ईएसआईसी के 75वें स्थापना वर्ष का शुभारंभ, डॉ. मांडविया ने जारी किया स्मारक सिक्का
केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने 15 करोड़ लाभार्थियों वाले ईएसआईसी के प्लैटिनम जयंती उत्सव में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और वार्षिक जांच के नए प्रावधानों पर जोर दिया।

नई दिल्ली के भारत मंडपम में ईएसआईसी के 75वें स्थापना दिवस पर केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया स्मारक सिक्का और कॉफी टेबल बुक जारी करते हुए।
नई दिल्ली के भारत मंडपम में 24 फरवरी 2026 को कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) ने अपनी सेवा के 75वें वर्ष के उत्सव का ऐतिहासिक शुभारंभ किया। यह आयोजन सात दशकों से अधिक समय से देश के करोड़ों श्रमिकों और उनके परिवारों को प्रदान की जा रही समर्पित सेवा का प्रतीक है। इस गरिमामयी अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने मुख्य भाषण दिया। कार्यक्रम में लोकसभा सांसद श्री एन. के. प्रेमचंद्रन, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की सचिव सुश्री वंदना गुरनानी, ईपीएफओ के केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त श्री रमेश कृष्णमूर्ति, आईएलओ की निदेशक सुश्री मिचिको मियामोटो सहित ईएसआईसी और ईपीएफओ के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।
ईएसआईसी की विकास यात्रा: एक दवाखाने से 15 करोड़ लाभार्थियों तक
डॉ. मनसुख मांडविया ने ईएसआईसी की यात्रा को राष्ट्र सेवा और सुधार का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने रेखांकित किया कि 1952 में मात्र 1.2 लाख लाभार्थियों और एक एकल दवाखाने के साथ शुरू हुआ यह सफर आज 166 अस्पतालों, 17 चिकित्सा महाविद्यालयों और लगभग 1,600 दवाखानों के विशाल नेटवर्क तक पहुँच चुका है, जो 15 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को सेवा प्रदान कर रहा है। केंद्रीय मंत्री ने इस विकास की तुलना एक बच्चे के परिपक्व होने से करते हुए कहा कि संगठन ने समय के साथ खुद को मजबूत कर सामाजिक सुरक्षा के एक मजबूत स्तंभ के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने जोर दिया कि "ईएसआईसी को सुधार-और-प्रदर्शन की दृष्टिकोण अपनाते रहना चाहिए और अपने 75वें वर्ष में सेवा वितरण को और बेहतर बनाने के लिए सामूहिक 'संकल्प' लेने चाहिए।"
स्वास्थ्य सुरक्षा के वैश्विक मानक और एआईआईएमएस जैसी गुणवत्ता
केंद्रीय मंत्री ने ईएसआईसी के चिकित्सा मानकों को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एआईआईएमएस) के स्तर तक ले जाने का आह्वान किया। उन्होंने सभी अस्पतालों में दवाओं, उपकरणों और चिकित्सकों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि आंतरिक सुविधाओं को मजबूत कर बाहरी रेफरल को न्यूनतम किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत में "स्वास्थ्य ही सेवा है, और सेवा ही हमारा संस्कार है।" डॉ. मांडविया ने चिकित्सा पेशेवरों से अनुशासन बनाए रखने और देशवासियों के विश्वास का सम्मान करने का आग्रह करते हुए कहा कि "ईएसआईसी को स्वास्थ्य सुरक्षा का वैश्विक उदाहरण बनना चाहिए क्योंकि सामूहिक प्रयास और टीमवर्क के माध्यम से ही 'नया भारत' का निर्माण हो रहा है।"
श्रमिक कल्याण के लिए नए प्रावधान और वार्षिक स्वास्थ्य जांच
श्रम संहिताओं के महत्व पर चर्चा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने 40 वर्ष और उससे अधिक आयु के श्रमिकों के लिए ईएसआईसी के माध्यम से मुफ्त वार्षिक स्वास्थ्य जांच के प्रावधान को उजागर किया। उन्होंने कहा कि यह अनिवार्य जांच श्रमिक कल्याण को मजबूत करने और एक संरक्षित कार्यबल के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगी। श्रम एवं रोजगार सचिव सुश्री वंदना गुरनानी ने भी इस बात को दोहराया कि एक स्वस्थ और संतुष्ट कार्यबल राष्ट्र की आर्थिक वृद्धि में अधिक प्रभावी योगदान देता है। उन्होंने बताया कि ईएसआईसी केवल रोग का उपचार नहीं कर रहा, बल्कि गरीबी को रोककर और परिवारों के कमाऊ सदस्यों की रक्षा कर राष्ट्र-निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
स्मारक सिक्का, कॉफी टेबल बुक और महत्वपूर्ण एमओयू का विमोचन
इस प्लैटिनम जयंती को यादगार बनाने के लिए 'ईएसआईसी@75' स्मारक सिक्के और एक विशेष कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया गया, जो निगम की 75 वर्षों की विरासत और मील के पत्थर को प्रदर्शित करती है। इसी अवसर पर "स्वस्थ्य रथ" पहल और वार्षिक स्वास्थ्य जांच शिविरों का भी शुभारंभ किया गया। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच बढ़ाने के लिए दो महत्वपूर्ण एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। पहला समझौता ईएसआईसी और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के बीच ईएसआई योजना को आयुष्मान भारत - प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएम-जेएवाई) के साथ अभिसरण के लिए हुआ। दूसरा समझौता ईएसआईसी और राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशांकन प्रयोगशाला मान्यता बोर्ड (एनएबीएल) के बीच प्रयोगशाला सेवाओं के मानकीकरण के लिए किया गया।
विशेष सेवा पखवाड़ा और भविष्य की रूपरेखा
ईएसआईसी अपनी स्थापना के उपलक्ष्य में 24 फरवरी से 10 मार्च 2026 तक सभी क्षेत्रीय कार्यालयों और अस्पतालों में 'विशेष सेवा पखवाड़ा' मनाएगा। इस दौरान स्वास्थ्य जांच शिविर, व्यावसायिक रोगों का पता लगाने के लिए सेमिनार, स्वच्छता अभियान, योग शिविर और लंबित दावों के शीघ्र निपटान के लिए विशेष अभियान चलाए जाएंगे। कार्यक्रम के दौरान आयोजित पैनल चर्चाओं में "नए सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत असेवितों तक पहुंचना" और "चिकित्सा देखभाल के विस्तार के लिए नए मॉडल" जैसे विषयों पर आईएलओ, डब्ल्यूएचओ और स्वास्थ्य मंत्रालय के विशेषज्ञों ने मंथन किया। 1952 में कानपुर और दिल्ली से शुरू हुई यह योजना आज 36 राज्यों के 713 जिलों तक फैल चुकी है, जो विकसित भारत के लिए एक सशक्त कार्यबल तैयार करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराती है।

Pratahkal Bureau
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