national energy conservation day india significance : ऊर्जा केवल बिजली या ईंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वह आधारभूत शक्ति है जो आधुनिक भारत के हर क्षेत्र को गति देती है। घरों की रोशनी से लेकर उद्योगों की उत्पादन क्षमता, परिवहन नेटवर्क, डिजिटल सेवाएं, अस्पताल, स्कूल और व्यवसाय—हर गतिविधि ऊर्जा पर निर्भर है। जैसे-जैसे भारत तेज़ी से आर्थिक और तकनीकी प्रगति की ओर बढ़ रहा है, विश्वसनीय, किफायती और स्वच्छ ऊर्जा की आवश्यकता राष्ट्रीय प्राथमिकता बन चुकी है। इसी संदर्भ में ऊर्जा दक्षता और ऊर्जा संरक्षण भारत की विकास रणनीति के केंद्र में उभरकर सामने आए हैं।

भारत आज दुनिया के शीर्ष तीन ऊर्जा उपभोक्ता देशों में शामिल है और बिजली की मांग हर वर्ष नए रिकॉर्ड बना रही है। वर्ष 2023-24 में देश का कुल बिजली उत्पादन 1,739.09 बिलियन यूनिट रहा, जो 2024-25 में बढ़कर 1,829.69 बिलियन यूनिट तक पहुंच गया। यह वृद्धि 5.21 प्रतिशत की रही, जबकि 2025-26 के लिए उत्पादन लक्ष्य 2,000.4 बिलियन यूनिट तय किया गया है। इसके साथ ही बिजली आपूर्ति प्रणाली पहले की तुलना में अधिक मज़बूत और भरोसेमंद हुई है। जून 2025 में ऊर्जा की कमी मात्र 0.1 प्रतिशत दर्ज की गई और 241 गीगावॉट की पीक डिमांड बिना किसी शॉर्टफॉल के पूरी की गई, जो बेहतर मांग-आपूर्ति प्रबंधन और सिस्टम रेज़िलिएंस को दर्शाता है।

ऊर्जा मिश्रण के मोर्चे पर भी भारत तेज़ी से बदलाव कर रहा है। 31 अक्टूबर 2025 तक देश की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता 505 गीगावॉट तक पहुंच चुकी है, जिसमें से 259 गीगावॉट से अधिक क्षमता गैर-जीवाश्म स्रोतों—सौर, पवन, जल और परमाणु ऊर्जा—से प्राप्त हो रही है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारत ने पहली बार अपनी कुल बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों से हासिल कर लिया है। यह परिवर्तन न केवल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करता है, बल्कि दीर्घकालिक पर्यावरणीय संतुलन की दिशा में भी एक निर्णायक कदम है।

ऊर्जा की बढ़ती मांग के साथ सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि ऊर्जा का कुशल और जिम्मेदार उपयोग भी उतना ही आवश्यक है। ऊर्जा दक्षता का अर्थ है कम ऊर्जा में समान या बेहतर परिणाम प्राप्त करना, जबकि ऊर्जा संरक्षण का उद्देश्य बर्बादी को रोकना है। इन्हीं उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए भारत में हर वर्ष 14 दिसंबर को राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस मनाया जाता है, ताकि जागरूकता बढ़ाई जा सके और इस क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान को सम्मान दिया जा सके।

ऊर्जा संरक्षण को व्यवहार में उतारने के लिए विद्युत मंत्रालय और ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) के नेतृत्व में कई व्यापक कार्यक्रम लागू किए गए हैं। औद्योगिक क्षेत्र, जो देश की कुल ऊर्जा खपत का बड़ा हिस्सा है, वहां दक्षता बढ़ाने के लिए बाजार-आधारित कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) लागू की गई है। इसके तहत उत्सर्जन-गहन उद्योगों को ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तीव्रता लक्ष्य दिए जाते हैं और बेहतर प्रदर्शन करने वालों को व्यापार योग्य कार्बन क्रेडिट प्रदान किए जाते हैं। दिसंबर 2025 में एल्युमिनियम, सीमेंट, रिफाइनरी, पेट्रोकेमिकल्स, टेक्सटाइल और अन्य प्रमुख उद्योगों को पुराने PAT तंत्र से CCTS के तहत लाया गया, जिससे औद्योगिक डिकार्बोनाइजेशन को नई दिशा मिली।

घरेलू स्तर पर भी ऊर्जा दक्षता भारत की रणनीति का अहम स्तंभ बन चुकी है। स्टैंडर्ड्स एंड लेबलिंग कार्यक्रम के तहत 28 श्रेणियों के उपकरणों को स्टार रेटिंग दी जा रही है, जिससे उपभोक्ता ऊर्जा-कुशल उत्पाद चुन सकें। उजाला एलईडी योजना ने करोड़ों घरों में सस्ती और कुशल रोशनी पहुंचाई है, जिससे बिजली बिल और ऊर्जा खपत दोनों में कमी आई है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत एक करोड़ घरों को रूफटॉप सोलर से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है और दिसंबर 2025 तक लगभग 24 लाख घरों में यह व्यवस्था स्थापित की जा चुकी है। इसके अलावा, रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के तहत देशभर में 4.76 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिससे वितरण प्रणाली की दक्षता बढ़ी है।

भवन क्षेत्र में भी ऊर्जा संरक्षण को लेकर ठोस कदम उठाए गए हैं। एनर्जी कंजरवेशन बिल्डिंग कोड और इको निवास संहिता के माध्यम से वाणिज्यिक और आवासीय भवनों में ऊर्जा खपत घटाने, बेहतर डिजाइन और पर्यावरणीय प्रदर्शन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। इन मानकों से न केवल ऊर्जा बिल कम हो रहे हैं, बल्कि रहने और काम करने का आरामदायक माहौल भी बन रहा है।

डिजिटल और संस्थागत ढांचे को मजबूत करने के लिए UDIT जैसे टूल और नेशनल मिशन ऑन एन्हांस्ड एनर्जी एफिशिएंसी के तहत कई उप-कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। LiFE आंदोलन के जरिए जिम्मेदार जीवनशैली और व्यवहार में बदलाव को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे आम नागरिक भी ऊर्जा संरक्षण का हिस्सा बन सकें।

वैश्विक मंच पर भी भारत ऊर्जा दक्षता और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नेतृत्व की भूमिका निभा रहा है। इंटरनेशनल एनर्जी एफिशिएंसी हब में शामिल होकर भारत ने वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के साथ तालमेल बढ़ाया है। 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य, 2030 तक गैर-जीवाश्म स्रोतों से 50 प्रतिशत बिजली क्षमता और उत्सर्जन तीव्रता में 45 प्रतिशत कमी जैसे लक्ष्य भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को दर्शाते हैं। ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस और इंटरनेशनल सोलर अलायंस जैसी पहलों के माध्यम से भारत ने ग्लोबल साउथ की आवाज़ को मजबूती दी है।

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस के अवसर पर यह स्पष्ट है कि ऊर्जा संरक्षण केवल एक तकनीकी आवश्यकता नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है। सरकार, उद्योग, संस्थान और नागरिकों के संयुक्त प्रयास से ही भारत स्वच्छ, सुरक्षित और टिकाऊ ऊर्जा भविष्य की ओर बढ़ सकता है। ऊर्जा दक्षता और संरक्षण विकसित भारत की उस नींव का निर्माण कर रहे हैं, जिस पर आने वाली पीढ़ियों का भविष्य टिका होगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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