400 करोड़ की लागत, 900 किलो सोना… आंध्र में खुली भारत की पहली निजी स्वर्ण खदान
भारत की पहली निजी स्वर्ण खदान ने आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले के स्वर्णगिरि (पूर्व जोन्नागिरि) में उत्पादन शुरू कर दिया है। लगभग 400–405 करोड़ रुपये के निवेश से विकसित यह परियोजना 700 प्रत्यक्ष रोजगार और 900 किलोग्राम वार्षिक उत्पादन क्षमता के साथ देश के खनन क्षेत्र में निजी निवेश स्थापित करती है।

भारत की पहली निजी स्वर्ण खदान में वाणिज्यिक उत्पादन शुरू हुआ
भारत के खनन क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव दर्ज करते हुए देश की पहली निजी स्वर्ण खदान ने आधिकारिक रूप से उत्पादन शुरू कर दिया है। यह परियोजना न केवल भारत में निजी खनन उद्योग के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, बल्कि इसे स्वतंत्र भारत के बाद पहली बड़े पैमाने की निजी स्वर्ण खनन पहल के रूप में भी देखा जा रहा है। आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में स्थित स्वर्णगिरि (पूर्व में जोन्नागिरि) क्षेत्र इस ऐतिहासिक परियोजना का केंद्र बना है, जिसने देश की खनन नीति और निवेश परिदृश्य में नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं।
यह परियोजना स्वर्णगिरि गोल्ड प्रोजेक्ट के नाम से विकसित की गई है, जिसे राज्य सरकार द्वारा नाम परिवर्तन के बाद नया स्वरूप दिया गया। लगभग 598 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली यह खदान जोन्नागिरि, एर्रागुडी और पगिदिरायि जैसे गांवों में विस्तृत है, जहां अब आधुनिक तकनीक आधारित स्वर्ण खनन गतिविधियाँ शुरू हो चुकी हैं।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का संचालन जियोमैसोर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है, जो एक निजी खनिज अन्वेषण कंपनी है और वर्ष 1994 से इस क्षेत्र में सक्रिय है। इस परियोजना में थ्रिवेनी अर्थमूवर्स एंड इंफ्रा तथा डेक्कन गोल्ड माइन लिमिटेड जैसी प्रमुख संस्थाओं की भी साझेदारी शामिल है। लगभग 400 से 405 करोड़ रुपये के निवेश से विकसित यह परियोजना भारत में निजी क्षेत्र द्वारा किए गए सबसे बड़े खनन निवेशों में से एक मानी जा रही है।
खनन तकनीक की दृष्टि से यह परियोजना ओपन-पिट माइनिंग प्रणाली पर आधारित है, जिसमें क्रशिंग, ग्राइंडिंग, कार्बन-इन-लीच (CIL) प्रोसेसिंग और स्मेल्टिंग जैसी उन्नत प्रक्रियाएं शामिल हैं। यह एक पूर्ण एकीकृत खनन एवं प्रसंस्करण इकाई है, जो भारत में स्वर्ण खनन के क्षेत्र में एक अपेक्षाकृत दुर्लभ मॉडल प्रस्तुत करती है।
उत्पादन क्षमता की बात करें तो प्रारंभिक चरण में इस खदान से लगभग 400 किलोग्राम स्वर्ण प्रतिवर्ष उत्पादन की योजना है, जिसे स्थिर संचालन के दौरान 750 से 900 किलोग्राम तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। दीर्घकालिक रूप से इसकी अधिकतम क्षमता लगभग एक टन प्रतिवर्ष तक पहुंच सकती है, जबकि अन्वेषण के आधार पर भविष्य में इसमें और वृद्धि की संभावना भी व्यक्त की गई है। भूगर्भीय आकलन के अनुसार इस क्षेत्र में लगभग 13.1 टन स्वर्ण के प्रमाणित संसाधन उपलब्ध हैं, जबकि अन्वेषण के आधार पर संभावित भंडार लगभग 42 टन तक अनुमानित किए गए हैं। यह आंकड़े भारत के खनन संसाधन मानचित्र में इस परियोजना को एक महत्वपूर्ण स्थान प्रदान करते हैं।
इस परियोजना से रोजगार के व्यापक अवसर भी सृजित होने की उम्मीद है। लगभग 700 प्रत्यक्ष रोजगार के साथ-साथ स्थानीय समुदायों को प्राथमिकता दी जा रही है, विशेषकर रायलसीमा क्षेत्र के निवासियों को। इसके अतिरिक्त परिवहन, सेवा और सहायक उद्योगों में भी अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है। राजस्व के संदर्भ में आंध्र प्रदेश सरकार को इस परियोजना से लगभग 4 प्रतिशत रॉयल्टी प्राप्त होने का अनुमान है, जिससे वार्षिक तौर पर लगभग 57 करोड़ से 144 करोड़ रुपये तक का राजस्व प्राप्त हो सकता है, जो उत्पादन स्तर पर निर्भर करेगा।
इस परियोजना का महत्व केवल आर्थिक या औद्योगिक नहीं है, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत प्रतिवर्ष लगभग 700 से 800 टन सोने का आयात करता है, जबकि घरेलू उत्पादन मात्र लगभग 1.5 टन के आसपास है। ऐसे में यह खदान भले ही कुल आयात के अनुपात में सीमित योगदान दे, लेकिन यह देश में घरेलू स्वर्ण उत्पादन को बढ़ावा देने और निजी खनन क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में एक निर्णायक शुरुआत के रूप में देखी जा रही है। परियोजना की समयरेखा के अनुसार इसके लिए कई वर्षों तक अन्वेषण और अनुमोदन प्रक्रियाएं चलीं, जिसके बाद वर्ष 2026 की शुरुआत में ट्रायल उत्पादन किया गया और 24 जून 2026 को इसका वाणिज्यिक शुभारंभ किया गया। अगले एक से दो वर्षों में इसके पूर्ण क्षमता तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि उत्पादन क्षमता और संसाधनों के बावजूद यह भी स्पष्ट है कि पूर्ण क्षमता पर भी यह खदान भारत के स्वर्ण आयात का 0.2 प्रतिशत से भी कम योगदान देगी, जिससे इसका प्रभाव अधिकतर प्रतीकात्मक और रणनीतिक माना जा रहा है। इस प्रकार स्वर्णगिरि स्वर्ण खदान भारत के खनन इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत करती है, जो निजी निवेश, तकनीकी विकास और संसाधन उपयोग की दिशा में देश को एक नए औद्योगिक युग की ओर अग्रसर करती प्रतीत होती है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
