दिसंबर का अंतिम सप्ताह भारत में केवल त्योहारों और छुट्टियों का समय नहीं होता, बल्कि यह देश के शराब कारोबार के लिए साल का सबसे व्यस्त और लाभकारी दौर माना जाता है। क्रिसमस और नववर्ष के जश्न के दौरान देशभर में शराब की मांग अचानक कई गुना बढ़ जाती है। बार, पब, होटल, क्लब और सरकारी ठेकों पर लोगों की लंबी कतारें इस बात का संकेत होती हैं कि यह सप्ताह शराब उद्योग के लिए असाधारण महत्व रखता है।

उपलब्ध सरकारी और उद्योग आंकड़ों के अनुसार, भारत में क्रिसमस से नववर्ष तक के लगभग सात दिनों में शराब की बिक्री सामान्य दिनों की तुलना में दो से तीन गुना तक बढ़ जाती है। केवल कुछ बड़े राज्यों की बात करें तो यह बिक्री हजारों करोड़ रुपये के आंकड़े को छू जाती है। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण और पूर्वी राज्यों तक, हर क्षेत्र में शराब की खपत में तेज उछाल दर्ज किया जाता है।

उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरी इलाकों जैसे नोएडा और गाजियाबाद में नववर्ष सप्ताह के दौरान करीब 3 से 4 लाख लीटर शराब की बिक्री दर्ज की जाती है, जिससे कारोबार का मूल्य लगभग 14 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। राजधानी दिल्ली में स्थिति और भी उल्लेखनीय रहती है, जहां दिसंबर के अंतिम सप्ताह में एक करोड़ से अधिक शराब की बोतलें बिकती हैं और कुल बिक्री मूल्य 240 करोड़ रुपये से ज्यादा आंका जाता है।

दक्षिण भारत में यह आंकड़े और बड़े रूप में सामने आते हैं। तेलंगाना में केवल दो से तीन दिनों के भीतर शराब की बिक्री 800 करोड़ रुपये के पार पहुंच जाती है। कर्नाटक में भी क्रिसमस और नववर्ष के बीच करीब 400 करोड़ रुपये से अधिक का शराब कारोबार दर्ज किया गया है। इन राज्यों में बीयर और इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL) की मांग सबसे अधिक रहती है, खासतौर पर शहरी युवाओं और पर्यटक क्षेत्रों में।

पूर्वी भारत में पश्चिम बंगाल भी इस दौड़ में पीछे नहीं है। कोलकाता में 24 दिसंबर से 31 दिसंबर के बीच शराब की बिक्री 130 करोड़ रुपये से अधिक दर्ज की गई, जो पिछले वर्षों की तुलना में लगभग 20 से 25 प्रतिशत अधिक मानी गई। वहीं, केरल जैसे राज्य में क्रिसमस का सांस्कृतिक महत्व होने के कारण शराब की बिक्री में खास उछाल देखने को मिलता है, जहां दो दिनों में ही 150 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार हो जाता है।

इस बढ़ी हुई बिक्री का सीधा लाभ राज्य सरकारों को भी मिलता है। एक्साइज ड्यूटी और टैक्स के माध्यम से सरकारों को इस एक सप्ताह में भारी राजस्व प्राप्त होता है। कई राज्यों में कानून व्यवस्था बनाए रखने और नशे में वाहन चलाने की घटनाओं को रोकने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल और विशेष जांच अभियान भी चलाए जाते हैं।

कुल मिलाकर, क्रिसमस और नववर्ष का सप्ताह भारत में केवल उत्सव और जश्न का प्रतीक नहीं, बल्कि यह शराब उद्योग के लिए एक आर्थिक पर्व भी बन चुका है। यह अवधि देश की उपभोक्ता प्रवृत्तियों, शहरी संस्कृति और सरकारी राजस्व संरचना को स्पष्ट रूप से दर्शाती है, जिससे यह सप्ताह हर साल खास महत्व रखता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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