नई दिल्ली। देश में कर व्यवस्था को पारदर्शी और मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार की सख्ती अब आम करदाताओं की रोजमर्रा की वित्तीय गतिविधियों पर सीधा असर डाल रही है। आयकर अधिनियम की धारा 139AA के तहत पैन कार्ड को आधार से लिंक करना अनिवार्य कर दिया गया है। तय समयसीमा में यह प्रक्रिया पूरी न करने वालों का पैन “इनऑपरेटिव” घोषित किया जा रहा है, जिसका अर्थ है कि वह कानूनी और वित्तीय रूप से लगभग निष्क्रिय हो जाता है।

आधार से लिंक न होने की स्थिति में पैन कार्ड केवल एक पहचान पत्र भर रह जाता है। ऐसे पैन का उपयोग आयकर रिटर्न दाखिल करने, बैंकिंग लेनदेन, निवेश या किसी भी वैधानिक वित्तीय प्रक्रिया में नहीं किया जा सकता। आयकर विभाग के अनुसार, इनऑपरेटिव पैन के कारण न सिर्फ आयकर रिटर्न फाइल करना असंभव हो जाता है, बल्कि पहले से लंबित रिफंड भी रोक दिए जाते हैं और देरी की अवधि पर मिलने वाला ब्याज भी नहीं दिया जाता।

इसका असर यहीं तक सीमित नहीं है। जिन करदाताओं का पैन निष्क्रिय हो जाता है, उनके लिए टीडीएस और टीसीएस की दरें सामान्य से कहीं अधिक हो जाती हैं। कई मामलों में यह कटौती 20 प्रतिशत तक पहुंच जाती है, जिससे वेतनभोगी कर्मचारियों और कारोबारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता है। बैंकिंग और निवेश सेवाएं भी गंभीर रूप से प्रभावित होती हैं। नए बैंक खाते खोलना, क्रेडिट कार्ड या होम लोन लेना, म्यूचुअल फंड की एसआईपी जारी रखना या डीमैट खाते के जरिए शेयर ट्रेडिंग करना लगभग असंभव हो जाता है। ₹50,000 से अधिक के नकद लेनदेन पर भी रोक लग जाती है, जिससे दैनिक जरूरतों और व्यावसायिक गतिविधियों में बाधा आती है।

सरकार का तर्क है कि आधार-पैन लिंकिंग से फर्जी और डुप्लीकेट पैन कार्ड की पहचान संभव होती है, जिससे कर चोरी और वित्तीय धोखाधड़ी पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकता है। इसी उद्देश्य से समयसीमा को लेकर सख्त रुख अपनाया गया है। सामान्य करदाताओं के लिए पैन-आधार लिंकिंग की अंतिम तिथि 30 जून 2023 थी। हालांकि, जिन लोगों ने 1 अक्टूबर 2024 से पहले आधार एनरोलमेंट आईडी के आधार पर पैन बनवाया था, उन्हें विशेष राहत देते हुए 31 दिसंबर 2025 तक का समय दिया गया है। यदि इस अवधि में लिंकिंग नहीं की गई, तो 1 जनवरी 2026 से उनका पैन स्वतः इनऑपरेटिव हो जाएगा।

जो करदाता तय समयसीमा चूक चुके हैं, उनके लिए पैन को दोबारा सक्रिय कराने का एकमात्र रास्ता आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर ₹1,000 का जुर्माना भरकर आधार से लिंकिंग पूरी करना है। हालांकि, कानून में कुछ श्रेणियों को इस अनिवार्यता से छूट भी दी गई है। असम, मेघालय और जम्मू-कश्मीर के निवासी, अनिवासी भारतीय, 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक और भारत के नागरिक न होने वाले व्यक्ति इस नियम के दायरे में नहीं आते।

आयकर विशेषज्ञों का मानना है कि आधार-पैन लिंकिंग अब केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि वित्तीय पहचान को जीवित रखने की शर्त बन चुकी है। समय रहते यह प्रक्रिया पूरी न करने पर व्यक्ति की पूरी आर्थिक गतिविधि ठप पड़ सकती है। ऐसे में करदाताओं के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे कानूनी प्रावधानों को गंभीरता से लें और अपनी वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करें।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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