Northeast India heavy rainfall alert 2026 : प्रकृति के रौद्र रूप ने एक बार फिर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में भारी उथल-पुथल मचा दी है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने पूर्वोत्तर भारत के एक बड़े हिस्से, विशेषकर असम और मेघालय में अत्यंत भारी से बहुत भारी बारिश की गंभीर चेतावनी जारी की है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आगामी अट्ठाईस जून तक अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के सुदूर इलाकों में व्यापक स्तर पर मूसलाधार बारिश का दौर जारी रहने की प्रबल आशंका है। इस आसमानी आफत की शुरुआत हो चुकी है, जिसके तहत बाईस जून से छब्बीस जून के बीच इन सभी राज्यों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने का अलर्ट भी जारी किया गया है। मौसम विभाग की इस संवेदनशील चेतावनी ने स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों को हाई-अलर्ट पर रख दिया है, क्योंकि बादलों की इस भीषण गर्जना के बीच पूर्वोत्तर के पहाड़ी इलाकों पर जलप्रलय का खतरा मंडराने लगा है।

इस मौसमी संकट का सबसे सनसनीखेज और हैरान कर देने वाला रूप मेघालय और त्रिपुरा में देखने को मिला है, जहां पिछले चौबीस घंटों से हो रही लगातार बारिश ने तबाही के नए रिकॉर्ड स्थापित कर दिए हैं। मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स जिले में स्थित दुनिया के सबसे नम स्थानों में से एक, मावसिनराम में मात्र चौबीस घंटे के भीतर रिकॉर्ड 530 मिमी बारिश दर्ज की गई है। आईएमडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस आंकड़े की भयावहता को स्पष्ट करते हुए बताया कि मावसिनराम में महज एक रात के भीतर हुई यह मूसलाधार बारिश राजस्थान के जोधपुर या बीकानेर जैसे मरुस्थलीय शहरों में छह महीने से अधिक समय में होने वाली कुल संचयी बारिश के बराबर है। इसी अवधि के दौरान आरकेएम सोहरा में 470 मिमी और मावकिरवाट में 390 मिमी की विनाशकारी बारिश दर्ज की गई। इस प्रलयंकारी वर्षा का सीधा असर यातायात और बुनियादी ढांचे पर पड़ा है, जहां लगातार पानी बरसने के कारण राजधानी शिलांग को भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित डावकी शहर से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग का एक बड़ा हिस्सा टूटकर ढह गया है, जिससे इस अंतरराष्ट्रीय मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है।

क्षेत्र के अन्य राज्यों में भी बारिश की रफ्तार डराने वाली है, जहां त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में चौबीस घंटे के दौरान 102.5 मिमी बारिश होने से पूरे शहर और आसपास के रिहायशी इलाकों में भारी जलभराव हो गया है, जिससे शहरी यातायात पूरी तरह ठप पड़ गया है। मौसम विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, शेला में 100 मिमी, विलियमनगर में 90 मिमी, मावरिंगक्नेंग में 90 मिमी, जोवाई में 80 मिमी, बारापानी में 70 मिमी और रताछेरा में 70 मिमी की भारी बारिश रिकॉर्ड की जा चुकी है। इसके अलावा, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी लगातार हो रही बारिश के कारण भूस्खलन का खतरा अत्यधिक बढ़ गया है। आईएमडी ने अलग से अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में आने वाले दिनों में बारिश की यह तीव्रता और अधिक उग्र हो सकती है, जबकि उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में भी तेज हवाओं के साथ बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है।

मौसम के इस मिजाज और मानसून की चाल को लेकर मौसम विभाग के अधिकारियों ने विस्तृत तकनीकी और ऐतिहासिक ब्योरा प्रस्तुत किया है। आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून सात जून को पूर्वोत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में दाखिल हुआ, जो अपनी तय सामान्य तिथि से दो दिन की देरी से था। हालांकि, देर से आने के बावजूद मानसून की गति अत्यंत तीव्र रही और इसने बहुत कम समय में सिक्किम सहित पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों को पूरी तरह से अपनी कस्टडी में ले लिया। आईएमडी अधिकारी ने ऐतिहासिक तुलना करते हुए बताया कि पिछले वर्ष 2025 में मानसून काफी पहले यानी 26 मई को ही पूर्वोत्तर में पहुंच गया था, जिसकी तुलना में इस साल इसका आगमन अपेक्षाकृत विलंबित रहा है। वर्तमान में समूचे क्षेत्र में वायुमंडलीय और मौसमी परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल बनी हुई हैं, जिससे अगले कुछ दिनों में मानसूनी हवाओं के और अधिक मजबूत होने तथा आगे बढ़ने की पूरी संभावना बनी हुई है, जिससे सामान्य या सामान्य से बेहतर मानसून की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं।

वैश्विक स्तर पर मौसम को प्रभावित करने वाले कारकों का विश्लेषण करते हुए मौसम विभाग ने एक बेहद राहत भरी आधिकारिक जानकारी भी साझा की है। आईएमडी अधिकारियों के मुताबिक, हालांकि इस वर्ष भारत के कई मैदानी और मध्यवर्ती हिस्सों में 'अलनीनो' के प्रतिकूल प्रभाव की आशंका जताई जा रही है, लेकिन पूर्वोत्तर के इन पहाड़ी और सुदूर इलाकों पर इसका कोई बड़ा नकारात्मक असर पड़ने की संभावना नहीं है। वैज्ञानिकों ने इसके पीछे इस क्षेत्र के घने वन क्षेत्र, विविध भू-आकृति और विशिष्ट स्थानीय अनुकूल जलवायु को मुख्य कारण बताया है। पूर्वोत्तर भारत की यह विशेष भौगोलिक और जलवायुगत परिस्थितियां अक्सर बड़े वैश्विक मौसमीय बदलावों के असर को पूरी तरह सोख लेती हैं, जिससे देश के अन्य हिस्सों में सूखे या असंतुलन की स्थिति होने के बावजूद यहां मानसून का ढांचा अपेक्षाकृत स्थिर और मजबूत बना रहता है, जो इस पर्यावरण तंत्र की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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