जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ विश्व कप में भारतीय निशानेबाज ईशा सिंह ने ऐसा प्रदर्शन किया जिसने न केवल प्रतियोगिता का परिणाम बदल दिया बल्कि निशानेबाजी की दुनिया में नया इतिहास भी लिख दिया। महिला 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में ईशा सिंह ने स्वर्ण पदक जीतते हुए अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक दर्ज की। यह जीत इसलिए भी विशेष मानी जा रही है क्योंकि इसी प्रदर्शन के साथ उन्होंने सीनियर और जूनियर दोनों विश्व रिकॉर्ड एक साथ अपने नाम कर लिए।

प्रतियोगिता के फाइनल में 21 वर्षीय ईशा सिंह ने कुल 50 में से 43 अंक हासिल किए और अपने सटीक निशानेबाजी कौशल से सभी प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ दिया। इस शानदार प्रदर्शन के साथ उन्होंने दक्षिण कोरिया की किम ये-जी द्वारा बनाए गए 42 अंकों के पिछले विश्व रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया। इससे पहले का जूनियर विश्व रिकॉर्ड 41 अंकों का था, जिसे भी ईशा ने पीछे छोड़ते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया।

फाइनल मुकाबले में जर्मनी की डोरेन वेनकेम्प ने 38 अंकों के साथ रजत पदक हासिल किया, जबकि बुल्गारिया की पूर्व विश्व चैंपियन मीरोस्लावा मिनचेवा 31 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। यह मुकाबला अत्यंत प्रतिस्पर्धी माना जा रहा था, जिसमें यूरोप और एशिया के शीर्ष निशानेबाज शामिल थे, लेकिन ईशा सिंह ने शुरुआत से ही अपने प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखते हुए बढ़त बनाए रखी।

मुकाबले के दौरान ईशा ने दबाव की परिस्थितियों में भी संयम और सटीकता का परिचय दिया। एलिमिनेशन राउंड्स में भी उनका प्रदर्शन स्थिर रहा और उन्होंने लगातार श्रेष्ठ निशानेबाजी करते हुए फाइनल में बढ़त बनाए रखी। पूरे मुकाबले में उनकी एकाग्रता और तकनीकी नियंत्रण ने उन्हें अन्य दिग्गज खिलाड़ियों से अलग साबित किया।

इस जीत के साथ भारत के लिए यह उपलब्धि और भी महत्वपूर्ण हो गई क्योंकि म्यूनिख विश्व कप में यह देश का पहला पदक भी साबित हुआ। 43 अंकों का नया विश्व रिकॉर्ड बनाकर ईशा सिंह ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई और यह संकेत दिया कि वह आने वाले वैश्विक खेल आयोजनों में भारत की प्रमुख दावेदारों में से एक होंगी।

ईशा सिंह भारत की सबसे युवा और प्रतिभाशाली पिस्टल निशानेबाजों में से एक मानी जाती हैं। 21 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक सहित कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। इसके अलावा वह पेरिस ओलंपिक 2024 में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। वह 10 मीटर एयर पिस्टल और 25 मीटर पिस्टल दोनों स्पर्धाओं में अपनी दक्षता के लिए जानी जाती हैं।

म्यूनिख में मिली यह ऐतिहासिक सफलता न केवल उनके व्यक्तिगत करियर के लिए एक मील का पत्थर है, बल्कि भारतीय निशानेबाजी के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को भी दर्शाती है। यह प्रदर्शन आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को और अधिक मजबूत करता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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