इंडियन बैंक को लगातार दूसरे वर्ष मिला ‘राजभाषा कीर्ति पुरस्कार’
पंचम अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन 2025, गांधीनगर में हिंदी दिवस समारोह के अवसर पर सम्मानित

इंडियन बैंक को वर्ष 2024-25 के लिए ‘राजभाषा कीर्ति तृतीय पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। यह प्रतिष्ठित सम्मान गुजरात की राजधानी गांधीनगर में आयोजित पंचम अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन 2025 के दौरान हिंदी दिवस समारोह में प्रदान किया गया। गौरतलब है कि इंडियन बैंक को यह पुरस्कार ‘राजभाषा कार्यान्वयन के क्षेत्र में श्रेष्ठ प्रदर्शन’ के लिए लगातार दूसरे वर्ष प्राप्त हुआ है, जो बैंक की हिंदी भाषा के प्रति प्रतिबद्धता और सतत प्रयासों को दर्शाता है।
कार्यक्रम का भव्य आयोजन :
हिंदी दिवस समारोह का आयोजन गांधीनगर के महात्मा मंदिर कन्वेंशन एवं एग्जिबिशन सेंटर में किया गया, जहां देशभर से विभिन्न मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों तथा वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। समारोह के प्रथम दिन ही राजभाषा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले संस्थानों को सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर केंद्रीय संसदीय कार्य एवं संस्कृति राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा ने इंडियन बैंक को यह पुरस्कार प्रदान किया। बैंक की ओर से कॉर्पोरेट कार्यालय, चेन्नई स्थित राजभाषा विभाग के महाप्रबंधक श्री मनोज कुमार दास ने यह पुरस्कार ग्रहण किया।
हिंदी के प्रचार-प्रसार में सतत योगदान :
इंडियन बैंक देशभर में विस्तृत शाखा नेटवर्क और डिजिटल सेवाओं के माध्यम से लाखों ग्राहकों तक पहुंच रखता है। राजभाषा कार्यान्वयन के क्षेत्र में बैंक ने विभिन्न स्तरों पर योजनाबद्ध प्रयास किए हैं। इनमें कर्मचारियों को हिंदी में काम करने के लिए प्रोत्साहित करना, राजभाषा प्रशिक्षण का आयोजन, ग्राहक सेवा में हिंदी के उपयोग का विस्तार और तकनीकी प्लेटफ़ॉर्म पर हिंदी के प्रभावी प्रयोग को बढ़ावा देना शामिल है।
बैंक ने आंतरिक संचार, परिपत्र, पत्राचार और रिपोर्ट तैयार करने में भी हिंदी को प्राथमिकता दी है। इसके अलावा, ग्राहकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बैंक की वेबसाइट, मोबाइल एप्लिकेशन और अन्य डिजिटल माध्यमों में हिंदी सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
सम्मेलन में हुई चर्चाएँ :
पंचम अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का उद्देश्य हिंदी को सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों के कार्यों में अधिकाधिक अपनाना और इसे प्रशासन की भाषा के रूप में मजबूत बनाना है। सम्मेलन के दौरान विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिंदी भाषा के तकनीकी, प्रशासनिक और व्यवहारिक प्रयोग पर विचार साझा किए।
विशेष रूप से, ‘डिजिटल युग में राजभाषा का भविष्य’ और ‘वित्तीय संस्थानों में हिंदी की भूमिका’ जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। इन सत्रों में यह रेखांकित किया गया कि तकनीकी विकास के साथ हिंदी का दायरा तेजी से बढ़ रहा है और वित्तीय जगत में भी इसकी भूमिका निर्णायक होती जा रही है।
पुरस्कार का महत्व :
‘राजभाषा कीर्ति पुरस्कार’ केंद्र सरकार द्वारा दिया जाने वाला उच्चतम सम्मान है, जो सरकारी कार्यालयों, मंत्रालयों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार और कार्यान्वयन में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रदान किया जाता है। लगातार दूसरे वर्ष यह पुरस्कार प्राप्त करना इंडियन बैंक के लिए विशेष उपलब्धि है। इससे बैंक की उस नीति और दृष्टिकोण की पुष्टि होती है जिसके अंतर्गत राजभाषा हिंदी को संगठनात्मक संस्कृति का अभिन्न अंग बनाया गया है।
बैंक की भविष्य की योजनाएँ :
पुरस्कार प्राप्ति के अवसर पर इंडियन बैंक के प्रतिनिधियों ने यह आश्वासन दिया कि संस्था भविष्य में भी हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए नवाचारों को अपनाती रहेगी। बैंक का लक्ष्य है कि सभी स्तरों पर ग्राहक सेवाओं में हिंदी को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। साथ ही, तकनीकी माध्यमों से हिंदी के प्रयोग को सरल और व्यापक बनाकर देशभर के ग्राहकों को सुलभ सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएँ।
गांधीनगर में आयोजित इस समारोह ने न केवल हिंदी दिवस के महत्व को रेखांकित किया, बल्कि यह भी दर्शाया कि सार्वजनिक उपक्रम किस प्रकार भाषा के माध्यम से जनसंपर्क और जनसेवा को और मजबूत बना सकते हैं। इंडियन बैंक को लगातार दूसरी बार ‘राजभाषा कीर्ति पुरस्कार’ मिलना इस बात का प्रमाण है कि संस्था ने हिंदी को केवल एक राजभाषा के रूप में नहीं, बल्कि ग्राहक सेवा और संगठनात्मक संस्कृति के महत्वपूर्ण आधार के रूप में अपनाया है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
