बिहार के रक्त रंजित सामाजिक संघर्षों और वर्चस्व की लड़ाई के इतिहास में आज एक नया और सकारात्मक अध्याय जुड़ गया है। जिस परिवार का नाम दशकों तक बंदूकों की गूंज और जमीनी विवादों के केंद्र में रहा, उसी परिवार की एक बेटी ने आज लोकतंत्र के सबसे बड़े स्तंभ—भारतीय प्रशासनिक सेवा—में अपनी जगह पक्की कर ली है। प्रतिबंधित रणवीर सेना के संस्थापक स्वर्गीय ब्रह्मेश्वर सिंह, जिन्हें दुनिया 'ब्रह्मेश्वर मुखिया' के नाम से जानती है, उनकी पोती आकांक्षा सिंह ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में अखिल भारतीय स्तर पर 301वीं रैंक हासिल कर प्रदेश को गौरवान्वित किया है।

मार्च 2026 में घोषित हुए इन नतीजों ने न केवल भोजपुर के खोपिरा गांव में खुशियां बिखेर दी हैं, बल्कि पूरे बिहार में एक नई चर्चा छेड़ दी है। आकांक्षा, ब्रह्मेश्वर मुखिया के छोटे बेटे इंद्रजीत कुमार सिंह की सुपुत्री हैं। पेशे से किसान इंद्रजीत सिंह ने अपनी बेटी को उन परिस्थितियों और अतीत की छाया से दूर रखा, जिसने कभी उनके परिवार को राष्ट्रीय सुर्खियों में रखा था। आकांक्षा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा और स्नातक के दौरान ही यह संकल्प लिया था कि वे कलम की ताकत से समाज में बदलाव लाएंगी। उनकी यह सफलता उस संकल्प की सिद्धि है, जिसे उन्होंने वर्षों की कठिन तपस्या और एकाग्रता के दम पर हासिल किया है।

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में देखें तो यह घटनाक्रम बेहद महत्वपूर्ण है। 1990 के दशक में जब बिहार जातीय संघर्ष और नक्सली हिंसा की आग में झुलस रहा था, तब ब्रह्मेश्वर मुखिया ने सवर्ण भूस्वामियों के हितों की रक्षा के लिए रणवीर सेना का गठन किया था। वह दौर खूनी संघर्षों और प्रतिशोध का था, जिसका अंत 1 जून 2012 को आरा में मुखिया की निर्मम हत्या के साथ हुआ। हालांकि, मुखिया का व्यक्तित्व हमेशा विवादों और प्रभाव के बीच झूलता रहा, लेकिन आज उनकी पोती ने प्रशासनिक सेवा का मार्ग चुनकर यह संदेश दिया है कि आने वाली पीढ़ियां विकास और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ने को तैयार हैं।

आकांक्षा की इस उपलब्धि पर आरा से लेकर पटना तक जश्न का माहौल है। उनके पैतृक गांव में मिठाइयां बांटी जा रही हैं और लोग इसे एक 'बदलाव के सूर्योदय' के रूप में देख रहे हैं। स्थानीय विशेषज्ञों का मानना है कि एक ऐसे परिवार से, जिसका इतिहास सशस्त्र विद्रोह और अदालती कार्रवाइयों से जुड़ा रहा हो, वहां से एक लड़की का UPSC क्रैक करना सामाजिक परिवर्तन की एक बड़ी मिसाल है। यह सफलता दर्शाती है कि शिक्षा किसी भी विरासत पर हावी हो सकती है और मेहनत के जरिए नियति को बदला जा सकता है। आकांक्षा अब एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं देंगी, जो यकीनन बिहार के युवाओं के लिए प्रेरणा का एक नया स्रोत बनेगा।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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