गुजरात में निलंबित हुए 9 सीनियर डॉक्टर! जानिए OT के बाहर जूनियरों के साथ क्या होता था हर रात
गुजरात के दो सरकारी मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग और मानसिक-शारीरिक उत्पीड़न के आरोपों के बाद नौ रेजिडेंट डॉक्टर निलंबित किए गए। जूनियर डॉक्टरों ने सामूहिक दंड, रातभर खड़े रहने, व्हाट्सएप पर फोटो भेजने और शारीरिक उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाए। मामले की जांच के लिए समिति गठित।

अहमदाबाद स्थित बी.जे. मेडिकल कॉलेज
गुजरात के चिकित्सा शिक्षा तंत्र में एक बार फिर रैगिंग और उत्पीड़न के गंभीर आरोपों ने हड़कंप मचा दिया है। राज्य सरकार ने दो सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत नौ रेजिडेंट डॉक्टरों को निलंबित कर दिया है। इन पर जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना, धमकी और अनुशासन के नाम पर कथित रूप से अमानवीय व्यवहार करने के आरोप लगे हैं। यह कार्रवाई उन शिकायतों के बाद की गई है, जो लगातार कई महीनों से सामने आ रही थीं और जिनमें विभागीय स्तर पर गंभीर अनुशासनहीनता की बात कही गई थी।
मामला अहमदाबाद स्थित बी.जे. मेडिकल कॉलेज और भावनगर स्थित सर टी. जनरल मेडिकल कॉलेज से जुड़ा है, जहां कुल मिलाकर नौ सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को निलंबित किया गया है। इनमें से तीन डॉक्टर अहमदाबाद के बी.जे. मेडिकल कॉलेज से और छह डॉक्टर भावनगर के मेडिकल कॉलेज से संबंधित हैं। जानकारी के अनुसार, सभी निलंबित डॉक्टर अपने-अपने संस्थानों के ऑर्थोपेडिक्स विभाग से जुड़े हुए हैं, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, जूनियर डॉक्टरों पर एक ऐसा “सामूहिक दंड तंत्र” लागू किया गया था, जिसमें एक व्यक्ति की गलती पर पूरे बैच को सजा दी जाती थी। भावनगर मेडिकल कॉलेज में 13 प्रथम वर्ष के रेजिडेंट डॉक्टरों ने छह सीनियर डॉक्टरों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, जिसमें मानसिक उत्पीड़न, धमकी और लगातार दबाव में रखने के आरोप लगाए गए। शिकायतों के अनुसार, मामूली या अनजानी गलती पर भी सभी जूनियर डॉक्टरों को देर रात बुलाकर सामूहिक रूप से दंडित किया जाता था, जिससे उनके मानसिक तनाव में लगातार वृद्धि हो रही थी।
आरोपों में यह भी सामने आया कि जूनियर डॉक्टरों को एक ही वाक्य को सैकड़ों और कभी-कभी हजारों बार लिखने की सजा दी जाती थी। इसके अलावा उन्हें ऑपरेशन थिएटर, वार्ड और विभागीय परिसर के बाहर पूरी रात खड़े रहने के लिए मजबूर किया जाता था। इतना ही नहीं, कथित रूप से उन्हें निर्धारित स्थान पर खड़े रहने के प्रमाण के रूप में नियमित अंतराल पर व्हाट्सएप ग्रुप में तस्वीरें भेजने के लिए भी कहा जाता था।
अहमदाबाद स्थित बी.जे. मेडिकल कॉलेज में दर्ज शिकायतों के अनुसार, तीन रेजिडेंट डॉक्टरों पर आरोप है कि उन्होंने जूनियर डॉक्टरों को उठक-बैठक जैसे शारीरिक दंड दिए और कुछ मामलों में शारीरिक उत्पीड़न भी किया गया। शिकायतों में यह भी दावा किया गया कि कुछ जूनियर डॉक्टरों के शरीर पर चुटकी लेने के निशान पाए गए, जिसकी पुष्टि मेडिकल परीक्षण में भी हुई। प्रारंभिक शिकायत पर कार्रवाई न होने के बाद दोबारा शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके बाद प्रशासन ने अनुशासनात्मक कदम उठाए।
राज्य के जूनियर स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंसेरिया ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जांच समिति का गठन किया गया है, जिसका नेतृत्व भावनगर मेडिकल कॉलेज के डीन को सौंपा गया है। समिति को जांच रिपोर्ट जल्द प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। वहीं, प्रशासनिक आदेशों के तहत निलंबित डॉक्टरों को अपने-अपने कॉलेज परिसरों में प्रवेश और परीक्षा में शामिल होने से भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार, बी.जे. मेडिकल कॉलेज के एक डॉक्टर पर एक वर्ष का निलंबन लगाया गया है, जबकि अन्य दो डॉक्टरों पर छह-छह महीने का निलंबन लागू किया गया है।
यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि चिकित्सा शिक्षा संस्थानों में रैगिंग पर सख्त प्रतिबंध है और जूनियर डॉक्टर पहले से ही अत्यधिक दबाव, जिम्मेदारी और कार्यभार के बीच प्रशिक्षण लेते हैं। ऐसे में इस प्रकार के आरोप न केवल संस्थागत अनुशासन पर सवाल उठाते हैं, बल्कि मरीजों की देखभाल और चिकित्सा व्यवस्था की गुणवत्ता पर भी प्रभाव डाल सकते हैं।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
