तेल के पैकेट 1 लीटर है या नहीं? अब पैकेट देखकर नहीं होंगे कन्फ्यूज, सरकार का नया नियम लागू
उपभोक्ता मामलों के विभाग ने लीगल मेट्रोलॉजी ढांचे के तहत खाद्य तेलों के लिए मानक पैक साइज निर्धारित कर दिए हैं। अब विभिन्न ब्रांडों के तेलों की कीमतों की तुलना करना आसान होगा। नए नियम घरेलू और आयातित दोनों खाद्य तेलों पर लागू होंगे, जबकि कंपनियों को अनुपालन के लिए तीन महीने का संक्रमणकाल दिया गया है।

खाद्य तेल पैकेजिंग के लिए सरकार ने तय किए नए मानक पैक साइज
देशभर के करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए खाद्य तेल खरीदने का तरीका जल्द ही अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक होने वाला है। उपभोक्ता मामलों के विभाग ने लीगल मेट्रोलॉजी (वैधानिक माप विज्ञान) ढांचे के तहत खाद्य तेलों और वसा उत्पादों की पैकेजिंग से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए मानक पैक साइज निर्धारित कर दिए हैं। इस फैसले का उद्देश्य बाजार में तेजी से बढ़ रहे अलग-अलग पैकेज आकारों की समस्या को खत्म करना और उपभोक्ताओं को विभिन्न ब्रांडों के बीच कीमतों की सटीक तुलना करने में सक्षम बनाना है।
यह निर्णय 29 दिसंबर 2023 को जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) में संशोधन के बाद लिया गया है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में खाद्य तेल कंपनियों द्वारा अलग-अलग आकार के पैकेट और बोतलें बाजार में उतारी जा रही थीं, जिससे ग्राहकों के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता था कि कौन-सा उत्पाद वास्तव में बेहतर मूल्य प्रदान कर रहा है। कई बार समान दिखने वाले पैक अलग-अलग मात्रा में तेल लिए होते थे, जिससे उपभोक्ता भ्रमित हो जाते थे।
इस स्थिति को देखते हुए विभाग ने देश के प्रमुख खाद्य तेल उद्योग संगठनों के साथ व्यापक चर्चा की। 20 मई 2026 को विभाग के सचिव की अध्यक्षता में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में भारतीय वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन, सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सेंट्रल ऑर्गेनाइजेशन फॉर ऑयल इंडस्ट्री एंड ट्रेड तथा मस्टर्ड ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन सहित कई प्रमुख संगठनों ने भाग लिया। इन संगठनों का प्रतिनिधित्व देश के लगभग 90 प्रतिशत खाद्य तेल उद्योग से जुड़ा हुआ है और अधिकांश ने मानक पैक साइज लागू करने के प्रस्ताव का समर्थन किया।
संशोधित एसओपी के तहत पाम ऑयल, सोयाबीन ऑयल, सूरजमुखी तेल, सरसों एवं रेपसीड तेल, मूंगफली तेल, तिल का तेल, राइस ब्रान ऑयल, कॉटनसीड ऑयल, कॉर्न ऑयल तथा विभिन्न ब्लेंडेड खाद्य तेलों के लिए मानक पैक आकार निर्धारित किए गए हैं। अब इन उत्पादों को 200 मिलीलीटर या ग्राम, 500 मिलीलीटर या ग्राम, 1 लीटर या किलोग्राम, 2 लीटर या किलोग्राम, 3 लीटर या किलोग्राम, 4 लीटर या किलोग्राम, 5 लीटर या किलोग्राम, 15 लीटर या किलोग्राम तथा 20 लीटर या किलोग्राम के निर्धारित आकारों में उपलब्ध कराया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इस कदम से उपभोक्ता अलग-अलग ब्रांडों के उत्पादों की कीमतों की सीधे तुलना कर सकेंगे और यह समझ पाएंगे कि उन्हें अपने पैसे के बदले कितना मूल्य मिल रहा है। इससे खरीदारी के दौरान पारदर्शिता बढ़ेगी और उपभोक्ता अधिक सूचित निर्णय ले सकेंगे। हालांकि सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि छोटे और कम आय वाले उपभोक्ताओं की जरूरतें प्रभावित न हों। इसी कारण 200 मिलीलीटर या 200 ग्राम से कम मात्रा वाले पैक इस मानकीकरण के दायरे से बाहर रखे गए हैं। इसके अलावा, कम प्रचलन वाले या माइनर खाद्य तेलों को भी इस अनिवार्यता से छूट दी गई है ताकि बाजार में विविधता बनी रहे।
नए नियमों के तहत एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। यदि किसी पैकेज पर खाद्य तेल की मात्रा लीटर या मिलीलीटर में दर्शाई जाती है, तो उस पर उसका समकक्ष वजन भी स्पष्ट रूप से लिखना होगा। यह प्रावधान लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) नियम, 2011 के अनुरूप लागू किया जाएगा। इससे उपभोक्ताओं को अलग-अलग ब्रांडों के उत्पादों की तुलना करने में और अधिक सुविधा मिलेगी।
यह व्यवस्था केवल भारत में निर्मित खाद्य तेलों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आयातित खाद्य तेलों पर भी समान रूप से लागू होगी। हालांकि सैंपलिंग, परीक्षण, नेट क्वांटिटी की जांच और अनुमेय त्रुटियों से जुड़े मौजूदा नियम पहले की तरह ही लागू रहेंगे और उनका संचालन लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) नियम, 2011 तथा संबंधित एसओपी के तहत किया जाएगा।
उद्योग जगत की व्यावहारिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने निर्माताओं, पैकर्स और आयातकों को नए प्रावधानों को लागू करने के लिए तीन महीने का संक्रमणकाल भी प्रदान किया है। इस अवधि के दौरान कंपनियां अपनी पैकेजिंग, उत्पादन प्रक्रियाओं और लेबलिंग में आवश्यक बदलाव कर सकेंगी। हालांकि जो कंपनियां चाहें, वे इन मानक पैक साइज को तत्काल प्रभाव से भी अपनाने के लिए स्वतंत्र होंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य तेल क्षेत्र में मानक पैक साइज लागू होने से बाजार में एकरूपता बढ़ेगी, प्रतिस्पर्धा अधिक निष्पक्ष होगी और उपभोक्ताओं को बेहतर जानकारी के आधार पर खरीदारी करने का अवसर मिलेगा। यह कदम न केवल उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करेगा, बल्कि खाद्य तेल उद्योग में पारदर्शिता और विश्वास को भी नई मजबूती प्रदान करेगा। उपभोक्ता मामलों के विभाग ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य ऐसे सुधारों को आगे बढ़ाना है जो उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करें, व्यापार में निष्पक्षता सुनिश्चित करें और बाजार व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाएं। खाद्य तेल पैकेजिंग में यह बदलाव इसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिसका प्रभाव आने वाले समय में देश के करोड़ों उपभोक्ताओं और पूरे खाद्य तेल उद्योग पर दिखाई देगा।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
