India handicraft export 2025 : भारत का हस्तशिल्प क्षेत्र केवल कला का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान की मजबूत रीढ़ है। देश के विभिन्न कोनों में फैले लाखों कारीगर पारंपरिक कौशल और सृजनात्मक परंपराओं के माध्यम से आजीविका कमाते हैं और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हैं। 318 जीआई-टैग्ड हस्तशिल्प उत्पादों और लगभग 455 औपचारिक शिल्प श्रेणियों के साथ यह क्षेत्र भारतीय शिल्पकला की विविधता और अनूठी पहचान को दर्शाता है।

हस्तशिल्प मुख्यतः हाथों से निर्मित वस्तुएँ होती हैं, जिनमें सौंदर्य, कलात्मकता और सांस्कृतिक विशेषताएँ होती हैं। ये विशेषताएँ इन्हें मशीन-निर्मित समान उत्पादों से अलग और मूल्यवान बनाती हैं। विश्व स्तर पर भारतीय हस्तशिल्प की मांग लगातार बढ़ रही है, और यह क्षेत्र आर्थिक दृष्टि से देश के लिए महत्वपूर्ण अवसर उत्पन्न करता है।

राष्ट्रीय हस्तशिल्प सप्ताह, जो हर वर्ष 8 से 14 दिसंबर तक मनाया जाता है, कारीगरों की उपलब्धियों और इस उद्योग की सांस्कृतिक एवं आर्थिक भूमिका को उजागर करने का अवसर प्रदान करता है। इस अवसर पर राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार और शिल्प गुरु पुरस्कार उत्कृष्ट कारीगरों और उनके नवाचारों को सम्मानित करते हैं, जो पारंपरिक कौशल और सांस्कृतिक संरक्षण की भावना को प्रोत्साहित करते हैं।

हस्तशिल्प उद्योग में वर्तमान में लगभग 64.66 लाख कारीगर कार्यरत हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश, राजस्थान, असम, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु प्रमुख केंद्र हैं। इनमें से बड़ी संख्या महिलाएँ हैं, जो ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में इस क्षेत्र की भूमिका को दर्शाती हैं। अधिकांश कारीगर कम पूंजी निवेश और आंशिक समय में कार्यरत होते हैं, लेकिन मूल्य-वर्धन और रोजगार के अवसर इसे ग्रामीण आजीविका का महत्वपूर्ण स्रोत बनाते हैं।

आर्थिक दृष्टि से, FY2025 की पहली छमाही में भारत के वस्त्र और परिधान का निर्यात 18,235.44 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। 2024–25 में हस्तशिल्प का कुल निर्यात ₹33,122.79 करोड़ तक पहुँच गया, जिसमें आर्ट मेटलवेयर, वुडवेयर, हैंडप्रिंटेड टेक्सटाइल, एम्ब्रॉयडर्ड एवं क्रोशे वस्तुएँ, नकली आभूषण जैसी श्रेणियाँ शामिल हैं। अमेरिका प्रमुख निर्यात बाजार है, जबकि 61% उत्पाद अन्य वैश्विक बाजारों में निर्यात होते हैं।

सरकार हस्तशिल्प क्षेत्र के विकास और कारीगरों के सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएँ चला रही है, जिनमें राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम (NHDP), व्यापक हस्तशिल्प क्लस्टर विकास योजना (CHCDS), SFURTI, और स्वावलंबी कारीगर पहल प्रमुख हैं। ये कार्यक्रम कारीगरों को प्रशिक्षण, डिज़ाइन विकास, विपणन सहायता और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करते हैं। साथ ही, GI उत्पादों और जिलों के विशिष्ट उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए विशेष मार्केटिंग और प्रदर्शनी कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

हस्तशिल्प उद्योग न केवल रोजगार और ग्रामीण आजीविका के अवसर प्रदान करता है, बल्कि सामाजिक समावेश और महिलाओं के सशक्तिकरण में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। बढ़ती वैश्विक मांग, मजबूत सरकारी नीतियाँ, और कुशल कारीगरों की प्रतिबद्धता इसे आने वाले वर्षों में आर्थिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टियों से और अधिक सुदृढ़ बनाएगी

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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