देश की सुरक्षा और सैन्य रणनीति को लेकर एक महत्वपूर्ण और चर्चित बयान सामने आया है, जिसमें भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान अपनाई गई रणनीति और मानवीय दृष्टिकोण पर विस्तार से बात की है। यह बयान न केवल सैन्य दृष्टिकोण से अहम है, बल्कि इसके सामाजिक और राजनीतिक मायने भी गहरे हैं, जिसके चलते यह राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है।

जनरल उपेंद्र द्विवेदी, जो 30 जून 2024 को भारत के 30वें थल सेनाध्यक्ष के रूप में पदभार संभाल चुके हैं, ने अपने हालिया वक्तव्य में ऑपरेशन ‘सिंदूर’ को एक निर्णायक सैन्य अभियान बताया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना ने न केवल सटीक और समन्वित कार्रवाई की, बल्कि मानवीय मूल्यों का भी विशेष ध्यान रखा। उन्होंने एक पॉडकास्ट बातचीत के दौरान खुलासा किया कि जब लक्ष्यों पर हमला करने का समय तय किया जा रहा था, तब सेना ने इस बात का ध्यान रखा कि नमाज के समय किसी भी प्रकार की कार्रवाई न की जाए। उनके अनुसार, “जब हमें पता चला कि दूसरी तरफ लोग नमाज अदा कर रहे हैं, तो हमने उस समय हमला नहीं करने का निर्णय लिया। क्योंकि ‘सबका मालिक एक है’, इसलिए हमने ऐसा समय चुना जब प्रार्थना नहीं हो रही थी।”



यह बयान ऐसे समय में आया है जब ऑपरेशन ‘सिंदूर’ को लेकर देशभर में चर्चा तेज है। दरअसल, 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक भीषण आतंकी हमला हुआ था, जिसमें पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने एक गांव में घुसकर लोगों से उनका धर्म पूछा और फिर 26 लोगों की निर्मम हत्या कर दी। इस हमले में मुख्य रूप से हिंदू पर्यटकों को निशाना बनाया गया, हालांकि एक ईसाई पर्यटक और एक स्थानीय मुस्लिम पोनी चालक भी मारे गए। इस घटना को 2025 का पहलगाम नरसंहार कहा गया, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया।

इस हमले के बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई के तहत ऑपरेशन ‘सिंदूर’ शुरू किया, जिसका उद्देश्य आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करना था। हालांकि, इसके बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए, जब पाकिस्तान की ओर से ड्रोन हमले और गोलाबारी के जरिए जम्मू के शंभू मंदिर, पुंछ के गुरुद्वारे और ईसाई कॉन्वेंट्स जैसे धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया गया। इन हमलों को केवल सैन्य प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि भारत की सामाजिक एकता को कमजोर करने की रणनीति के रूप में देखा गया।

जनरल द्विवेदी ने अपने बयान में ऑपरेशन ‘सिंदूर’ को ‘डोमेन जॉइंटनेस’ का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने दिखाया कि भारतीय सेना, वायु सेना और अन्य सैन्य इकाइयों के बीच समन्वय किस स्तर तक विकसित हो चुका है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह ऑपरेशन भविष्य के युद्धों के लिए एक मॉडल के रूप में काम करेगा, जहां पारंपरिक युद्ध के साथ-साथ साइबर, सूचना और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में भी रणनीति तैयार की जा रही है।

हालांकि, उनके इस बयान पर समाज में मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जहां एक वर्ग इसे भारतीय सेना की मानवीय संवेदनशीलता और नैतिकता का प्रतीक मान रहा है, वहीं कुछ लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि जब पहलगाम हमले में धर्म के आधार पर निर्दोष भारतीयों की हत्या की गई, तो क्या इस तरह की संवेदनशीलता उचित है।

यह पूरा घटनाक्रम न केवल भारत-पाकिस्तान संबंधों की जटिलता को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों से नहीं, बल्कि विचारधारा, सूचना और सामाजिक एकता के स्तर पर भी लड़ा जा रहा है। ऑपरेशन ‘सिंदूर’ और उस पर सेना प्रमुख का बयान आने वाले समय में भारत की सैन्य नीति और रणनीतिक दृष्टिकोण को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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