लाहौल-स्पीति: हिमालय की गोद में बसे शांत सिस्सू गांव में अब अगले 40 दिनों तक केवल परंपराओं की गूंज सुनाई देगी, पर्यटकों का शोर नहीं। हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले की सिस्सू पंचायत ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लेते हुए 20 जनवरी से 28 फरवरी तक घाटी में सभी प्रकार की पर्यटन गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। यह निर्णय स्थानीय देवताओं की शांति और प्राचीन अनुष्ठानों की पवित्रता को बनाए रखने के लिए लिया गया है।

आस्था के लिए अर्थशास्त्र का त्याग
इस फैसले के तहत, घाटी में एटीवी राइड्स (ATV Rides), स्कीइंग, जिप-लाइनिंग और अन्य सभी साहसिक गतिविधियों को पूरी तरह से रोक दिया गया है। पंचायत का यह आदेश स्थानीय त्यौहारों—विशेष रूप से 'हालदा' (Halda) और 'पूनहा' (Poonha)—के दौरान निर्बाध पूजा सुनिश्चित करने के लिए जारी किया गया है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि इन त्यौहारों के दौरान देवताओं का आह्वान किया जाता है, जिसके लिए वातावरण में पूर्ण शांति और पवित्रता अनिवार्य है।



घटनाक्रम और निर्णय की पृष्ठभूमि
यह प्रतिबंध केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक आवश्यकता है।

  • परंपरा का निर्वहन: यह एक वार्षिक परंपरा है, जिसका पालन 2023 और 2025 जैसे पिछले वर्षों में भी सख्ती से किया गया था।

  • समितियों से परामर्श: यह निर्णय स्थानीय समितियों और हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद लिया गया है।

  • वायरल वीडियो का प्रभाव: हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें पर्यटकों द्वारा घाटी में अत्यधिक शोर और अव्यवस्था फैलाते हुए देखा गया था। इस वीडियो ने स्थानीय लोगों और ऑनलाइन समुदाय के बीच आक्रोश पैदा किया और पर्यटकों से स्थानीय संस्कृति का सम्मान करने की मांग को हवा दी।

अधिकारियों का क्या कहना है?
सिस्सू पंचायत के प्रधान, राजीव कुमार ने इस निर्णय की पुष्टि करते हुए कहा कि अटल टनल (Atal Tunnel) के खुलने के बाद से यहां पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। हालांकि इससे आर्थिक विकास हुआ है, लेकिन परंपराओं की रक्षा करना उनकी पहली प्राथमिकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पहाड़ियों में विकास और संस्कृति के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है, और यह 40 दिनों का 'ब्रेक' उसी संतुलन का प्रतीक है।

सिस्सू का यह कदम एक स्पष्ट संदेश देता है कि हिमाचल की वादियां केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि एक जीवित संस्कृति का घर हैं। 20 जनवरी से शुरू हो रहा यह प्रतिबंध 28 फरवरी तक जारी रहेगा, जब तक कि स्थानीय अनुष्ठान पूरी विधि-विधान से संपन्न नहीं हो जाते। यह निर्णय पर्यटकों को भी यह सोचने पर मजबूर करता है कि वे जिन स्थानों की सुंदरता का आनंद लेने जाते हैं, वहां की मान्यताओं का सम्मान करना भी उनका दायित्व है।

Updated On
Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

Next Story