पेट्रोल-डीजल कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ोतरी के बाद गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन ने Uber, Ola, Swiggy, Zomato, Blinkit और Rapido से जुड़े ड्राइवरों व डिलीवरी पार्टनर्स से 16 मई को 5 घंटे की राष्ट्रव्यापी हड़ताल की अपील की है। यूनियन ने प्रति किलोमीटर भुगतान बढ़ाने, ईंधन मुआवजा और बेहतर कमाई की मांग उठाई है।

देशभर में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच अब गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स का असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। ऐप-आधारित टैक्सी और डिलीवरी सेवाओं से जुड़े लाखों ड्राइवरों और डिलीवरी पार्टनर्स ने आज दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक सेवाएं बंद रखने की अपील की है। इस विरोध प्रदर्शन का आह्वान गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) ने किया है, जिसने दावा किया है कि लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों ने गिग वर्कर्स की कमर तोड़ दी है, जबकि कंपनियों की भुगतान संरचना में कोई राहत नहीं दी गई है।

यूनियन ने Uber, Ola, Rapido, Swiggy, Zomato और Blinkit जैसी प्रमुख प्लेटफॉर्म कंपनियों से जुड़े ड्राइवरों और डिलीवरी कर्मियों से इस पांच घंटे के राष्ट्रव्यापी शटडाउन में शामिल होने की अपील की है। संगठन का कहना है कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी गैस की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के कारण कामकाजी खर्च तेजी से बढ़ गए हैं, लेकिन प्रति किलोमीटर मिलने वाला भुगतान और इंसेंटिव स्ट्रक्चर लगभग स्थिर बना हुआ है। इससे लाखों गिग वर्कर्स की आय पर सीधा असर पड़ रहा है।

गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन द्वारा जारी बयान में कहा गया कि देश के करीब 1.2 करोड़ गिग वर्कर्स पर ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा प्रभाव पड़ेगा। यूनियन ने चेतावनी दी कि यदि स्थिति ऐसी ही बनी रही तो बड़े स्तर पर गिग वर्कर्स का पलायन शुरू हो सकता है। संगठन ने सरकार और डिजिटल प्लेटफॉर्म कंपनियों से प्रति किलोमीटर सेवा दरों में तत्काल बढ़ोतरी की मांग की है।

दरअसल, केंद्र सरकार ने शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की थी। लगभग चार वर्षों बाद खुदरा ईंधन दरों में यह पहली बड़ी वृद्धि मानी जा रही है। बताया गया कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान से जुड़े हालात और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में संभावित बाधाओं की आशंका के कारण यह फैसला लिया गया।

यूनियन के राष्ट्रीय समन्वयक निर्मल गोराना ने कहा कि बढ़ती ईंधन कीमतें गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए गंभीर संकट बनती जा रही हैं। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में ऐप-आधारित कंपनियों से जुड़े कर्मचारी अपनी रोजी-रोटी के लिए पूरी तरह मोटरसाइकिल, स्कूटर और अन्य वाहनों पर निर्भर हैं। ऐसे में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी, वाहन रखरखाव और मरम्मत के बढ़ते खर्च ने उनकी आर्थिक स्थिति को बेहद कमजोर कर दिया है। गोराना के अनुसार, देश के लगभग 60 करोड़ असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों में गिग वर्कर्स सबसे ज्यादा प्रभावित वर्गों में शामिल हैं।

यूनियन ने अपनी प्रमुख मांगों में किराया संरचना में संशोधन, ईंधन से जुड़ा मुआवजा, प्रति किलोमीटर भुगतान में वृद्धि और ड्राइवरों व डिलीवरी पार्टनर्स की आय बढ़ाने जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। इस बीच, देश के कई शहरों में आज दोपहर के दौरान फूड डिलीवरी, राइड-हेलिंग और क्विक-कॉमर्स सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। गिग इकॉनमी पर बढ़ते दबाव और लाखों श्रमिकों की आजीविका से जुड़े इस विरोध प्रदर्शन ने सरकार, डिजिटल प्लेटफॉर्म कंपनियों और श्रम नीतियों पर एक नई बहस खड़ी कर दी है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन गिग वर्कर्स के अधिकारों और उनकी आर्थिक सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा मुद्दा बन सकता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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