भारत के प्रमुख तीर्थस्थल और गंगा की पवित्र नगरी हरिद्वार में एक ऐतिहासिक और संवेदनशील प्रस्ताव पर विचार चल रहा है। राज्य सरकार ने धार्मिक संतों और श्री गंगा सभा की मांगों को ध्यान में रखते हुए हरिद्वार के लगभग 105 घाटों में गैर‑हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव को विशेष रूप से आने वाले अर्ध कुम्भ मेला 2027 के दौरान लागू करने की संभावना है, जो हरिद्वार में लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगा।


सूत्रों के अनुसार, प्रस्ताव का उद्देश्य तीर्थयात्रियों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और घाटों की धार्मिक पवित्रता को बनाए रखना है। इस दिशा में सरकार हरिद्वार और ऋषिकेश को “सनातन पवित्र शहर” घोषित करने पर भी विचार कर रही है, ताकि इन नगरों की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को और सुदृढ़ किया जा सके।

यह प्रस्ताव मुख्य रूप से श्री गंगा सभा और धार्मिक संतों की ओर से उठाई गई मांगों पर आधारित है। श्री गंगा सभा का कहना है कि ऐतिहासिक दृष्टि से पूर्व‑स्वतंत्रता कालीन कुछ नियमों और स्थानीय नगर निगम आदेशों में गैर‑हिंदुओं के प्रवेश पर सीमा का उल्लेख है। संगठन का तर्क है कि घाटों की पवित्रता और तीर्थयात्रियों की सुविधा बनाए रखने के लिए यह कदम आवश्यक है।

हालांकि, वर्तमान में यह कोई औपचारिक प्रतिबंध नहीं है, बल्कि केवल विचाराधीन प्रस्ताव है। उत्तराखंड सरकार ने कहा है कि किसी भी अंतिम निर्णय से पहले सभी संबंधित पक्षों और विशेषज्ञों से परामर्श किया जाएगा। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि संविधान के समानता और धर्म स्वतंत्रता के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए ही कोई निर्णय लिया जाएगा।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी धार्मिक स्थल पर किसी विशेष समुदाय के लोगों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से संवैधानिक सवाल उठ सकते हैं। भारत में सार्वजनिक स्थल और नदी घाट आमतौर पर सभी नागरिकों के लिए खुले होते हैं, और धार्मिक आधार पर भेदभाव करना संवैधानिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यह प्रस्ताव पहले ही सामाजिक और राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है। समर्थक इसे हरिद्वार की धार्मिक पवित्रता को सुरक्षित रखने और तीर्थयात्रियों की सुविधा बढ़ाने वाला कदम मानते हैं। वहीं, आलोचक इसे धर्म के आधार पर भेदभाव और सार्वजनिक स्थल पर प्रतिबंध के रूप में देख रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रस्ताव लागू किया गया, तो यह न केवल उत्तराखंड के धार्मिक परिदृश्य को प्रभावित करेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक सहिष्णुता, पर्यटन और कानूनी दृष्टी से महत्वपूर्ण चर्चा का केंद्र बन सकता है। हरिद्वार में घाटों में गैर‑हिंदुओं के प्रवेश पर विचार किए जा रहे इस प्रस्ताव की व्यापक धार्मिक, कानूनी और सामाजिक पृष्ठभूमि है। आने वाले महीनों में सरकार की बैठकें और निर्णय इस ऐतिहासिक तीर्थस्थल की धार्मिक नीति और सांस्कृतिक पहचान को नई दिशा दे सकते हैं। अर्ध कुम्भ मेला 2027 के दृष्टिगत यह कदम विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, और पूरे देश की नजरें उत्तराखंड सरकार की इस पहल पर टिकी हैं।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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