्थिरता के लिए वैश्विक आर्थिक स्थिति का स्थिर रहना आवश्यक माना जा रहा है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
