जनरल नरवणे की 'अनदेखी' किताब और चीन का वो सच? राहुल के दावे से मचा हड़कंप
लोकसभा में राहुल गांधी द्वारा पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरणों का हवाला देने पर मचा भारी बवाल। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की आपत्ति और स्पीकर की सख्ती के बाद सदन स्थगित। जानें लद्दाख तनाव, चीनी टैंकों की घुसपैठ और 'उचित कार्रवाई' वाले उस विवादास्पद सैन्य आदेश की पूरी कहानी जिसने संसद में हंगामा खड़ा कर दिया।

Rahul Gandhi Lok Sabha : भारतीय संसद के इतिहास में सोमवार का दिन एक तीखी बहस और अप्रत्याशित हंगामे का गवाह बना। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के एक 'अप्रकाशित' संस्मरण का जिक्र कर सत्ता पक्ष को कटघरे में खड़ा कर दिया। लद्दाख सीमा पर चीन के साथ जारी तनाव और सैन्य आदेशों की स्पष्टता पर उठे इन सवालों ने न केवल सदन की कार्यवाही को बाधित किया, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संसदीय मर्यादाओं पर एक नई बहस छेड़ दी है।
क्या है पूरा विवाद: संस्मरण और वो 'आदेश' :
बहस के दौरान राहुल गांधी ने 'द कारवां' पत्रिका में प्रकाशित जनरल नरवणे के संस्मरण के कुछ अंशों का हवाला दिया। उन्होंने 31 अगस्त, 2020 की उस रात का जिक्र किया जब चीनी टैंक भारतीय सीमा की ओर बढ़ रहे थे। राहुल गांधी के अनुसार:
- जनरल नरवणे की किताब में उल्लेख है कि उस तनावपूर्ण स्थिति में जब केंद्र से निर्देश मांगे गए, तो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी से परामर्श के बाद कथित तौर पर केवल इतना कहा— "जो आपको उचित लगे, वह करें।"
- गांधी ने आरोप लगाया कि सीमा पर संकट के समय शीर्ष नेतृत्व की ओर से आदेशों में स्पष्टता का अभाव था, जिसने भारतीय सैनिकों को अनिश्चित स्थिति में डाल दिया।
सरकार का पलटवार और रक्षा मंत्री की आपत्ति :
राहुल गांधी के इन दावों पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तत्काल और कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। सरकार का पक्ष रखते हुए उन्होंने स्पष्ट किया:
- अप्रकाशित दस्तावेज: रक्षा मंत्री ने तर्क दिया कि जिस किताब का हवाला दिया जा रहा है, वह अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है और वर्तमान में रक्षा मंत्रालय की समीक्षा (Review) के अधीन है।
- संसदीय नियम: उन्होंने कहा कि सदन में ऐसे किसी दस्तावेज को कोट करना नियमों के विरुद्ध है जो सार्वजनिक डोमेन में आधिकारिक रूप से मौजूद न हो।
- लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी इस पर हस्तक्षेप किया। उन्होंने व्यवस्था देते हुए कहा कि संसदीय नियमों के तहत अप्रकाशित और समीक्षाधीन दस्तावेजों का संदर्भ लेना अनुचित है। इसी गहमागहमी के बीच राहुल गांधी का माइक म्यूट कर दिया गया, जिससे विपक्षी सांसद भड़क गए और सदन को कई बार स्थगित करना पड़ा।
गलवान के बाद का राजनीतिक गतिरोध :
यह टकराव 2020 के गलवान संघर्ष के बाद से लद्दाख सीमा पर जारी तनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच गहरी खाई को दर्शाता है। जहाँ कांग्रेस का दावा है कि सरकार सीमा की सच्चाई को दबा रही है, वहीं भाजपा ने राहुल गांधी पर सेना के संवेदनशील मामलों का राजनीतिकरण करने और सशस्त्र बलों के मनोबल को प्रभावित करने का आरोप लगाया है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
