भारत की समुद्री सुरक्षा और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमताओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारतीय तटरक्षक बल के नवीनतम पोत आईसीजीएस समुद्र प्रताप को औपचारिक रूप से राष्ट्र को समर्पित किया गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत की समुद्री यात्रा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि करार दिया और कहा कि यह पोत न केवल सुरक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ करेगा, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी नई मजबूती देगा।

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आईसीजीएस समुद्र प्रताप का कमीशनिंग भारत की रक्षा और समुद्री संरचना में गुणात्मक बदलाव का संकेत है। यह पोत देश की लंबी समुद्री सीमाओं की निगरानी, तटीय सुरक्षा और रणनीतिक समुद्री हितों की रक्षा में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यह जहाज आधुनिक तकनीकों से लैस है, जिससे भारतीय तटरक्षक बल की परिचालन क्षमता कई गुना बढ़ेगी।

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह द्वारा सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा की गई जानकारी पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि समुद्र प्रताप का कमीशनिंग कई दृष्टियों से उल्लेखनीय है। यह स्वदेशी रक्षा निर्माण को प्रोत्साहन देता है, सुरक्षा तंत्र को और मजबूत बनाता है तथा पर्यावरण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस पोत में ऐसी तकनीकें समाहित हैं जो पर्यावरण अनुकूल संचालन सुनिश्चित करती हैं।

आईसीजीएस समुद्र प्रताप को विशेष रूप से बहुआयामी समुद्री अभियानों के लिए डिजाइन किया गया है। यह पोत खोज और बचाव अभियान, समुद्री कानून प्रवर्तन, तस्करी विरोधी कार्रवाई और आपदा राहत जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में सक्षम है। इसके आधुनिक सेंसर, उन्नत नेविगेशन सिस्टम और बेहतर समुद्री सहनशीलता इसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी प्रभावी बनाते हैं।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह पोत भारत के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियानों का सशक्त उदाहरण है। स्वदेशी तकनीक और संसाधनों से निर्मित समुद्र प्रताप भारतीय शिपबिल्डिंग उद्योग की बढ़ती क्षमता और आत्मविश्वास को भी दर्शाता है। इससे न केवल विदेशी निर्भरता में कमी आएगी, बल्कि देश के भीतर रोजगार और तकनीकी विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक गतिविधियों के बीच भारत के लिए समुद्री सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में समुद्र प्रताप जैसे आधुनिक पोत भारत की रणनीतिक उपस्थिति को और मजबूत करेंगे। यह पोत तटीय समुदायों की सुरक्षा और समुद्री व्यापार मार्गों की रक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

अपने संदेश के अंत में प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि आईसीजीएस समुद्र प्रताप भारतीय तटरक्षक बल की शक्ति, दक्षता और विश्वसनीयता को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। यह न केवल आज की सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करेगा, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए भी भारत को तैयार करेगा। समुद्र प्रताप का कमीशनिंग भारत की समुद्री सुरक्षा नीति में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जो राष्ट्र की संप्रभुता और समुद्री हितों की रक्षा के संकल्प को और मजबूत करता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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