पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य समीक्षा बैठक; जेपी नड्डा ने बुनियादी ढांचे के लिए जारी किया फंड
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में पश्चिम बंगाल के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत ₹527.58 करोड़ जारी किए गए।

नई दिल्ली में पश्चिम बंगाल की राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) और स्वास्थ्य अवसंरचना योजनाओं की समीक्षा के लिए अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा
West Bengal Health Sector Review 2026 : पश्चिम बंगाल की चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था को पटरी पर लाने और चिकित्सा बुनियादी ढांचे में एक युगांतरकारी बदलाव की नींव रखने के लिए देश की राजधानी दिल्ली से लेकर कोलकाता तक एक बड़ी प्रशासनिक हलचल देखी गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने पश्चिम बंगाल की स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत का आकलन करने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील वर्चुअल समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस उच्च स्तरीय डिजिटल संवाद में उनके साथ राज्य के प्रमुख राजनीतिक नेतृत्व के तौर पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी विशेष रूप से शामिल रहे। इस बैठक को केवल एक सामान्य प्रशासनिक समीक्षा नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे केंद्र और राज्य के बीच स्वास्थ्य के मोर्चे पर चल रहे पुराने गतिरोध को समाप्त कर आम नागरिकों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के एक गंभीर और निर्णायक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
इस रणनीतिक महामंथन के दौरान केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि पश्चिम बंगाल के नागरिकों को आधुनिक और समयबद्ध चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने के लिए राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार करना होगा। बैठक का मुख्य फोकस राज्य में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) और पीएम-आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM-ABHIM) जैसी अति-महत्वपूर्ण केंद्रीय योजनाओं के सुस्त पड़े क्रियान्वयन को रफ्तार देना था। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राज्य में चिकित्सा अवसंरचना को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जाहिर करते हुए सुवेंदु अधिकारी को भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार बंगाल के स्वास्थ्य बजट और तकनीकी संसाधनों में किसी भी तरह की कमी नहीं आने देगी। उन्होंने रेखांकित किया कि आम जनता के लिए चिकित्सा सेवाओं को सुलभ, किफायती और उच्चतम गुणवत्ता से युक्त बनाने के लिए केंद्र और राज्य के स्वास्थ्य विभागों के बीच एक त्रुटिहीन और पारदर्शी समन्वय स्थापित होना समय की सबसे बड़ी मांग है।
इस बैठक का सबसे ठोस और व्यावहारिक नतीजा वित्तीय मोर्चे पर देखने को मिला, जिसने इस पूरी कवायद को एक नई आधिकारिक मजबूती दी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बड़ा नीतिगत कदम उठाते हुए पश्चिम बंगाल के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत स्वीकृत कुल ₹3,505.59 करोड़ के विशाल बजट में से पहली किस्त के रूप में ₹527.58 करोड़ की भारी-भरकम राशि तत्काल प्रभाव से जारी कर दी है। इस राजकोषीय आवंटन का उपयोग सीधे तौर पर बंगाल के सुदूर ग्रामीण इलाकों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को अपग्रेड करने, जीवन रक्षक दवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने और लंबित पड़े चिकित्सा प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने में किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से महिलाओं को बचाने के लिए देशव्यापी एचपीवी (HPV) टीकाकरण अभियान और 'टीबी मुक्त भारत अभियान' के प्रभावी संचालन को लेकर कड़े निर्देश दिए हैं, जिसमें जनभागीदारी को अनिवार्य बनाने पर सहमति बनी है।
कानूनी और नीतिगत मोर्चे पर यह बैठक एक ऐतिहासिक समझौते की गवाह बनने की दिशा में आगे बढ़ी है। लंबे समय से राजनीतिक खींचतान की वजह से लटकी पड़ी 'आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना' (AB PM-JAY) को पश्चिम बंगाल में पूरी तरह लागू करने के लिए आधिकारिक समझौता ज्ञापन यानी एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर करने की प्रक्रिया पर विस्तृत चर्चा हुई। इस कानूनी सहमति के आकार लेने से बंगाल के करोड़ों गरीब परिवारों को देश भर के बड़े अस्पतालों में ₹5 लाख तक के मुफ्त इलाज की कानूनी गारंटी मिल सकेगी। इसके साथ ही, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सूचकांकों में सुधार लाने के लिए संस्थागत प्रसव और नवजात शिशुओं के टीकाकरण के वैधानिक ढांचे को और अधिक कड़ा करने पर दोनों पक्षों ने अपनी सहमति जताई।
इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक का समापन सार्वजनिक स्वास्थ्य के परिणामों में व्यापक सुधार लाने के एक साझा संकल्प के साथ हुआ। केंद्र सरकार और पश्चिम बंगाल के शीर्ष नेतृत्व ने इस बात को दोहराया कि नागरिकों का स्वास्थ्य और उनकी जीवन प्रत्याशा किसी भी कल्याणकारी राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। ₹527 करोड़ से अधिक की प्रारंभिक वित्तीय संजीवनी मिलने के बाद अब गेंद पूरी तरह से राज्य के प्रशासनिक तंत्र के पाले में है। आने वाले दिनों में इन केंद्रीय फंड्स का जमीन पर कैसा इस्तेमाल होता है और आयुष्मान भारत को लेकर हुआ यह नीतिगत समन्वय बंगाल के सुदूर गांवों और कस्बों में चिकित्सा के अभाव में दम तोड़ते मरीजों के लिए कितना बड़ा लाइफ-सेवर साबित होता है, इस पर पूरे देश की निगाहें टिकी रहेंगी।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
