जम्मू-कश्मीर में हाड़ कपा देने वाली 'चिल्लई कलां' की ठंड ने कुदरत का एक ऐसा तिलिस्म रचा है, जिसे देख पर्यटक मंत्रमुग्ध हैं। उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले में स्थित प्रसिद्ध 'द्रंग झरना' (Drung Waterfall) भीषण शीतलहर के कारण पूरी तरह जम गया है। गिरते तापमान ने झरने की कलकल बहती जलधारा को कांच जैसी ठोस बर्फ में तब्दील कर दिया है, जिससे यहाँ का दृश्य किसी हॉलीवुड फिल्म के 'फ्रोजन' संसार जैसा प्रतीत हो रहा है। इस अनोखे और जादुई मंजर को अपनी आंखों में कैद करने के लिए सोमवार को सैलानियों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा।

कुदरत का करिश्मा: बर्फ की चट्टान बना जलप्रपात :

जनवरी की शुरुआत के साथ ही कश्मीर घाटी के तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। श्रीनगर से लेकर सोनमर्ग और गुलमर्ग तक, हर तरफ पारा शून्य से कई डिग्री नीचे (Minus) चला गया है।

  • बर्फ का साम्राज्य: भारी बर्फबारी के बाद द्रंग के पहाड़ों से गिरने वाला पानी अब बर्फ की नुकीली चट्टानों और सफेद स्तंभों की तरह लटक रहा है।

  • पसंदीदा स्पॉट: यह स्थान अब कश्मीर का सबसे बड़ा विंटर अट्रैक्शन बन चुका है, जहाँ पर्यटक न केवल जमी हुई झीलों का अनुभव कर रहे हैं, बल्कि इस जमी हुई जलधारा के सामने सेल्फी लेने के लिए घंटों कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं।

पर्यटकों का अनुभव: 'जैसे जन्नत जमीन पर उतर आई हो'

बर्फबारी के बीच मस्ती करते सैलानियों का उत्साह हाड़ कपा देने वाली सर्दी पर भारी पड़ता दिख रहा है। आईएएनएस (IANS) से बातचीत में महाराष्ट्र और देश के अन्य हिस्सों से आए पर्यटकों ने अपने अनुभव साझा किए:

  • अनोखा अनुभव: सैलानियों का कहना है कि उन्होंने देश-विदेश के कई झरने देखे हैं, लेकिन पानी को हवा में इस तरह जमते हुए देखना एक आध्यात्मिक शांति देता है।

  • स्थानीय संस्कृति: पर्यटकों ने न केवल वादियों की खूबसूरती, बल्कि कश्मीरी लोगों के सहयोगपूर्ण बर्ताव और स्थानीय संस्कृति की भी जमकर सराहना की।

  • एक अपील: महाराष्ट्र से आए एक पर्यटक ने बताया कि वे लंबे समय से इस 'बर्फीले जादू' का इंतजार कर रहे थे और अब यहाँ आकर उनका सपना सच हो गया है। उन्होंने सभी से जीवन में एक बार सर्दियों का कश्मीर देखने की अपील की है।

पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव :

द्रंग झरने का इस तरह जमना कश्मीर पर्यटन के लिए संजीवनी साबित हो रहा है। पहलगाम, सोनमर्ग और गुलमर्ग के होटलों में भारी बुकिंग देखी जा रही है। स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों की सुरक्षा के लिए फिसलन भरी सड़कों पर विशेष इंतजाम किए हैं। कश्मीरी वादियों में बर्फबारी का यह दौर न केवल आंखों को सुकून दे रहा है, बल्कि स्थानीय हस्तशिल्प और गाइडों के लिए भी रोजगार के नए अवसर लेकर आया है।

यह केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं है, बल्कि यह उस अटूट विश्वास का प्रमाण है कि कश्मीर की असली खूबसूरती उसके बर्फीले आगोश में ही छिपी है। जैसे-जैसे तापमान और गिरेगा, यह विंटर वंडरलैंड और भी निखरेगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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