भारत को वैश्विक डिजिटल महाशक्ति बनाने की दिशा में एक युगांतरकारी कदम उठाते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने 'बियॉन्ड इंफ्रास्ट्रक्चर: इंडियाज़ डेटा सेंटर पाथवे टू डिजिटल सॉवरिन्टी' नामक रणनीतिक रिपोर्ट जारी की। इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में नेशन फर्स्ट पॉलिसी रिसर्च एंड चेंज फाउंडेशन (एनएफपीआरसी) के अंतर्गत सेंटर फॉर एक्सेलरेटिंग इंडियाज़ ग्रोथ (सीएआईजी) द्वारा तैयार इस विस्तृत रिपोर्ट को सार्वजनिक किया गया। इस अवसर पर नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के दिग्गजों, तकनीकी विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिन्होंने भारत के उभरते डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम पर गहन मंथन किया।

रिपोर्ट के चौंकाने वाले और उत्साहजनक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2030 तक भारत की डेटा सेंटर क्षमता छलांग लगाकर 4 से 8 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। भविष्य की रणनीतिक योजना को रेखांकित करते हुए इस रिपोर्ट ने डेटा सेंटर निर्माण के लिए देश भर में 90 से अधिक उपयुक्त शहरों की पहचान की है। यह दस्तावेज स्पष्ट करता है कि भारत की तीव्र गति से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था को संबल प्रदान करने के लिए न केवल विस्तार, बल्कि एक टिकाऊ, मजबूत और सुनियोजित इंफ्रास्ट्रक्चर ढांचे की नितांत आवश्यकता है।

इवेंट को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने जोर देकर कहा कि भारत के डेटा सेंटर अब केवल तकनीकी ढांचे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे देश की तकनीकी और आर्थिक महत्वाकांक्षाओं के लिए अनिवार्य 'रणनीतिक राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर' के रूप में विकसित हो रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और 6जी जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के दौर में यह डेटा सेंटर्स ही तय करेंगे कि भविष्य की डिजिटल वैल्यू कहां निर्मित और प्रोसेस की जाएगी।

एनएफपीआरसी फाउंडेशन के चेयरपर्सन श्री तरंग चुघ ने चर्चा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि डेटा सेंटर राष्ट्रीय संप्रभुता और रणनीतिक स्वायत्तता के आधुनिक साधन बन चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि डिजिलॉकर और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी दूरदर्शी पहलों ने देश में डिजिटल सेवाओं की मांग को अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचा दिया है, जिसकी आपूर्ति के लिए एक सशक्त बैकएंड इंफ्रास्ट्रक्चर अनिवार्य है। श्री चुघ ने निवेश को गति देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सूक्ष्म तालमेल की वकालत भी की। इसी क्रम में राज्यसभा सांसद और आईटी संबंधी संसदीय समिति के सदस्य श्री सुजीत कुमार ने कहा कि एआई वर्कलोड, क्लाउड व फाइनेंशियल सर्विसेज और करोड़ों की संख्या में होने वाले दैनिक यूपीआई लेनदेन ने भारत को 'मल्टी गीगावॉट डेटा सेंटर इकोनॉमी' की कतार में खड़ा कर दिया है।

यह रिपोर्ट केवल विस्तार की बात नहीं करती, बल्कि 'ग्रिड-इंटीग्रेटेड' बिजली आपूर्ति, जल-बचत आधारित कूलिंग सिस्टम और समन्वित नीतियों के माध्यम से एक पर्यावरण-अनुकूल रोडमैप भी प्रस्तुत करती है। कार्यक्रम के दौरान 'पॉवर, पॉलिसी एंड प्लेटफॉर्म्स: बिल्डिंग इंडियाज़ डिजिटल बैकबोन' विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने ऊर्जा सस्टेनेबिलिटी और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क जैसी चुनौतियों का समाधान खोजा। अंततः, यह आयोजन भारत की तकनीकी आकांक्षाओं, नीतिगत सामंजस्य और दीर्घकालिक टिकाऊ विकास के बीच एक सेतु स्थापित करने में सफल रहा, जो भविष्य के डिजिटल भारत की रीढ़ बनेगा।

Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story