भारत-बांग्लादेश सीमा पर गृहमंत्री अमित शाह का दौरा: सुरक्षा व्यवस्था और विकास योजनाओं की तथ्यात्मक समीक्षा सुरक्षा का नया 'असम मॉडल' तैयार
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने असम के कछार जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित नतुनपुर बॉर्डर आउटपोस्ट का दौरा किया। जानें कैसे 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' और सुरक्षा समीक्षा के जरिए घुसपैठ को रोकने और सीमावर्ती गांवों के विकास की नई योजना तैयार की गई है।

Home Minister Amit Shah's visit to the India-Bangladesh border
20 फरवरी 2026 को भारत की आंतरिक सुरक्षा और सीमा प्रबंधन के लिहाज से एक बड़ा दिन रहा। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह अपने असम दौरे के दौरान भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित सीमा सुरक्षा बल (BSF) के नतुनपुर बॉर्डर आउटपोस्ट (Natunpur BOP) पहुंचे। इस दौरे ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का संकेत दिया, बल्कि सीमा पर बसे अंतिम गांवों के विकास के लिए सरकार की गंभीरता को भी दर्शाया।
सुरक्षा स्थिति की पैनी समीक्षा
नतुनपुर बॉर्डर आउटपोस्ट पर गृहमंत्री ने सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। इस समीक्षा का मुख्य केंद्र अवैध घुसपैठ (Illegal Infiltration) और सीमा पार से होने वाले अपराधों को पूरी तरह से समाप्त करना था। उन्होंने BSF के जवानों से सीधा संवाद किया और कठिन परिस्थितियों में उनकी मुस्तैदी की सराहना की। सरकार का लक्ष्य सीमा पर 'जीरो टॉलरेंस' नीति को लागू करना है, ताकि देश की जनसांख्यिकी और सुरक्षा से कोई समझौता न हो सके।
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम: सीमा ही अब पहली प्राथमिकता
इस दौरे का सबसे अहम पड़ाव 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II' (VVP-II) की शुरुआत रही। गृहमंत्री ने साफ किया कि सरकार अब सीमावर्ती गांवों को 'देश का आखिरी गांव' नहीं, बल्कि 'पहला गांव' मानती है।
- विकास का बजट: इस कार्यक्रम के तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी और इंटरनेट जैसी बुनियादी सुविधाओं को शहरों की तर्ज पर विकसित किया जाएगा।
- पलायन पर रोक: गांवों में रोजगार के अवसर पैदा किए जाएंगे ताकि स्थानीय लोग पलायन न करें। जब गांव आबाद होंगे, तो वे सुरक्षा बलों के लिए 'आंख और कान' का काम करेंगे।
- सुरक्षा का ढांचा: वाइब्रेंट विलेज के तहत उन इलाकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जहाँ पूर्व में अवैध प्रवासियों की गतिविधियां देखी गई थीं।
बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक तकनीक
अमित शाह ने सीमा पर बाड़ लगाने (Fencing) के कार्य की प्रगति का भी जायजा लिया। उन्होंने निर्देश दिए कि जहाँ भौगोलिक चुनौतियों के कारण भौतिक बाड़ लगाना संभव नहीं है, वहाँ 'स्मार्ट फेंसिंग' और अत्याधुनिक तकनीक (सेंसर, ड्रोन और थर्मल इमेजिंग) का उपयोग किया जाए। गृहमंत्री का मानना है कि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर ही घुसपैठ और तस्करी को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।
मानवीय पहलू और स्थानीय जुड़ाव
अपने संबोधन में अमित शाह ने बहुत ही सरल और मानवीय लहजे में सीमावर्ती निवासियों की भूमिका को सराहा। उन्होंने कहा कि सीमा पर तैनात जवान और वहाँ रहने वाले नागरिक, दोनों ही राष्ट्र के रक्षक हैं। 'वाइब्रेंट विलेज' के माध्यम से सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सीमा पर रहने वाला हर परिवार खुद को सुरक्षित और मुख्यधारा से जुड़ा हुआ महसूस करे। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार इन दुर्गम क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।
गृहमंत्री अमित शाह का यह दौरा भारत-बांग्लादेश सीमा को सुरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा रणनीतिक कदम है। सुरक्षा समीक्षा और विकास योजनाओं का यह मेल न केवल सीमाओं को अभेद्य बनाएगा, बल्कि असम के सीमावर्ती जिलों में खुशहाली का नया दौर लेकर आएगा। 'सुरक्षा भी और विकास भी' के इस मंत्र के साथ भारत अपनी सीमाओं को एक नई पहचान दे रहा है।

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