हावड़ा के टिकीआपाड़ा रेलवे ट्रैक क्षेत्र में मंगलवार को उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया जब भारतीय रेल, स्थानीय नगर निकाय और पुलिस की संयुक्त टीम ने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। वर्षों से रेलवे भूमि पर बनी अवैध झुग्गियों और दुकानों को हटाने के लिए चलाए गए इस अभियान ने एक ओर जहां प्रशासनिक सख्ती और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के दावों को सामने रखा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय निवासियों के विरोध और संघर्ष ने स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया।

जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई भारतीय रेल द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन भूमिरक्षा (Operation BhoomiRPF)” के तहत की गई, जिसमें टिकीआपाड़ा क्षेत्र में लगभग 3,600 वर्ग मीटर रेलवे भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। इस अभियान के दौरान करीब 110 अवैध दुकानें और आवासीय ढांचे हटाए गए, जबकि स्थानीय स्तर पर प्रभावित परिवारों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। रेलवे के अनुसार यह संख्या लगभग 100 थी, जबकि स्थानीय रिपोर्टों में इसे 200 से 250 तक बताया गया है।

रेलवे और प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि यह पूरा इलाका लंबे समय से अतिक्रमण की चपेट में था, जिससे हावड़ा मैदान और डासनगर जैसे क्षेत्रों में मानसून के दौरान गंभीर जलभराव की समस्या उत्पन्न हो रही थी। साथ ही, रेलवे ट्रैक के बेहद नजदीक अवैध निर्माण होने के कारण सुरक्षा जोखिम भी लगातार बढ़ रहा था। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई रेल सुरक्षा, दुर्घटना रोकथाम और जल निकासी व्यवस्था को सुधारने के उद्देश्य से की गई।



कार्रवाई के दौरान स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई जब कुछ स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए पथराव शुरू कर दिया। इस घटना में पुलिस और नागरिक प्रशासन के लगभग नौ कर्मियों के घायल होने की सूचना है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल की तैनाती की गई और लाठीचार्ज के जरिए भीड़ को तितर-बितर किया गया। कुछ घंटों तक क्षेत्र में तनाव और अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे कई वर्षों, यहां तक कि दशकों से इस क्षेत्र में रह रहे थे और छोटे व्यवसाय चलाकर अपनी आजीविका कमा रहे थे। उनका आरोप है कि पुनर्वास की उचित व्यवस्था के बिना अचानक की गई यह कार्रवाई उनके लिए गंभीर संकट लेकर आई है। प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग भी उठाई।

वहीं प्रशासन का पक्ष है कि यह भूमि पूरी तरह से रेलवे की संपत्ति है और यहां लंबे समय से अवैध कब्जा किया गया था। अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि कई चरणों में पूर्व सूचना जारी की गई थी, जिसके बाद यह कार्रवाई आवश्यक हो गई। प्रशासन के अनुसार रेलवे भूमि पर अतिक्रमण न केवल सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि यह क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे और जल निकासी व्यवस्था को भी प्रभावित कर रहा था।

यह कार्रवाई केवल एक स्थानीय अभियान नहीं बल्कि हावड़ा और आसपास के क्षेत्रों में चल रही व्यापक अतिक्रमण हटाओ मुहिम का हिस्सा मानी जा रही है। घनी आबादी और अनियोजित शहरी विस्तार के कारण रेलवे कॉरिडोर लंबे समय से अतिक्रमण की समस्या से जूझ रहे हैं, जिसका प्रभाव विशेषकर मानसून के दौरान होने वाली बाढ़ और जलभराव के रूप में सामने आता रहा है।

टिकीआपाड़ा में हुई यह कार्रवाई एक बार फिर शहरी विकास, रेलवे सुरक्षा और मानवीय पुनर्वास के बीच संतुलन की चुनौती को उजागर करती है, जहां एक ओर बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सर्वोपरि है, वहीं दूसरी ओर वर्षों से बसे परिवारों का विस्थापन एक गंभीर सामाजिक प्रश्न बनकर उभरता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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