Tamil Nadu Voter List Update 2025 : तमिलनाडु में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) अभियान ने राज्य की राजनीति और लोकतंत्र पर गहरा प्रभाव डालना शुरू कर दिया है। 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची को स्वच्छ और त्रुटिहीन बनाने की चुनाव आयोग की मुहिम, अब लाखों वोटरों के नाम काटे जाने की आशंका के कारण बड़े विवाद का केंद्र बन गई है। यह मामला सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा एक संवेदनशील मुद्दा बन चुका है, जिसने राज्य में सियासी तूफान खड़ा कर दिया है।

चुनाव आयोग के प्राथमिक अनुमानों के अनुसार, एसआईआर प्रक्रिया के तहत राज्य की मतदाता सूची से 40 से 50 लाख वोटरों के नाम हटाए जा सकते हैं। तमिलनाडु में कुल 6.41 करोड़ मतदाता हैं और इस व्यापक छंटनी का सीधा असर चुनावी परिदृश्य पर पड़ेगा। आंकड़ों की बात करें तो, अब तक 25.72 लाख मृत मतदाताओं की पहचान हो चुकी है, जिनके नाम हटाए जाने निश्चित हैं। इसके अतिरिक्त, 39 लाख मतदाता स्थायी रूप से अपना पता बदल चुके हैं, जबकि 9 लाख वोटरों का कोई पता नहीं चल पा रहा है। साथ ही, 3.32 लाख डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन वाले मतदाताओं की सूची भी तैयार है। इन स्पष्ट आधारों पर, कम से कम 28 लाख नाम मतदाता सूची से बाहर हो जाएंगे। हालांकि, सबसे बड़ी चिंता 9 लाख अनट्रेसेबल (untraceable) वोटरों को लेकर है, जिनके नाम 11 दिसंबर तक अपील जमा न करने पर कट सकते हैं।


जहां एक ओर चुनाव आयोग इस कदम को फर्जी वोटिंग रोकने और मतदाता सूची को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक बता रहा है, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री एमके स्टालिन सहित प्रमुख विपक्षी दलों ने इस अभियान को 'खतरनाक' करार दिया है। वीसीके नेता थोल थिरुमावलावन ने तो सीधे तौर पर चेतावनी दी है कि इससे करीब एक करोड़ नाम कट सकते हैं, जिसे उन्होंने लोकतंत्र के लिए खतरा बताया। बिहार में 43 लाख नाम काटे जाने का हवाला देते हुए उन्होंने इस मुद्दे पर संसद में बहस की मांग भी की है। इस प्रक्रिया में तब और देरी आ गई जब राजस्व अधिकारियों ने बीएलओ (बूथ लेवल अधिकारी) का अतिरिक्त कार्य करने से इनकार कर दिया।


चुनाव आयोग ने मतदाताओं को राहत देते हुए अपील जमा करने की अंतिम तारीख 11 दिसंबर तक बढ़ा दी है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद भी, स्थायी रूप से घर शिफ्ट कर चुके मतदाताओं को दोबारा रजिस्ट्रेशन का मौका दिया जाएगा। इस प्रक्रिया के तहत, 63.2 लाख इलेक्टोरल फॉर्म वितरित किए गए हैं, लेकिन अभी भी 41 लाख लोगों को फॉर्म मिलना बाकी है। मतदाता फॉर्म-6 (नए रजिस्ट्रेशन) या फॉर्म-7 (नाम हटाने पर आपत्ति) भरकर ऑनलाइन या बीएलओ के माध्यम से अपने रिकॉर्ड अपडेट कर सकते हैं। आयोग ने एक टोल-फ्री हेल्पलाइन भी जारी की है और आश्वस्त किया है कि अगर किसी का नाम गलती से कट जाता है, तो अपील का रास्ता खुला है।

यह एसआईआर अभियान तमिलनाडु के चुनावी इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। यह मतदाता सूची को अद्यतन करने की प्रशासनिक आवश्यकता और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा के बीच के जटिल संतुलन को दर्शाता है। 11 दिसंबर की समय सीमा न केवल लाखों मतदाताओं के लिए निर्णायक है, बल्कि यह लोकतंत्र में मतदाता सूची की विश्वसनीयता और पारदर्शिता की अग्निपरीक्षा भी है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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