312 जवानों से शुरू हुआ सफर कैसे बना सबसे बड़ा औद्योगिक सुरक्षा बल? जानें CISF डे क्या है
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) भारत का एक प्रमुख केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है, जिसकी स्थापना 1969 में औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा के लिए हुई थी। आज यह हवाई अड्डों, मेट्रो, परमाणु संयंत्रों, सरकारी भवनों और ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा के साथ-साथ आपदा प्रबंधन और वीआईपी सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) दिवस
भारत की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में कुछ ऐसे बल हैं जो देश की महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों की रक्षा में दिन-रात तैनात रहते हैं। इन्हीं में एक प्रमुख नाम है केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) का। उद्योगों, हवाई अड्डों, मेट्रो नेटवर्क, परमाणु प्रतिष्ठानों और ऐतिहासिक स्मारकों की सुरक्षा का दायित्व संभालने वाला यह बल आज भारत की सुरक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है।
स्थापना और प्रारंभिक उद्देश्य:
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की स्थापना 10 मार्च 1969 को संसद के एक अधिनियम के माध्यम से की गई थी। उस समय इसका मुख्य उद्देश्य देश के प्रमुख औद्योगिक उपक्रमों को सुरक्षा प्रदान करना था। शुरुआत में इसकी संरचना अपेक्षाकृत छोटी थी, लेकिन औद्योगिक विस्तार और सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए समय के साथ इसका दायरा और क्षमता दोनों बढ़ते गए। शुरुआती दौर में CISF की सुरक्षा सेवाएँ केवल उन औद्योगिक इकाइयों तक सीमित थीं जो पूरी तरह से केंद्र सरकार के स्वामित्व में थीं। बाद में इस प्रावधान को संशोधित किया गया और संयुक्त उद्यमों तथा उन संस्थानों को भी सुरक्षा प्रदान की जाने लगी जिनमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी है।
बढ़ती जिम्मेदारियाँ और विस्तारित दायरा:
वर्षों के दौरान CISF की भूमिका में व्यापक परिवर्तन आया। आज यह बल केवल औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील परिसंपत्तियों की सुरक्षा भी संभालता है। इनमें शामिल हैं:
- अंतरराष्ट्रीय और घरेलू हवाई अड्डे
- समुद्री बंदरगाह
- मेट्रो रेल नेटवर्क
- प्रमुख सरकारी भवन और संसद परिसर
- ऐतिहासिक धरोहर स्थल जैसे ताजमहल और लाल किला
- परमाणु ऊर्जा संयंत्र और अंतरिक्ष प्रतिष्ठान
- अफीम और एल्कलॉइड निष्कर्षण इकाइयाँ
इसके अलावा CISF वीआईपी सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, चुनावी ड्यूटी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा अभियानों में भी सक्रिय भूमिका निभाता है। केंद्र सरकार द्वारा सौंपे गए किसी भी विशेष कार्य को पूरा करने के लिए यह बल तैयार रहता है। स्थापना के समय CISF की संख्या सीमित थी, लेकिन आज इसकी ताकत लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में इस बल में लगभग दो लाख कर्मियों की स्वीकृत क्षमता निर्धारित की गई है। यह विस्तार इस बात का संकेत है कि देश की महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों की सुरक्षा में CISF की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है।
संगठनात्मक संरचना:
CISF का नेतृत्व भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के वरिष्ठ अधिकारी करते हैं, जिन्हें महानिदेशक (Director General) के पद पर नियुक्त किया जाता है। उनके साथ अतिरिक्त महानिदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी बल की कमान संभालते हैं।
बल को कई क्षेत्रों या सेक्टरों में विभाजित किया गया है, जिनमें प्रमुख हैं:
- एयरपोर्ट सेक्टर
- उत्तर सेक्टर
- उत्तर-पूर्व सेक्टर
- पूर्व सेक्टर
- पश्चिम सेक्टर
- दक्षिण सेक्टर
- दक्षिण-पूर्व सेक्टर
- केंद्रीय सेक्टर
- प्रशिक्षण सेक्टर
एयरपोर्ट सेक्टर विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि देश के अधिकांश हवाई अड्डों की सुरक्षा की जिम्मेदारी CISF के पास है। बड़े अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों की इकाइयों का नेतृत्व वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किया जाता है, जबकि छोटे हवाई अड्डों पर कमांडेंट या सहायक कमांडेंट स्तर के अधिकारी तैनात रहते हैं। प्रशिक्षण व्यवस्था के लिए राष्ट्रीय औद्योगिक सुरक्षा अकादमी (NISA) और फायर सर्विस ट्रेनिंग संस्थान सहित कई प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहाँ नए जवानों और अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।
परामर्श सेवाएँ और अग्नि सुरक्षा:
CISF केवल सुरक्षा बल के रूप में ही नहीं, बल्कि सुरक्षा परामर्शदाता के रूप में भी कार्य करता है। यह निजी उद्योगों और सरकारी संगठनों को सुरक्षा प्रबंधन और अग्नि सुरक्षा से संबंधित सलाह प्रदान करता है। बल की एक विशेष “फायर विंग” भी है, जो उन औद्योगिक इकाइयों में आग लगने जैसी आपदाओं के समय त्वरित कार्रवाई करती है जहाँ CISF की तैनाती होती है।
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी:
शुरुआती वर्षों में CISF में केवल पुरुषों की भर्ती होती थी, लेकिन समय के साथ इसमें महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई गई। वर्ष 1992 में आशा सिन्हा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में पहली महिला कमांडेंट बनीं, जो CISF के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर था। इसके बाद महिला सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने CISF सहित केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में महिलाओं की भर्ती बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए।
मुख्य प्रावधानों में शामिल हैं:
- CISF में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का निर्णय
- कांस्टेबल स्तर पर चरणबद्ध तरीके से 33 प्रतिशत आरक्षण
- नागरिक-पुलिस संपर्क वाले क्षेत्रों जैसे हवाई अड्डों और मेट्रो स्टेशनों पर महिला कर्मियों की तैनाती
पिछले पाँच दशकों में CISF ने खुद को एक अत्यंत पेशेवर और भरोसेमंद सुरक्षा बल के रूप में स्थापित किया है। औद्योगिक इकाइयों से लेकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों और राष्ट्रीय धरोहर स्थलों तक इसकी तैनाती इस बात का प्रमाण है कि देश की रणनीतिक और आर्थिक परिसंपत्तियों की सुरक्षा में इसका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
