कैसे 'राष्ट्रीय प्याज बोर्ड' बदलेगा भारतीय कृषि और किसानों की तकदीर?
क्या 'राष्ट्रीय प्याज बोर्ड' का गठन भारतीय कृषि व्यवस्था में एक नया इतिहास रचेगा? जानिए कैसे WOFAI की संस्थापक के एक बड़े खुलासे ने देश के करोड़ों किसानों और महिला सशक्तिकरण की इस सबसे बड़ी मुहिम में अचानक हलचल तेज कर दी है।

नई दिल्ली: भारत सदियों से एक कृषि प्रधान देश रहा है, जहाँ की सभ्यता, संस्कृति और अर्थव्यवस्था की बुनियाद खेती पर ही टिकी है। आज भी देश की एक बड़ी आबादी अप्रत्यक्ष रूप से कृषि और इससे जुड़े व्यवसायों पर निर्भर है। बढ़ते शहरीकरण, औद्योगिकीकरण और तकनीकी विकास के दौर में भी कृषि को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। ऐसे समय में, जब देश वर्ष 2032 तक एक अधिक आत्मनिर्भर, समृद्ध और सतत विकास आधारित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर है, तब कृषि क्षेत्र में नई सोच और नीतिगत सुधारों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। इसी रणनीतिक मोड़ पर, देश में एक "राष्ट्रीय प्याज बोर्ड" (National Onion Board) की स्थापना का विचार अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम के रूप में उभर कर सामने आया है।
साक्षात्कार में उठी समर्पित बोर्ड की मांग
महिला ऑर्गेनिक फार्मिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (WOFAI) की संस्थापक ने हाल ही में 'प्रभु राष्ट्र इंडिया' को दिए एक विशेष साक्षात्कार में इस विषय पर विस्तार से अपने विचार साझा किए। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यदि भारत को घरेलू और वैश्विक स्तर पर एक कृषि महाशक्ति के रूप में अपनी स्थिति को और अधिक मजबूत करना है, तो प्याज जैसी महत्वपूर्ण फसल के लिए एक समर्पित 'राष्ट्रीय प्याज बोर्ड' का गठन करना समय की मांग है।
भोजन से लेकर आयुर्वेद तक प्याज का दबदबा
प्याज केवल एक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि भारतीय भोजन संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा है, जिसका उपयोग देश के लगभग हर घर में प्रतिदिन सब्जी, सलाद, मसालेदार व्यंजन या विभिन्न खाद्य उत्पादों के रूप में किया जाता है। स्वाद, गुणवत्ता और लंबे समय तक सुरक्षित रहने की अनूठी क्षमता के कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी भारतीय प्याज की मांग लगातार बढ़ रही है। भोजन के अलावा, आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में भी प्याज को एक उपयोगी प्राकृतिक औषधि माना गया है। इसमें मौजूद पोषक तत्व और एंटीऑक्सीडेंट मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी हैं।
उत्पादन की ताकत और बाजार की चुनौतियाँ
भारत विश्व के प्रमुख प्याज उत्पादक देशों में अग्रणी है, जहाँ 15 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में इसकी खेती होती है। इसमें महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान जैसे राज्य अग्रणी भूमिका निभाते हैं। इन राज्यों के लाखों किसान और ग्रामीण आबादी इसके उत्पादन, भंडारण, परिवहन और प्रसंस्करण से रोजगार पाते हैं। हालांकि, इस क्षेत्र को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है; कभी बंपर उत्पादन से किसानों को उचित मूल्य नहीं मिलता, तो कभी प्राकृतिक आपदाओं और भंडारण की कमी से आपूर्ति बाधित होने पर कीमतें अचानक आसमान छूने लगती हैं। इन अनिश्चितताओं से निपटने के लिए ही एक संगठित और समर्पित संस्थागत ढांचे की जरूरत महसूस की जा रही है।
महिला सशक्तिकरण और भविष्य की राह
खेतों की तैयारी से लेकर बुवाई, सिंचाई, कटाई और विपणन तक, कृषि के हर चरण में महिलाओं का अमूल्य योगदान है। WOFAI महिला किसानों को संगठित कर जैविक कृषि को बढ़ावा दे रहा है। संगठन का मानना है कि 'राष्ट्रीय प्याज बोर्ड' के गठन से महिला किसानों को विशेष प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, गुणवत्तापूर्ण बीज, वित्तीय सहयोग और बेहतर विपणन सुविधाएं मिलेंगी। जिस तरह देश में चाय, कॉफी और मसालों के लिए विशेष बोर्ड कार्यरत हैं, उसी तरह प्याज के लिए बनने वाला यह बोर्ड न केवल किसानों की आय बढ़ाएगा और जैविक खेती को गति देगा, बल्कि खाद्य सुरक्षा, कृषि निर्यात और ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम साबित होगा।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
