देश की सर्वोच्च संवैधानिक पदस्थापना, भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू, ने आज राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) द्वारा आयोजित मानवाधिकार दिवस समारोह में शिरकत की और संबोधन दिया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने मानवाधिकारों के सार्वभौमिक महत्व और उनके समाज में न्याय, समानता और करुणा की नींव के रूप में योगदान पर प्रकाश डाला।

राष्ट्रपति ने कहा कि मानवाधिकार दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि सभी मानवाधिकार अविभाज्य हैं और हर व्यक्ति को गरिमा और अधिकारों के साथ जन्मजात स्वतंत्रता प्राप्त है। उन्होंने बताया कि 77 वर्ष पूर्व, विश्व समुदाय ने यह सरल लेकिन क्रांतिकारी सत्य स्थापित किया था कि प्रत्येक मानव समान अधिकारों और गरिमा के साथ जन्मा है।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने भारत के योगदान पर भी प्रकाश डाला, जिसमें स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा मानव गरिमा, समानता और न्याय की अवधारणाओं पर आधारित एक वैश्विक मानवाधिकार ढांचे के निर्माण में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका शामिल है। उन्होंने कहा कि भारत की ऐतिहासिक भूमिका और संविधान में निहित मौलिक अधिकार यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक नागरिक को न्यायसंगत और समान अवसर मिलें।

समारोह में उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों और आयोग के सदस्यों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आज के वैश्विक संदर्भ में मानवाधिकारों का संरक्षण और संवर्द्धन न केवल कानूनी जिम्मेदारी है, बल्कि यह नैतिक और सामाजिक कर्तव्य भी है। उन्होंने मानवाधिकारों की सुरक्षा और संवर्धन के लिए नागरिक समाज, न्यायपालिका और प्रशासनिक संस्थाओं की संयुक्त भूमिका पर बल दिया।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष ने भी अपने स्वागत भाषण में आयोग की विभिन्न पहलों और मानवाधिकार संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आयोग हर नागरिक की आवाज़ को कानूनी सहायता और सामाजिक समर्थन के माध्यम से सशक्त बनाने में समर्पित है।

राष्ट्रपति का यह संबोधन इस संदेश को मजबूत करता है कि मानवाधिकार केवल अंतरराष्ट्रीय घोषणाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह प्रत्येक व्यक्ति के रोजमर्रा के जीवन और समाज के न्यायपूर्ण ढांचे का अभिन्न हिस्सा हैं। इस आयोजन ने नागरिकों, सरकारी अधिकारियों और मानवाधिकार संगठनों को मानव अधिकारों के महत्व को समझने और उन्हें व्यवहार में लाने के लिए प्रेरित किया।

राष्ट्रपति ने कहा: “मानव अधिकारों की सुरक्षा केवल एक कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि यह हमारी सामाजिक जिम्मेदारी है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक नागरिक की गरिमा, स्वतंत्रता और समानता का सम्मान किया जाए।” इस प्रकार, मानवाधिकार दिवस का यह आयोजन न केवल स्मरणीय रहा बल्कि भविष्य में मानवाधिकार संवर्द्धन की दिशा में प्रेरक संदेश भी प्रदान करता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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