Chennai environmental conference 2025 : चेन्नई में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के दक्षिणी क्षेत्रीय सम्मेलन-2025 का दूसरे दिन का सत्र कलैवनार आरंगम में संपन्न हुआ, जिसमें तटीय सुरक्षा, समुद्री पारिस्थितिकी और हरित भविष्य पर विशेषज्ञों ने व्यापक मंथन किया। एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और दक्षिणी क्षेत्र पीठ की न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति पुष्पा सत्यनारायण के मार्गदर्शन में आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के पर्यावरणविदों, न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

दूसरे दिन की शुरुआत तटीय क्षेत्रों में सुरक्षा और मानवीय गतिविधियों के पर्यावरणीय प्रभाव पर चर्चा से हुई। कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज ने प्लास्टिक प्रदूषण और शहरी विकास के समुद्री जीवन पर प्रभाव पर ध्यान दिलाया। डॉ. मुरली कृष्ण चिमाता ने भारत की 11,098 किलोमीटर लंबी तटरेखा में प्लास्टिक उत्सर्जन और 405 वैश्विक मृत क्षेत्रों की स्थिति का विवरण देते हुए जैव विविधता और आजीविका पर पड़ने वाले आर्थिक और पारिस्थितिक प्रभावों को उजागर किया।

डॉ. कलैयारासन ने तटीय सुरक्षा में केरल जैसे राज्यों की चुनौतियों को रेखांकित किया, जहां कटाव, अपशिष्ट प्रबंधन और प्रवर्तन संबंधी समस्याएं लगातार बनी हुई हैं। उन्होंने एनसीएससीएम द्वारा शुरू की गई तलछट कोशिकाओं की अवधारणा और 1992-2022 तक तटरेखा में हुए परिवर्तन, जलवायु परिवर्तन अनुमानों और भविष्य की चुनौतियों पर विस्तृत जानकारी दी।

पर्यावरणविद् डॉ. टी.डी. बाबू ने मडफ़्लैट्स, लैगून और मत्स्य पालन पर मानवीय गतिविधियों के दुष्प्रभाव को उजागर करते हुए तटीय इकोसिस्टम के जिम्मेदार प्रबंधन पर जोर दिया। उन्होंने बंगाल की खाड़ी और तमिल तटीय भू-दृश्यों में समुद्री घास और मैंग्रोव की पारिस्थितिक महत्वता को रेखांकित किया।

सम्मेलन का समापन भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर. महादेवन की उपस्थिति में हुआ। एनजीटी अध्यक्ष ने उद्योगों की पारिस्थितिक बहाली में जिम्मेदारी और कानूनी तथा प्रशासनिक योगदानों को सराहा। समापन सत्र में न्यायमूर्ति महादेवन ने संस्कृत श्लोक का उल्लेख करते हुए कहा, “न्याय के माध्यम से, आइए हम पृथ्वी की रक्षा करें; नियमन के माध्यम से, आइए हम जीवन के खजाने की रक्षा करें। नेक कार्यों में एक साथ, हम एक हरित पर्यावरण को बनाए रखें।”

यह सम्मेलन न केवल तटीय सुरक्षा और पर्यावरणीय संरक्षण की दिशा में ठोस कदम साबित हुआ, बल्कि भारत में पर्यावरणीय नीति, न्यायिक दृष्टिकोण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता को भी उजागर करता है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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