उत्तराखंड के सुखीढांग के पास एक सड़क दुर्घटना के बाद भारतीय सेना की उत्तर भारत फॉर्मेशन के जवानों ने साहस और मानवता का परिचय देते हुए 35 वर्षीय लक्ष्मण सिंह की जान बचाई। खटीमा, उधम सिंह नगर निवासी लक्ष्मण सिंह बनबसा और पिथौरागढ़ के बीच स्थित इस पहाड़ी इलाके में एक दुर्भाग्यपूर्ण सड़क हादसे का शिकार हो गए थे। चुनौतीपूर्ण पहाड़ी रास्तों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण ऐसी घटनाओं में त्वरित मदद मिलना अक्सर मुश्किल होता है, लेकिन सेना के जवानों के मौके पर मौजूद होने और तत्परता दिखाने से यह आपात स्थिति एक जीवन रक्षा की घटना में बदल गई।

हादसे की जानकारी मिलते ही उत्तर भारत फॉर्मेशन के जवानों ने बिना समय गंवाए स्थिति का आकलन किया और तुरंत चिकित्सा सहायता शुरू की। मेडिकल ऑफिसर मेजर जनरल वी.के. पात्रा और मेजर चित्रांगदा के कुशल मार्गदर्शन और प्रयासों से लक्ष्मण सिंह को 'गोल्डन आवर' के दौरान आवश्यक उपचार और त्वरित रेस्क्यू सुविधा मुहैया कराई गई। सेना के इस समयबद्ध हस्तक्षेप ने लक्ष्मण सिंह के लिए जीवन और मृत्यु के बीच के अंतर को पाट दिया। यह घटना न केवल भारतीय सेना की सीमाओं की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है, बल्कि संकट के समय नागरिकों के साथ खड़े होने के उनके जज्बे को भी उजागर करती है। मेजर जनरल वी.के. पात्रा, मेजर चित्रांगदा और उत्तर भारत फॉर्मेशन के जवानों के इस कार्य की व्यापक सराहना की जा रही है, जो कठिन परिस्थितियों में सेना की त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और चिकित्सा व्यावसायिकता का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह बचाव कार्य एक बार फिर भारतीय सेना के 'सर्विस बिफोर सेल्फ' यानी 'सेवा परमो धर्म' के मूल सिद्धांत को सिद्ध करता है।

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