राजधानी की बदहाल वायु गुणवत्ता को सुधारने के प्रयास में, दिल्ली सरकार ने मंगलवार को क्लाउड सीडिंग का पहला चरण पूरा किया। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि आईआईटी कानपुर की मदद से किए गए इस प्रयोग के शुरुआती नतीजे फिलहाल उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहे, लेकिन दूसरा चरण जल्द ही शुरू किया जाएगा।

सिरसा के अनुसार, दूसरे दौर की क्लाउड सीडिंग के लिए सेसना विमान मेरठ हवाई पट्टी से दिल्ली की दिशा में उड़ान भर चुका है। उन्होंने कहा कि मौसम की स्थिति और दृश्यता में सुधार के साथ ही दोबारा प्रयास किया जा रहा है ताकि कृत्रिम वर्षा को प्रभावी बनाया जा सके। आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों ने बताया कि मंगलवार को बादलों की ऊंचाई लगभग 10,000 फीट थी, जिससे सीडिंग प्रक्रिया पर असर पड़ा। आमतौर पर क्लाउड सीडिंग तभी प्रभावी होती है जब बादल लगभग 5,000 मीटर से नीचे की सतह पर होते हैं और वातावरण में नमी पर्याप्त हो। इस बार, ऊंचाई पर बने बादलों में नमी की कमी रही, जिसके कारण शुरुआती परिणाम कमजोर रहे।

मौसम विज्ञान संस्था स्काईमेट वेदर के वरिष्ठ वैज्ञानिक महेश पलावत ने बताया कि शाम तक अगर बादल नीचे आते हैं तो कृत्रिम वर्षा की संभावना बढ़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि तापमान और आर्द्रता अनुकूल रही तो अगले तीन से चार घंटे में सीमित बारिश दर्ज हो सकती है। दिल्ली सरकार ने सोमवार को ही यह अभ्यास करने की योजना बनाई थी, लेकिन कानपुर और आसपास के क्षेत्रों में दृश्यता कम होने से उड़ान टालनी पड़ी। सिरसा ने कहा कि सुबह भी कुछ तकनीकी कारणों और दृश्यता के स्तर में कमी के चलते विमान को उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी गई थी। हालांकि, बाद में मौसम में सुधार होने पर अभियान शुरू हुआ।

क्लाउड सीडिंग योजना में आईआईटी कानपुर का सेसना एयरक्राफ्ट मुख्य भूमिका निभा रहा है। यह विमान कानपुर से टेक-ऑफ कर मेरठ पहुंचा और वहां से दिल्ली में सीडिंग की प्रक्रिया शुरू की गई। विशेषज्ञ बादलों में नमक या रासायनिक घोल के महीन कण छिड़ककर कृत्रिम बारिश की स्थिति उत्पन्न करने की कोशिश कर रहे हैं। आईआईटी कानपुर के निदेशक डॉ. अग्रवाल के अनुसार, पहले चरण से महत्वपूर्ण आंकड़े मिले हैं जो आगे की प्रक्रिया में सहायक होंगे। उन्होंने कहा कि प्रयोग अभी प्रारंभिक अवस्था में है और हर चरण के परिणाम से सुधार की दिशा तय होगी। डॉ. अग्रवाल ने उम्मीद जताई कि दूसरे चरण में परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो दिल्ली में कृत्रिम वर्षा के बेहतर परिणाम देखने को मिल सकते हैं।



राजधानी में प्रदूषण के स्तर को देखते हुए, यह पहल सरकार की वायु गुणवत्ता सुधार योजना का अहम हिस्सा मानी जा रही है। अधिकारी उम्मीद कर रहे हैं कि सफल क्लाउड सीडिंग से प्रदूषक कणों को नीचे गिराने में मदद मिलेगी और वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में सुधार होगा। इस प्रयोग के साथ, दिल्ली में पहली बार वैज्ञानिक तरीके से क्लाउड सीडिंग का विस्तृत प्रयास किया गया है। मौसम विभाग, आईआईटी कानपुर और स्काईमेट की संयुक्त निगरानी में चल रही इस प्रक्रिया के परिणाम आने वाले दिनों में राजधानी के पर्यावरण सुधार की दिशा तय कर सकते हैं।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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