क्या सस्ता होगा पेट्रोल? इथेनॉल वाले पेट्रोल पर पूरी तरह खत्म हुई एक्साइज ड्यूटी
केंद्र सरकार ने E22, E25, E27 और E30 इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क पूरी तरह समाप्त कर दिया है। यह फैसला भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने, जैव ईंधन उद्योग को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

E20 ईंधन डिस्पेंसर
भारत की ऊर्जा नीति में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा देने के लिए बड़ा निर्णय लिया है। वित्त मंत्रालय ने 10-11 जून 2026 को जारी अधिसूचना के माध्यम से 22 प्रतिशत, 25 प्रतिशत, 27 प्रतिशत और 30 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल, जिन्हें क्रमशः E22, E25, E27 और E30 के नाम से जाना जाता है, पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी) को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। सरकार के इस फैसले को देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा, कच्चे तेल के आयात में कमी और स्वदेशी जैव ईंधन उद्योग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सरकार द्वारा दी गई छूट के तहत E22 पेट्रोल में 78 प्रतिशत पेट्रोल और 22 प्रतिशत इथेनॉल, E25 में 75 प्रतिशत पेट्रोल और 25 प्रतिशत इथेनॉल, E27 में 73 प्रतिशत पेट्रोल और 27 प्रतिशत इथेनॉल तथा E30 में 70 प्रतिशत पेट्रोल और 30 प्रतिशत इथेनॉल का मिश्रण होगा। ये सभी ईंधन वर्तमान में व्यापक रूप से उपयोग किए जा रहे E20 पेट्रोल से अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन हैं।
वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार इन उच्च इथेनॉल मिश्रित ईंधनों पर लागू केंद्रीय उत्पाद शुल्क को शून्य कर दिया गया है। इसका अर्थ है कि E22, E25, E27 और E30 श्रेणी के पेट्रोल पर अब कोई केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी नहीं लगेगी। सरकार का मानना है कि इस कदम से तेल विपणन कंपनियों और इथेनॉल उत्पादकों को उच्च मिश्रण वाले ईंधनों को अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब भारत लगातार अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रहा है। देश अपनी कुल तेल आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जिससे वैश्विक बाजार में कीमतों और आपूर्ति संबंधी उतार-चढ़ाव का सीधा असर पड़ता है। ऐसे में इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और विदेशी मुद्रा की बचत के एक प्रभावी साधन के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार का यह कदम केवल तेल आयात पर निर्भरता कम करने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए घरेलू जैव ईंधन उत्पादन को बढ़ावा देने, गन्ना और अनाज आधारित इथेनॉल उद्योग को मजबूत करने तथा वाहन उत्सर्जन में कमी लाने का भी लक्ष्य रखा गया है। स्वच्छ ईंधन के रूप में इथेनॉल का बढ़ता उपयोग पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस फैसले की पृष्ठभूमि में हाल ही में भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) और केंद्र सरकार द्वारा E22, E25, E27 और E30 ईंधनों के लिए नए मानक अधिसूचित किए गए थे। मई 2026 से प्रभावी हुए इन मानकों ने उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल के उत्पादन और वितरण के लिए आवश्यक नियामक ढांचा तैयार किया। अब उत्पाद शुल्क में छूट देकर सरकार ने इन नए ईंधनों को बाजार में अपनाने की प्रक्रिया को और गति देने का प्रयास किया है।
हालांकि, इस घोषणा के बाद भी आम उपभोक्ताओं को तत्काल पेट्रोल की कीमतों में राहत मिलने की संभावना नहीं है। देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। ईंधन की अंतिम कीमतें केवल केंद्रीय करों पर निर्भर नहीं होतीं, बल्कि कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों, डीलर कमीशन, राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले वैट, विपणन मार्जिन और परिवहन लागत जैसे कई कारकों से प्रभावित होती हैं। इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का उद्देश्य तत्काल मूल्य कटौती नहीं, बल्कि दीर्घकालिक ऊर्जा परिवर्तन को प्रोत्साहित करना है।
इस निर्णय का लाभ देश की प्रमुख तेल विपणन कंपनियों जैसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड को भी मिल सकता है। केंद्रीय उत्पाद शुल्क समाप्त होने से इन कंपनियों के लिए उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों का विस्तार करना अधिक आर्थिक रूप से आकर्षक बन जाएगा।
वहीं दूसरी ओर, इस घोषणा का सकारात्मक प्रभाव किसानों और चीनी उद्योग पर भी देखने को मिल सकता है। इथेनॉल की बढ़ती मांग से गन्ना और अनाज की खरीद में वृद्धि होने की संभावना है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिल सकते हैं। साथ ही इथेनॉल उत्पादन क्षमता में विस्तार का रास्ता भी खुल सकता है। इसी उम्मीद के चलते घोषणा के बाद कई चीनी कंपनियों के शेयरों में भी तेजी दर्ज की गई।
वाहन मालिकों के लिए सबसे बड़ा सवाल E22 से E30 ईंधनों की अनुकूलता को लेकर है। वर्तमान में भारत में बिकने वाले अधिकांश नए वाहन E20 पेट्रोल के लिए डिजाइन किए गए हैं। E22 से E30 तक के उच्च मिश्रण वाले ईंधनों का उपयोग वाहन निर्माता कंपनियों द्वारा निर्धारित तकनीकी मानकों और इंजन की क्षमता पर निर्भर करेगा। हालांकि सरकार द्वारा नए मानक अधिसूचित किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि E30 पेट्रोल तुरंत पूरे देश में सामान्य पेट्रोल का स्थान ले लेगा।
कुल मिलाकर केंद्र सरकार का यह फैसला केवल कर छूट का मामला नहीं है, बल्कि भारत की ऊर्जा नीति में एक रणनीतिक बदलाव का संकेत है। यह कदम स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि सरकार E20 से आगे बढ़ते हुए E22, E25, E27 और E30 जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रित ईंधनों को प्रोत्साहित करना चाहती है। इसके माध्यम से न केवल कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने का प्रयास किया जा रहा है, बल्कि देश की जैव ईंधन अर्थव्यवस्था को भी नई गति देने की तैयारी की जा रही है। आने वाले वर्षों में यह नीति भारत की ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
