नई दिल्ली में केंद्र सरकार ने मंगलवार को पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए एक मसौदा अधिसूचना जारी की। यह वही घातक खरपतवारनाशी है, जिसे दुनिया के 70 से अधिक देशों में इसकी विषाक्तता को लेकर प्रतिबंधित किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद भारत में इसका उपयोग कृषि क्षेत्रों में कानूनी रूप से जारी था।

मंगलवार को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी मसौदा अधिसूचना में पैराक्वाट पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध का प्रस्ताव रखा गया। इस संबंध में इंडिया टुडे डिजिटल के सहयोगी पोर्टल किसान तक ने रिपोर्ट प्रकाशित की। इससे कुछ दिन पहले मंत्रालय के सूत्रों ने किसान तक के संपादक ओम प्रकाश को बताया था कि पैराक्वाट पर देशव्यापी प्रतिबंध का प्रस्ताव तैयार कर कृषि मंत्रालय को भेजा गया है और इसे इसी सप्ताह मंजूरी मिल सकती है।

पैराक्वाट डाइक्लोराइड दुनिया के सबसे विवादास्पद खरपतवारनाशियों में से एक माना जाता है। इसकी विषाक्तता को लेकर लंबे समय से गंभीर चिंताएं जताई जाती रही हैं। यही वजह है कि जिस देश में इसका आविष्कार हुआ और जहां इसका निर्माण होता है, वहां सहित दुनिया के कई देशों ने इस पर प्रतिबंध लगा रखा है। इसके बावजूद भारत में इसका बाजार बना हुआ था और किसानों के बीच इसका उपयोग जारी था।

स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने अब कीटनाशक अधिनियम, 1968 की धारा 27 के तहत पैराक्वाट डाइक्लोराइड के आयात, निर्माण, बिक्री, परिवहन, वितरण और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा है। मंत्रालय द्वारा जारी मसौदा अधिसूचना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

केंद्र सरकार की इस कार्रवाई के साथ भारत उन देशों की सूची में शामिल होने की दिशा में बढ़ता दिखाई दे रहा है जिन्होंने पैराक्वाट डाइक्लोराइड की विषाक्तता को देखते हुए इसके उपयोग पर सख्त रोक लगाने का फैसला किया है। मसौदा अधिसूचना जारी होने के बाद इस रसायन के आयात से लेकर उपयोग तक की पूरी व्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है।

Pratahkal Bureau

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