इटली की धरती पर भारत की सांस्कृतिक विरासत की एक अनोखी झलक उस समय देखने को मिली जब इतालवी चित्रकार जियाम्पाओलो टोमासेटी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वाराणसी की भव्यता को दर्शाती एक विशेष पेंटिंग भेंट की। यह भेंट रोम में आयोजित एक औपचारिक मुलाकात के दौरान दी गई, जिसने भारत और इटली के बीच सांस्कृतिक संबंधों को एक नई गहराई प्रदान की।

इस कलाकृति में काशी के प्रसिद्ध घाटों, गंगा नदी के शांत प्रवाह और नावों के माध्यम से वाराणसी के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण को जीवंत रूप में दर्शाया गया है। कलाकार ने इस पेंटिंग को भारत और इटली के बीच एक “सांस्कृतिक सेतु” के रूप में वर्णित किया है, जो दोनों देशों की कला और परंपराओं को जोड़ने का कार्य करती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर इतालवी कलाकार के भारतीय संस्कृति के प्रति गहरे लगाव और समर्पण की सराहना की। उन्होंने अपने सोशल मीडिया संदेशों में उल्लेख किया कि जियाम्पाओलो टोमासेटी का भारतीय संस्कृति के प्रति आकर्षण चार दशकों से अधिक पुराना है। प्रधानमंत्री ने बताया कि कलाकार ने 1980 के दशक में वैदिक संस्कृति पर आधारित पुस्तकों के लिए एक चित्रकार के रूप में अपने कार्य की शुरुआत की थी। इसके बाद 2008 से 2013 के बीच उन्होंने महाभारत पर आधारित 23 विशाल चित्रों की श्रृंखला तैयार की, जिसने भारतीय महाकाव्य को एक नई दृश्यात्मक पहचान दी।



प्रधानमंत्री ने यह भी साझा किया कि रोम में प्रवासी भारतीय समुदाय के स्वागत कार्यक्रम के दौरान पाँच इतालवी कलाकारों ने भारतीय शास्त्रीय संगीत राग हंसध्वनि की प्रस्तुति दी, जिसे उन्होंने भारतीय संगीत और नृत्य के प्रति बढ़ती वैश्विक रुचि का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह देखना अत्यंत सुखद है कि भारतीय कला और संगीत अब इटली जैसे देशों में भी लोकप्रियता प्राप्त कर रहे हैं।

जियाम्पाओलो टोमासेटी भारतीय महाकाव्य महाभारत पर आधारित अपनी विशाल चित्र श्रृंखला के लिए विश्वभर में पहचाने जाते हैं। उनकी कला विशेष रूप से इसलिए चर्चित रही है क्योंकि उन्होंने यूरोपीय पुनर्जागरण शैली को भारतीय आध्यात्मिक और पौराणिक कथाओं के साथ अद्भुत रूप से मिश्रित किया है। रिपोर्टों के अनुसार, टोमासेट्टी भारतीय पौराणिक ग्रंथ महाभारत से अत्यधिक प्रभावित हुए और उन्होंने इसके अध्ययन में वर्षों का समय समर्पित किया।

जानकारी के अनुसार, उन्होंने लगभग पाँच वर्षों तक महाभारत का गहन अध्ययन किया, जिसके बाद उन्होंने इस महाकाव्य पर आधारित भव्य चित्रों की श्रृंखला तैयार की। वे लगभग सात वर्षों तक इटली के विला वृंदावन स्थित इंटरनेशनल वैदिक आर्ट अकादमी से भी जुड़े रहे। बताया जाता है कि इस संपूर्ण कलात्मक यात्रा में लगभग 12 वर्षों का समय लगा, जिसमें उन्होंने महाभारत के अनेक प्रमुख प्रसंगों को अपनी कला में स्थान दिया।

उनकी इस श्रृंखला का उद्देश्य केवल चित्रांकन नहीं बल्कि महाभारत की गहन व्याख्या प्रस्तुत करना है। इसमें उन्होंने धर्म, कर्म, युद्ध और नैतिकता के संघर्ष तथा श्रीकृष्ण के पार्थसारथी स्वरूप जैसे विषयों को केंद्र में रखा है। यह पूरी श्रृंखला भारतीय और यूरोपीय कला परंपराओं का एक अनूठा संगम मानी जाती है, जो भारतीय संस्कृति की वैश्विक स्वीकार्यता को भी दर्शाती है।

यह घटना केवल एक कलात्मक भेंट तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह भारत और इटली के बीच सांस्कृतिक संवाद और आपसी समझ को और मजबूत करने का प्रतीक बनकर उभरी है, जिसमें भारतीय सभ्यता की गहराई और उसकी वैश्विक प्रेरणा स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।

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Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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